सत्य इंसान के लिए वह आचरणीय विषय है जिसे स्वीकार कर लिए जाने पर तमाम सिद्धान्त और आदर्श पीछे-पीछे चलने लगते हैं। यों कहा जाए कि जो व्यक्ति सत्य को ही अपने जीवन का ध्येय बना लेता है वह अपने आप धर्म मार्ग को प्राप्त कर लेता है और उसके लिए सत्य-धर्म एकमात्र वह माध्यम […]
Category: महत्वपूर्ण लेख
रूप-रंग लावण्य और सौन्दर्य न कहीं बाहर से आता है, न थोंपा जा सकता है। इसका सीधा रिश्ता होता है अपने ही भीतर से। हर इंसान के भीतर ही विद्यमान रहता है अपने रूप-रंग को निखारने और अप्रतिम सौन्दर्य का वह महाप्रपात, जो हमेशा अक्षुण्ण बना रहता है। यह इंसान पर निर्भर है कि वह […]
संसार में सभी स्थानों पर हर समय न तो पूर्ण अनुकूलताएं होती हैं न प्रतिकूलताएं। इनका न्यूनाधिक प्रवाह हमेशा बना रहता है। कभी किसी जगह एक प्रकार की अनुकूलताएं होती हैं तो वहाँ दूसरे प्रकार की प्रतिकूलताएं बनी रहती हैं। इसी प्रकार कहीं प्रतिकूलताएं होंगी, तो वहाँ किसी न किसी प्रकार की अनुकूलताओं का अस्तित्व […]
प्यादे से वजीर बनने की लडाई
पुण्य प्रसून वाजपेयी 3 जनवरी 1969 को पहली बार नागपुर में बालासाहेब ठाकरे की मुलाकात तत्कालीन सरसंघचालक गुरु गोलवरकर और सरकार्यवाहक देवरस से हुई थी । उस वक्त बालासाहेब ठाकरे बंबई से गये तो थे नागपुर विघापीठ में विघार्थी संघ के सम्मेलन में भाषण देने । लेकिन सीपीएम की धमकी की ठाकरे नागपुर से जिन्दा […]
कब सुधरेंगे ये गृहस्थ कबाड़ी
सारा हिन्दुस्तान इन दिनों भिड़ा हुआ है साफ-सफाई में। गांधी जयन्ती से शुरू हुआ दौर अब दीवाली को देखकर पूरे परवान पर है। हर साल दीवाली पर यही होता है। गांवों से लेकर महानगरों तक सारे के सारे इसी जतन में जुटे हुए हैं कि लक्ष्मी मैया को रिझाने लायक साफ-सफाई दिखा दें ताकि बरकत […]
पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे !https://youtu.be/733RlrQ42YUभारत मे कुल 3600 बड़े कत्लखाने है जिनके पास पशुओ को काटने का लाईसेंस है !! जो सरकार ने दे रखा है ! इसके इलावा 35000 से अधिक छोटे मोटे कत्लखाने है जो गैर कानूनी ढंग से चल रहे है ! कोई कुछ पूछने वाला नहीं […]
कुछ दिन पहले तक चीन के सैनिक लद्दाख में घुसपैठ कर रहे थे और अब कुछ दिनों से पाकिस्तान भारतीय सीमा पर भयंकर गोलीबारी कर रहा है , जिससे कई नागरिकों की मृत्यु हो गई है और अनेकों घायल हो गये हैं । गोलीबारी इतनी भयंकर और सतत है कि सीमा समीप को गाँवों के […]
डॉ. मधुसूदन (एक) प्रवेश और लाभ: इस पद्धति में, देवनागरी लिपि सीखना आवश्यक नहीं। सफलता भी तुरंत प्राप्त होती है। अनपढ भी हिन्दी बोलना सीख सकता है।यदि, बडी मात्रा में संसाधन लगाकर हिन्दी वार्तालाप तमिलनाडु में फैलाया जाए, तो,हिन्दी के लिए अनुकूल जनमानस बनाने में भी यह पद्धति सफल हो सकती है।तीर्थ स्थानों के मार्ग […]
डॉ. मधुसूदन (एक) संकीर्ण दृष्टि का दोष: हम चाहते हैं; कि, राष्ट्र की प्रत्येक समस्या के समाधान में, हमारी इकाई को, हमारे प्रदेश को, हमारी भाषा को, लाभ पहुंचे। और जब ऐसा होता हुआ, नहीं दिखता, तो हम समस्या को हल करने में योगदान देने के बदले, समस्या के जिस गोवर्धन पर्वत को उठाना होता […]
गोडसे ने गांधी को क्यों मारा-5
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