लेखक :- डॉ० मोहन चन्द तिवारी “या सृष्टिः स्रष्टुराद्या वहति विधिहुतं या हविर्या च होत्री, ये द्वे कालं विधत्तः श्रुतिविषयगुणा या स्थिता व्याप्य विश्धम्. यामाहुः सर्वबीजप्रकृतिरिति यया प्राणिनः प्राणवन्तः, प्रत्यक्षाभिः प्रसन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीशः ॥” -‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’,1.1 महाकवि कालिदास के विश्व प्रसिद्ध नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ में आए उपर्युक्त अष्टमूर्ति शिव की वंदना से ही मैं अपनी पर्यावरण के […]