गीता का पांचवां अध्याय और विश्व समाज भारत ने ऐसे ही समदर्शी विद्वानों को उत्पन्न करने का कारखाना लगाया, और उससे अनेकों हीरे उत्पन्न कर संसार को दिये। भारत के जितने भर भी महापुरूष, ज्ञानी-ध्यानी तपस्वी, साधक, और सन्त हुए हैं वे सभी इसी श्रेणी के रहे हैं। इन लोगों ने गीता के समदर्शी भाव […]
Category: डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से
नेपाल की राजशाही भारत समर्थक थी। उसका यह स्वरूप चीन को पसंद नहीं था। जब राजशाही को वहां मौत की नींद सुलाया गया तो उस समय मानो नेपाल को भारत के विरूद्घ खड़ा करने की तैयारियां आरम्भ हो गयीं थी। चीन भारत में नक्सलवादी आन्दोलन को उभारने में भी सहायक रहा है। जिससे कि भारत […]
गीता का पांचवां अध्याय और विश्व समाज वह इनके बीच में रहता है, पर इनके बीच रहकर भी इनके दुष्प्रभाव से या पाप पंक से स्वयं को दूर रखने में सफल हो जाता है। श्रीकृष्णजी अर्जुन से कह रहे हैं कि जो कर्मयोगी नहीं है, वह कामना के वशीभूत होकर फल की आसक्ति के फेर […]
देश की पहली लोकसभा 13 मई 1952 को अस्तित्व में आयी थी। देश में स्वतन्त्रता के उपरान्त अपने संविधान के अनुसार तब पहली बार चुनाव सम्पन्न हुए थे। लोगों में चुनाव में मतदान के प्रति अतिउत्साह था। उन्हें लग रहा था कि मतदान के माध्यम से सही प्रतिनिधि चुनकर वह बहुत बड़ा कार्य करने के […]
गीता का पांचवां अध्याय और विश्व समाज कर्मयोग श्रेष्ठ या ज्ञानयोग श्रेष्ठ है जैसे आजकल विभिन्न सम्प्रदायों की तुलना करते समय एक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति सभी धर्मों अर्थात सम्प्रदायों को श्रेष्ठ बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है और वह उनमें से किसी के भी अनुयायी या मानने वाले को निराश नहीं करना चाहता, ऐसे में […]
हमारे देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गये हैं। पर दु:ख का विषय है कि देश की सबसे समृद्घ और सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा ‘हिन्दी’ स्वतंत्रता के सात दशकों में भी अपना सही स्थान और सही सम्मान प्राप्त करने में असफल रही है। देश में धर्म, संस्कृति और इतिहास की व्याख्या करने […]
गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज गीता में आगे गीताकार श्रीकृष्णजी के मुखारविन्द से कहलवाता है कि हे पार्थ! इस संसार में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आहार को सन्तुलित और नियमित करके अपने प्राणों से प्राणों में ही आहुति देेते हैं। (भारतवर्ष में ऐसे ऐसे योगी भी हो गये हैं जो प्राण […]
हिमालय और गुजरात के चुनावों में हमने नेताओं की कुछ हल्की बातें देखी हैं। जब ‘हल्के’ लोगों को बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है या वे हमारे द्वारा अपने नेता मान लिये जाते हैं तो उनसे ऐसी हल्की बातों की अपेक्षा की जा सकती है। हमारे नेताओं को कौन समझाये कि विकास कभी ‘पागल’ या ‘बदतमीज’ […]
कांग्रेस का सोनिया कालकांग्रेस से सोनिया काल विदा ले चुका है। अब वह अस्ताचल की ओर है। बेशक उन्होंने कांग्रेस की तथाकथित शानदार परम्परा का निर्वाह करते हुए अपना ‘सिंहासन’ अपने पुत्र राहुल को सौंप दिया है, पर वह अब बुझता हुआ दीप ही कही जाएंगी। क्योंकिअब वह कांग्रेस अध्यक्ष पद पर या भारत के […]
गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज अर्जुन! तुझे याद रखना चाहिए कि जो व्यक्ति सहज प्राप्त वस्तु से सन्तुष्ट है, सुख-दु:खादि द्वन्द्वों से दूर है उनसे परे हो गया है अर्थात उन्हें अपने पास फटकने तक नहीं देता और न स्वयं उधर कभी जाता हुआ देखा जाता है अर्थात चोरी करते हुए देर सवेर […]