शिव कुमार गोयल आज आदरणीय शिवकुमार गोयल जी हमारे बीच नही हैं, पर उनके विचार हमारे बीच जरूर हैं। उनका गंभीर और राष्ट्रवादी लेखन आजीवन हमारा मार्गदर्शन करेगा। 31 अक्टूबर उनकी जयंती होती है, इस अवसर पर उन्हीं की पुस्तक ‘क्रांतिकारी आंदोलन’ से प्रस्तुत है उनका यह आलेख। बाबूजी को श्रद्घांजलि के साथ-श्रीनिवास आर्य अंग्रेजों […]
Category: महत्वपूर्ण लेख
युवा वर्ग को विचार शक्ति सबल, सक्षम और सफ ल बनाती है, और विचार को संस्कार प्रबल करता है। संस्कारहीन युवा सृजनात्मक विचार शक्ति से शून्य होता है। सृजनात्मक विचार शक्ति सुसंस्कृत समाज की संरचना का आधारभूत सत्य है। आप देखेंगे तो पता चलेगा कि समाज में दो विचारधाराएँ सदा प्रवाहित रही हैं एक वह […]
नई संभावनाओं का अंतरिक्ष
जाहिद खान अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने कामयाबी का एक और नया अध्याय लिख दिया है। हाल ही में उसने खगोलीय शोध को समर्पित भारत की पहली वेधशाला एस्ट्रोसैट का सफल प्रक्षेपण किया। ‘एस्ट्रोसैट’ बहु-तरंगदैध्र्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान […]
सुनील तिवारी केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को शुरू हुए एक साल का समय हो चुका है। गौरतलब है कि पिछले साल गांधी जयंती के सुअवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना की शुरुआत बड़े जोर-शोर से की थी। उसके बाद देश के लगभग सभी नेता भारत को स्वच्छ बनाने की मुहिम […]
प्रवीन गुगनानी सम्पूर्ण भारत में दादरी की धूम है. नेता दादरी के पहाड़े पढ़ रहें हैं तो उनके चमचे दादरी की गिनती को अनगिनत तक गिनें जा रहे हैं. धर्मनिरपेक्षता की मोक्ष भूमि बन गया है दादरी. दु:ख तो सभी को है, सम्पूर्ण भारत को है. अंतत: हमारें संस्कार और हमारा देश सर्वे भवन्तु सुखिन: […]
सियासत का अखाड़ा बनी दादरी
पीयूष द्विवेदी इसे इस देश की सियासत की क्रूर व्यापकता कहें या हमारे सियासतदारों की संवेदनहीनता कि यहाँ भूखे आदमी की रोटी से लेकर मुर्दा आदमी के कफऩ तक कहीं भी सियासत शुरू हो जाती है। जहाँ कहीं भी वोटों की गुंजाइश दिखी नहीं कि हमारे सियासतदां मांस के टुकड़े पर गिद्धों के झुण्ड की […]
अशोक प्रवृद्धअर्थ अर्थात धन की महता से कौन परिचित नहीं है । अर्थ जीवन की मूलभूत आवश्यकता है, और मनुष्यों के लिए धन का अभाव असह्य है। यद्यपि मानव जीवन का लक्ष्य निरन्तर उन्नति के पथ पर आरूढ़ होना है, और उसकी प्राप्ति का साधन ऐसा प्रयोगात्मक ज्ञान है, जिस पर चलकर मनुष्य मोक्ष तक […]
गतांक से आगे… जाटों ने इस युद्घ में मराठा पेशवा सेना का पूरा साथ दिया। यही कारण था कि पानीपत की तीसरी लड़ाई अब्दाली के हाथों हार जीने पर भी केवल दस वर्ष बाद ही दिल्ली तथा संपूर्ण उत्तर भारत में तथा सिंधु पार अटक तक हिंदुओं की सेनाएं अपना वर्चस्व स्थापित करने में सफल […]
निरंकार सिंह महात्मा गांधी ने ऐसी हिंसक पंचायती राज व्यवस्था की कल्पना नहीं की थी जैसी कि आज उत्तर भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रही है। हमने ग्रामसभाओं को जिस तरह की राजनीति का अखाड़ा बना दिया है उससे ग्रामीण समाज की समरसता और एकता नष्ट हो गई है। उत्तर प्रदेश के नब्बे […]
डा. भरत झुनझुनवाला कृषि उत्पादों के मूल्य पिछडऩे के कारण खेती घाटे का सौदा होती जा रही है। फलस्वरूप किसान ऋण लेने को मजबूर होता जा रहा है। ऋण लेने के बाद वे ब्याज और बीमा के प्रीमियम भी अदा करते हैं। उनकी आय पहले ही कम थी। अब उसमें एक हिस्सा सरकारी बैंकों तथा […]