हमारे आर्य हिंदू परिवारों में जब पंडित लोग कोई संकल्प दिलाते हैं तो उस समय वह जिस मंत्र को बोलते हैं उसमें ‘जम्बूद्वीपे भरतखंडे ‘ – यह शब्द आते हैं। यह मंत्र आर्य विचारधारा के कितना अनुकूल है या कितना प्रतिकूल है ? – हम इस पर कोई चर्चा नहीं करेंगे। परंतु इस मंत्र या […]
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ओ३म् ========== राम को हमारे पौराणिक बन्धु ईश्वर मानकर उनकी मूर्तियों की पूजा अर्थात् उनको सिर नवाते हैं और यत्रतत्र समय-समय पर राम चरित मानस का पाठ भी आयोजित किया जाता है। वाल्मीकि रामायण ही राम के जीवन पर आद्य महाकाव्य एवं इतिहास होने सहित प्रामाणिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में परवर्ती काल में अनेक […]
आर्यावर्त कालीन आर्य राजाओं की यह विशेषता रही कि वे भारतवर्ष की केंद्रीय सत्ता के प्रति सदैव निष्ठावान रहे । सुदूर प्रांतों में अलग स्वतंत्र राज्य होने के उपरांत भी केंद्र की सत्ता के प्रति वे अपनी आस्था को वैसे ही बनाए रहे जैसे एक पुत्र अपने पिता के प्रति निष्ठावान बना रहता है । […]
महाराणा प्रताप हमारे इतिहास के एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं , जिन पर आने वाली पीढियां युग युगांत तक गर्व करेंगी । 1572 में वह मेवाड़ की गद्दी पर बैठे तो 4 वर्ष पश्चात ही उन्हें 1576 ई0 में तत्कालीन मुगल बादशाह अकबर से हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध लड़ना पड़ा । इसी युद्ध के पश्चात […]
जब औरंगजेब ने मथुरा का श्रीनाथ मंदिर तोड़ा तो मेवाड़ के नरेश राज सिंह 100 मस्जिद तोड़ी थीं । अपने पुत्र भीम सिंह को गुजरात भेजा, कहा ‘सब मस्जिद तोड़ दो तो भीम सिंह ने 300 मस्जिद तोड़ दी थी’। वीर दुर्गादास राठौड़ ने औरंगजेब की नाक में दम कर दिया था और महाराज अजीत […]
शत्रु इतिहास लेखकों द्वारा लिखे गए हमारे इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसमें अधिकतम युद्ध जीतने वाले हिंदू राजाओं को ही पराजित दिखाया जाता है । बहुत ही चालाकी के साथ हमारे हिंदू वीर योद्धाओं के विजयी युद्ध का उल्लेख या तो बहुत संक्षिप्त में किया जाता है या फिर किया ही […]
महाराणा प्रताप नाम के हिंदू वीर योद्धा ने अकबर को 1576 से 1585 तक निरंतर चित्तौड़ में उलझा रखा उसका परिणाम यह निकला कि अकबर के 10 वर्ष हमारे अकेले वीर योद्धा महाराणा प्रताप से लड़ते हुए गुजर गए । तब उसने 1585 में देश के अन्य हिस्सों पर अपने नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास […]
अकबर चित्तौड़ को लेने में सफल हो गया और हमारे इतिहासकारों द्वारा उसे महान होने का गौरव भी दे दिया गया। हम उसे प्रचलित इतिहास में इसी नाम से पढ़ते हैं, पर उसकी महानता को इतिहास पर थोपते ही ‘भारत का इतिहास’ मर गया। अपने गौरवपूर्ण अतीत से मानो भारत का संबंध विच्छेद हो गया। […]
इतिहास का यह एक कटु सत्य है कि वैदिक सभ्यता संस्कृति ही संसार की सबसे प्राचीन और प्रमाणिक सभ्यता और संस्कृति है । जब थे दिगंबर रूप में वे जंगलों में थे घूमते । प्रासाद के तोरण हमारे चंद्र को थे चूमते ।। जयशंकर प्रसाद जी ने यह पंक्तियां यूं ही नहीं कह दी होंगी […]
मोहम्मद बिन तुगलक का शासनकाल भारतवर्ष में 1325 ईसवी से 1351 ईसवी तक 26 वर्ष का माना जाता है । हमें इतिहास में इस प्रकार पढ़ाया जाता है कि जैसे उसके शासनकाल में पूर्णरूपेण शांति रही और हिंदू पूर्णतया मरी हुई जाति के रूप में अपने आत्मसम्मान को बेचकर चुपचाप उसके शासनादेशों का पालन करता […]