148 खोजो अपने रूप को, जपो नाम दिन रैन। पा लोगे निज रूप को, पड़ेगा मन को चैन।। पड़ेगा मन को चैन, वर्षा अमृत की होगी। करता उल्टे काम जगत में, बनकर भोगी।। अविद्या, अस्मिता, राग के, मत लेना सपने। छोड़ द्वेष-निवेश को, मूल को खोजो अपने।। 149 बीज में बरगद छुपा, यही दर्शन का […]
कुंडलियां … 50 बीज में बरगद छुपा…..