पुस्तक समीक्षा : ‘स्वयं सिद्धा’ कोई भी कवि या साहित्यकार अपने आसपास घट रही घटनाओं के प्रति कभी भी निरपेक्ष या उदासीन नहीं रह सकता। सचमुच में वह कवि या लेखक हो ही नहीं सकता जो अपने चारों ओर घट रही घटनाओं के प्रति निरपेक्ष हो जाए। शांत हो जाए। मौन हो जाए। उदासीन […]
पुस्तक समीक्षा : स्वयं सिद्धा