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ओ३म् “अपनी जीवन यात्रा को इसके लक्ष्य पर पहुंचाने का प्रयत्न करना चाहिये”

============ संसार में मनुष्य वा इसकी आत्मा एक यात्री के समान हैं जो किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए अपने वर्तमान जन्म व जीवन में यहां तक पहुंची हैं। मनुष्यों की अनेक श्रेणियां होती हैं। कुछ ज्ञानी व बुद्धिमान होते हैं। वह अपने सब काम सोच विचार कर तथा विद्वानों की सम्मति सहित ऋषियों व […]

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हमारी सर्वमान्य चेतना क्या होनी चाहिए?

परमात्मा के ऊर्जा रूप की तुलना भिन्न-भिन्न वस्तुओं जीवों से किस प्रकार की जाती है? (1) हमारी सर्वमान्य चेतना क्या होनी चाहिए? रयिर्नचित्रा सूरा न संदृगायुर्न प्राणो नित्यो न सूनुः। तक्वा न भूर्णिर्वना सिषक्ति पया न धेनुः शुचिर्विभावा।। ऋग्वेद मन्त्र 1.66.1 (कुल मन्त्र 753) (रयिः) सम्पदा (न) जैसे कि (चित्रा) अद्भुत, इच्छा करने योग्य (परमात्मा) […]

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ओ३म् ‘संसार में ईश्वर एक ही है और वह सबसे महान् है’

=========== हमारा यह संसार मनुष्यों वा जीवात्माओं के सुख के लिये बनाया गया है। अन्य जो प्राणी योनियां हैं उनके जीव अपने पूर्व जन्मों के कर्मों का भोग करते हैं। उन्हें भी सुख तथा दुःख दोनों होते हैं। मनुष्य जाति व इतर प्राणियों को उत्पन्न करने वाली सत्ता को हम ईश्वर के नाम से जानते […]

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ओ३म् “मनुष्य जीवन का कल्याण वेदज्ञान के धारण व आचरण से ही संभव”

============ परमात्मा ने हमें मनुष्य जीवन दिया है। हमारा सौभाग्य है कि हम भारत में जन्में हैं जो सृष्टि के आरम्भ से वेद, ऋषियों व देवों की भूमि रही है। मानव सभ्यता का आरम्भ इस देवभूमि आर्यावर्त वा भारत से ही हुआ था। मनुष्य जीवन की उन्नति व कल्याण के लिए परमात्मा ने सृष्टि के […]

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जीवन में दिव्यताओं को कैसे प्राप्त करें?

उस व्यक्ति के कैसे लक्षण होते हैं जो परमात्मा की अनुभूति करना चाहता है और उसके लिए सक्षम है? जीवन में दिव्यताओं को कैसे प्राप्त करें? जामिः सिन्धूनां भ्रातेव स्तस्त्रामिभ्यान्न राजा वनान्यत्ति। यद्वातजूतो वना व्यस्थादग्निर्ह दाति रोमा पृृथिव्याः ।। ऋग्वेद मन्त्र 1.65.4 (कुल मन्त्र 751) (जामिः) भाई (सिन्धूनाम्) समुद्रों और नदियों का (भ्राता इव) भाई […]

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🌷ओ३म् का जाप सर्वश्रेष्ठ🌷

ओ३म् का जाप स्मरण शक्ति को तीव्र करता है,इसलिए वेदाध्ययन में मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का प्रयोग किया जाता है। मनुस्मृति में आया है कि ब्रह्मचारी को मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का उच्चारण करना चाहिए। क्योंकि आदि में ओ३म् शब्द का उच्चारण न करने से अध्ययन धीरे […]

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ओ३म् “क्या हमारा अगला जन्म मनुष्य योनि में होगा?”

=========== संसार में हम चेतन जीवात्माओं के अनेक योनियों में जन्मों को देखते हैं। मनुष्य जन्म में उत्पन्न दो जीवात्माओं की भी सुख व दुःख की अवस्थायें समान नहीं होती। मनुष्य योनि तथा पशु-पक्षी की सहस्रों जाति प्रजातियों में जीवात्मायें एक समान हैं जिनके सुख दुःख अलग-अलग हैं। इसका कोई तो कारण होगा? वैदिक धर्म […]

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अच्छी संगति अर्थात् सत्संग का क्या महत्त्व है?

हमारी सम्पदा किन लक्षणों को धारण करे? अच्छी संगति अर्थात् सत्संग का क्या महत्त्व है? नूष्ठिरं मरुतो वीरवन्तमृृतीषाहं रयिमस्मासु धत्त। सहस्त्रिणं शतिनं शूशुवांसं प्रातर्मक्षू धियावसुर्जगम्यात््।। ऋग्वेद मन्त्र 1.64.15 (कुल मन्त्र 747) (नू) अब (स्थिरम्) स्थिर (मरुतः) प्राण, श्वास, श्वास का नियंत्रक (वीरवन्तम्) शक्तिशाली वीर (ऋतीषाहम्) विजय का दाता (रयिम्) सम्पदा (अस्मासु) हम में (धत्त) धारण […]

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यहाँ से असुरों को दूर कर दो,

“यह असुर अपने स्वार्थपूर्ण अभिप्रायों को इस प्रकार उच्च सिद्धान्तों में लपेटकर लोगों के सामने पेश करते हैं कि लोग इन्हें ‘देव’ समझने लगते हैं।” ये रूपाणि प्रतिमुञ्चमानाऽ असुराः सन्तः स्वधया चरन्ति। परापुरो निपुरो ये भरन्त्यग्निष्टाँल्लोकात् प्रणुदात्यस्मात्।। -यजुः० २।३० ऋषिः – वामदेवः। देवता – अग्निः। छन्दः – भुरिक पङ्क्तिः। विनय – हे जगदीश्वर ! यहाँ […]

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आप किस प्रकार के सुपुत्रों और सुपौत्रों की आशा करते हो? श्रेष्ठ पुत्र और सुपौत्र किस प्रकार प्राप्त करें?

आप किस प्रकार के सुपुत्रों और सुपौत्रों की आशा करते हो? श्रेष्ठ पुत्र और सुपौत्र किस प्रकार प्राप्त करें? चर्कृृत्यं मरुतः पृृत्सु दुष्टरं द्युमन्तं शुष्मं मघवत्सु धत्तन। धनस्पृृतमुक्थ्यं विश्वचर्षणिं तोकं पुष्येम तनयं शतं हिमाः ।। ऋग्वेद मन्त्र 1.64.14 (कुल मन्त्र 746) (चर्कृृत्यम्) वीरता और साहस धारण करते हुए कार्यों को बनाये रखता है (मरुतः) प्राणों […]

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