छत्तीसगढ़ का अपना एक गौरवपूर्ण इतिहास है। प्राचीन काल में इसे ‘दक्षिण कोशल’ के नाम से जाना जाता था। यहां छठी शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक सरयूपरिया, पांडुवंशी, सोमवंशी कलचुरि तथा नामवंशी शासकों का शासन रहा। चालुक्य शासक अनमदेव ने वर्ष 1320 ई. में बस्तर में अपने राजवंश की स्थापना की थी। 16वीं शताब्दी में […]
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पूज्य पिताश्री महाशय राजेन्द्र सिंह आर्य जी की पुण्यतिथि: 13 सितंबर पर विशेष पिता एक अहसास है-पिता हमारी बुलंदियों की नींव रखता है-‘‘अपने सपनों में, और उसे साक्षात करता है-अपने संघर्ष से, अपने पुरूषार्थ से, अपने उद्यम से, अपने त्याग से और अपनी तपस्या से। हम जब-जब अपने जीवन पथ पर कहीं बुलंदियों को छूते […]
अरब देश का भारत, भृगु के पुत्र शुक्राचार्य तथा उनके पोत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है, यहाँ तक कि “हिस्ट्री ऑफ पर्शिया” के लेखक साइक्स का मत है कि अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा, जो विकृत होकर “अरब” हो गया। भारत के उत्तर-पश्चिम में इलावर्त था, जहाँ दैत्य और दानव […]
शिक्षक अपने सामथ्र्य को पहचानें
किसी भी देश के लिए जितना शिक्षक महत्वपूर्ण होता है उतना और कोई नहीं। सभी प्रकार के दायित्वों में आरंभिक नींव है तो वह शिक्षक ही है। शिक्षक अपने आप में ऎसा विराट शब्द है जिसे आत्मसात करना मामूली नहीं है। फिर जो इसका अर्थ समझ लेते हैंउनके लिए दुनिया के सारे काम-काज गौण हो […]
निर्भय कुमार कर्ण शिक्षक और छात्र के बीच प्रथम दृष्टतया अनुशासनात्मक संबंध होता है। शिक्षण व्यवस्था में शिक्षक और छात्र दोनों की अहम भूमिका है। दोनों आपस में एक गति और लय से आगे बढ़े, तभी विकास संभव है।देखा जाए तो जब तक अनुशासन परस्पर कायमरहता है तब तक शिक्षक और छात्र के बीच का […]
आलोक मिश्ररायपुर। यहां कबीरधाम (कबर्धा) में आयोजित धर्मसंसद में सर्वसम्मत निर्णय लिया गया कि सांई को भगवान नही माना जा सकता और सांई की उपासना करने से भारतीय धर्म और संस्कृति को असीम संकट है। यहंा देश के कोने-कोने से उपस्थित हुए देश के संतों ने शास्त्रों के प्रमाण दे देकर सिद्घ किया कि एक […]
कश्मीर में ‘तीन सौ सत्तर’ बाधाएं
राकेश कुमार आर्य मोदी सरकार बड़ी सावधानी से फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है। मोदी ने अपनी सरकार की छवि ‘बातें कम-काम अधिक’ वाली बनाने का प्रयास किया है। उनकी सोच ‘चुपचाप काम में लगे रहो और परिणामों पर जनता की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करो’ वाली है। वह सही समय पर नपा-तुला बोलना पसंद […]
भारत तिब्बत सहयोग मंच ने २०१२ में तवांग तीर्थ यात्रा शुरु की थी । यह तीर्थ यात्रा प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास में असम के गुवाहाटी से प्रारम्भ होती है । गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है । गुवाहाटी ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि प्रागैतिहासिक नगर कहा जाता है । गुवाहाटी में […]
ओ३म् मनुष्य संसार में एक षिषु के रूप में माता की कोख से जन्म लेता है। संसार की सभी स्त्रियों में मातृत्व को धारण करने का गुण पाया जाता है जो स्वाभाविक, नैसर्गिक व प्राकृतिक है। इस नियम का संसार के किसी देष में व्यतिक्रम या उल्लंघन नहीं है अर्थात् यह नियम सर्वत्र एक समान […]
अकबर के बीरबल से सवाल
अकबर ने बीरबल के सामनेअचानक 3 प्रश्न उछाल दिये।प्रश्न थे- ‘ईश्वर कहाँ रहता है?वह कैसे मिलता हैऔर वह करता क्या है?” बीरबल इन प्रश्नों को सुनकरसकपका गये और बोले-”जहाँपनाह! इन प्रश्नों के उत्तरमैं कल आपको दूँगा।” जब बीरबल घर पहुँचे तो वहबहुत उदास थे। उनके पुत्र नेजब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया-”बेटा! आज अकबर बादशाह […]