संजय द्विवेदी काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकांत झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे जैसे बहुत कम आयु और अनुभव में […]
Month: August 2015
अनंत, व्योम, आकाश गंगा, इनका है आधार क्या?अपने पथ में सब ग्रह घूमते, टकराते नही चमत्कार क्या? यदि भू से भिन्न सभ्यता है, उनका है व्यवहार क्या?सूक्ष्म में स्थूल समाया, जिज्ञासा है आकार क्या? कार्य और कारण से पहले, था ऐसा संसार क्या?मोक्ष अवस्था में था जीव, तब करता था व्यापार क्या? तू ईश एक […]
जब वहां की संसद के ‘हाउस ऑफ लार्ड्स’ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.एच. एसक्विथ द्वारा प्रस्तुत किये गये बजट पर अपनी ओर से ‘अड़ंगा’ डाल दिया था। तब प्रधानमंत्री ने पहले तो त्यागपत्र दिया और फिर जनता के न्यायालय में जाकर इस बात पर जनता का फैसला अपने पक्ष में कराने में सफलता प्राप्त की कि […]
मनमोहन आर्य देहरादून स्थित श्रीमद्दयानन्द ज्योतिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौंधा के सोलहवें वार्षिकोत्सव के अवसर अन्य अनेक आयोजनों सहित एक ‘‘संस्कार सम्मेलन का भी आयोजन किया जिसके अनेक विद्वान वक्ताओं में प्रथम वक्ता थे आर्य जगत के वेदों के प्रसिद्ध विद्वान डा. सोमदेव शास्त्री, मुम्बई। अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार किसी पदार्थ […]
ललित गर्ग मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध एवं बच्चों के चेहते डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। एक सच्चा देशभक्त हमसे जुदा हो गया। देह से विदेह होने के क्षणों को भी इस महापुरुष ने कर्ममय रहते हुए बिताया। वे जन-जन के प्रेरणास्रोत थे, विजनरी थे। उन्होंने राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के […]
विपक्ष का असंसदीय आचरण
अरविंद जयतिलक पिछले एक सप्ताह से जिस तरह विपक्ष गैर लोकतांत्रिक तरीके का प्रदर्शन कर संसद न चलने देने की जिद पर अड़ा हुआ है यह उसके असंसदीय आचरण का ही बोध कराता है। समझना कठिन है कि जब सरकार संसद में हर मसले पर चर्चा को तैयार है तो विपक्ष देशहित में संजीदगी न […]
पूर्व राष्ट्रपति कलाम चले गये, ‘मुंबई बम कांड’ के दोषी याकूब मेमन को भी फांसी हो गयी। बहुत सा पानी यमुना के पुल के नीचे से बह गया। पर हमारी संसद में राजनीतिक दलों की राजनीति हठ किये हुए वहीं खड़ी है, जहां सत्रारम्भ में 21 जुलाई को खड़ी थी। सचमुच ऐसी स्थिति पूरे देश […]
लगता है सरिता ढूंढ़ती है, सागर भी उन्हें पुकारता है।ये समीर में सरगम सांसों की, जिन्हें क्रूर काल डकारता है। वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं, जलवाष्प से शबनम बनती है।किंतु है संदेह मुझे, प्रकृति कहीं सिर धुनती है। लूट लिया श्रंगार काल ने, जिस पर उसको रोष।मैं कहता हूं प्रकृति के आंसू, तुम कहते हो ओस। […]