गतांक से आगे… इसके आगे लिखा है कि – तस्मादप्यद्येहाददान मश्रद्दधानमयज मानमाहुरासुरो बतेत्यसुराणां ह्मेषोपनिषत्प्रेतस्य शरीरं भिक्षया वसनेनालंकारेणेति संस्कुर्वन्त्येतेन ह्ममुं पलोंक जेष्यन्तो मन्यन्त इति॥ ( छान्दोग्य 8/8/5) अर्थात यही कारण है कि आज कल भी असुर लोग न दान में श्रद्धा रखते हैं और न यज्ञ करते हैं। लोग उनके इस ज्ञान को आसुर उपनिषद कहते […]