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कृषि जगत

पशुओं से टूटता जा रहा है मनुष्य का संबंध

यह चिंताजनक है कि कृषि प्रधान देश भारत में पशुपालन के प्रति लोगों की अरुचि बढ़ती जा रही है। मवेशियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। आजादी के बाद से 1992 तक देश में मवेशियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। लेकिन उसके बाद इनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई […]

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किसानों द्वारा अपनी भूमि पर काटी जा रही कॉलोनियों को अवैध कहना कितना सार्थक ?

हमारे देश में यदि कोई किसान या किसान परिवार में जन्मा कोई व्यक्ति काश्तकारों से जमीन लेकर या अपनी स्वयं की भूमि पर आवासीय भूखंड काटता है या कोई कॉलोनी बनाता है तो उसे ‘अवैध कॉलोनी ‘ कहने में जहां मीडिया के कुछ लोग सक्रिय होते हैं , वहीं कुछ अधिकारी भी इन कॉलोनीज को […]

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चिन्तनीय विषय : कृषि क्षेत्र बदहाल क्यों है

दीपक गिरकर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की हालिया रिपोर्ट बताती है कि एक किसान परिवार खेती से औसतन 3078 रुपए ही कमा पाता है। जबकि सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं किबासठ फीसद किसान खेती छोडऩा चाहते हैं। ये दोनों आंकड़े किसानों और कृषिक्षेत्र की दुर्दशा की तरफ ही इशारा करते हैं। लेकिन कृषि ऋण की […]

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दम क्यों निकल रहा आलू का

आलू किसानों की बदहाली के बारे में सुनना जरा अजीब लगता है क्योंकि आमतौर पर हर सब्जी में आलू का समावेश है और चिप्स-पापड़ से लेकर तमाम व्यंजनों में पडऩे वाले आलू की मांग बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी करती हैं। जिस देश में आलू के चिप्स का पैकेट हर दूसरे व्यक्ति के हाथ में दिख जाता […]

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कृषि क्षेत्र बदहाल क्यों है

दीपक गिरकर  राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की हालिया रिपोर्ट बताती है कि एक किसान परिवार खेती से औसतन 3078 रुपए ही कमा पाता है। जबकि सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं किबासठ फीसद किसान खेती छोडऩा चाहते हैं। ये दोनों आंकड़े किसानों और कृषिक्षेत्र की दुर्दशा की तरफ ही इशारा करते हैं। लेकिन कृषि ऋण की […]

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सरकारी बेरुखी से बदहाल किसान

इस साल आलू की अच्छी फसल के बावजूद किसान बहुत परेशान हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक के किसान दस पैसे प्रति किलो आलू बेचने के लिए मजबूर हैं। हाल ही में पंजाब में किसानों ने जानवरों को ही आलू खिलाना शुरू कर दिया था। उधर उत्तर प्रदेश में सरकार ने इस बार आलू […]

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रसायनों से जहरीली होती जमीन

हाल ही में महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में कीटनाशक की चपेट में आकर अठारह किसानों और खेत में काम कर रहे मजदूरों की मौत हो गई है। बीते बीस दिनों के दौरान कोई पांच सौ किसान और श्रमिक अस्पताल में भर्ती हुए हैं। असल में, इस इलाके में कपास की खेती होती है। इस बार […]

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सूखे की मार के प्रति पूरी तरह उदासीन सरकार

धर्मेन्द्रपाल सिंह बीती तीस सितंबर की तारीख दो लिहाज से बहुत महत्त्वपूर्ण थी। पहला कारण है मौसम विभाग ने इस दिन मानसून के लौटने की अधिकृत घोषणा कर दी और मान लिया कि लगातार दूसरे साल देश सूखे की चपेट में है। दूसरा कारण है इसी दिन केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी गई खाद्य […]

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किसानों की खुदकुशी के सबब

विनोद कुमार बाजारवादी व्यवस्था अपने हिसाब से किसानों को फसल उगाने के लिए कहती है। उसके लिए तरह-तरह के प्रलोभन और कर्ज देती है, और किसान उनके झांसे में आ जाते हैं। फिर उनके हाथों में खेलने लगते हैं। उपज की कीमत भी बाजार तय करता है। फिर शुरू होती है सरकारी हस्तक्षेप की मांग। […]

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जैतून की कृषि को बढ़ावा को देने के लिए मिनी मिशन-3 के अन्तर्गत सहायता

नई दिल्‍ली, 7 अगस्‍त, 2014। सांसद श्री ओम बिरला द्वारा लोकसभा में पूछे गये जैतून की खेती से जुड़े अतारांकित सवाल का जवाब देते हुए केन्द्रीय कृषि एवं खाद प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कहा कि वर्ष 2014-15 के दौरान आरंभ किये गये राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन (एनएमओओपी) के […]

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