भारत की 64 कलाएं प्रमुख मानी गयी हैं। इनके नाम हैं नृत्य कला, वाद्यों का निर्माण करने की कला, स्त्री पुरूष के परिधान एवं अलंकार पहनाने की कला, अनेक प्रकार के रूप धारण (बहुरूपिया होना) करने की कला, शय्या अर्थात बिस्तर (उपस्तरण से बना है बिस्तर) बिछाना और पुष्पों को सही ढंग से गूंथने की […]
Month: September 2017
भारत की स्थापत्य कला में देखने वाली बात ये होती है कि हजारों वर्ष पूर्व निर्मित किये गये भव्य-भवन, राजप्रासाद, दुर्गादि के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है और ना ही सीमेंट प्रयोग हुआ है। परंतु उसके उपरांत भी ये भव्य-भवन, राजप्रासाद, दुर्गादि बहुत से भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं को झेलकर भी […]
फल फूल से लदी हों औषध अमोघ सारी देशवासियों को पर्जन्य समय पर बरसकर अन्नादि की पूर्ति करते हैं, साथ ही समय पर वर्षा होने से अनेकों प्रकार के पेड़ पौधों को भी नवजीवन मिलता है। मानव समाज को कितने ही पेड़ों से फल मिलते हैं तो कितनों से ही औषधियां मिलती हैं। कितनी ही […]
रीता सिंह देश की सर्वोच्च अदालत ने आश्रमों में कम उम्र की विधवाओं के रहने पर चिंता जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि विधवा विवाह को कल्याणकारी योजनाओं का हिस्सा क्यों नहीं होना चाहिए? न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने चिंता जताई कि विधवाओं के पुनर्वास की […]
क्षत्रिय महारथी हों अरिदल विनाशकारी ब्राह्मण लोग राष्ट्र में अज्ञानांधकार से लड़ते हैं, तो क्षत्रिय लोग अत्याचार रूपी राक्षस का नाश करते हैं। ब्राह्मण राष्ट्र के ब्रह्मबल का प्रतीक हैं तो क्षत्रिय वर्ग समाज के क्षात्रबल का प्रतीक है। ब्रह्मबल की रक्षा भी क्षत्रबल से ही की जानी संभव है। यदि कोई राष्ट्र ब्रह्मबल से […]