प्रमोद भार्गव ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने और बदले में तेहरान को प्रतिबंधों से छूट देने के लक्ष्य से दुनिया के छह शक्तिशाली देशों और ईरान के बीच आखिरकार समझौता हो ही गया। ईरान पिछले 13 साल से परमाणु बम बनाने की जिद पर अड़ा था। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति अहमदी ने तो […]
Month: July 2015
मानव के मानव पर अत्याचार करने की प्रवृत्ति ने विश्व के देशों को देशों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया,सम्प्रदाय को सम्प्रदायों पर अत्याचार करने के लिए प्रेरित किया। विश्व में उपनिवेशवादी व्यवस्था का जन्म मनुष्य की इसी भावना से हुआ। अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहने और दूसरों के अधिकारों के प्रति असावधान […]
मायावाद का उत्कर्ष
आध्यात्म रहित होने के कारण, झुलसा निज आमर्ष में। थे सात प्रकार के यान यहां, जो बारूद तेल से चलते थे। चुंबक शक्ति, हीरे, पारे, रवि किरणों से भी चलते थे। हम अंतरिक्ष में उड़ते थे, पहुंचे थे लोक लोकांतर में। था भूतल का नही कोना शेष, जहां पहुंचे न अल्पांतर में। परमाणु बम की […]
जीवन को सदा गति देती है-सुमति
ललित गर्ग जिस तरह कण-कण में भगवान हैं, ठीक उसी तरह कण-कण में जीवन भी समाया है। संगीत की स्वर-लहरियों, पंछियों की चहचहाहट, सागर की लहरों, पत्तों की सरसराहट, मंदिर की घंटियों, मस्जिद की अजान, कोयल की कूक, मयूर के नयनाभिराम नृत्य, लहलहाते खेत, कृषक के मुस्कराते चेहरे, सावन की रिमझिम फुहार, इंद्रनुषी रंगों, बादलों […]
प्रमोद भार्गव वैदिक कालीन नदी सरस्वती के अस्तित्व और उसकी भूगर्भ में अंगड़ाई ले रही जलारा को लेकर भूगर्भशास्त्री, पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों में लंबे समय से मतभेद बना है। यह मतभेद सैटेलाइट मैंपिग के बावजूद कायम रहा। यहां तक कि 6 दिसंबर 2004 को भारत सरकार के मानव संसान विकास मंत्री ने संसद में भी […]
डा0 कुलदीप चन्द अग्निहोत्री प्रो0 अमत्र्य सेन नालन्दा विश्वविद्यालय के कुलापिति पद की अपनी सेवा अव िपूरी हो जाने पर मुक्त हो गये । इसको लेकर सेन अभी भी विवाद चला रहे हैं । अभिनय जगत के गजेन्द्र चौहान को पुणे की एक सरकारी संस्था फि़ल्म व टैलीविजन संस्थान का चेयरमैन नियुक्त किया गया है […]
सदियों पुरानी कमजोरी
हिंसक जीवों से डरता था, जब रहता था कभी मांद में।अब डरता क्यों निज साये से, जब पहुंच चुका तू चांद में। इन सब का है मूल एक, निज तेरा ही व्यवहार।जीत सका नही अब तक भी, निज मन के छहों विकार। भौतिकता में उन्नत मानव, हो गया तू संपन्न।आध्यात्म रूप से हुआ कहीं, पहले […]
गुरूदेव का व्यक्तित्व गुरूदेव रविन्द्र नाथ टैगोर का व्यक्तित्व पूरी कांग्रेस से ऊपर था। क्योंकि कांग्रेस ने अपनी ‘राजभक्ति’ का व्यामोह 1929-30 में जाकर त्यागा, जब उसने भारत की पूर्ण स्वाधीनता प्राप्ति का संकल्प व्यक्त किया। इतनी देर से (1885 से 1930 तक) कांग्रेस ने आंखें खोलना उचित नही समझा। उसने 1920-21 का असहयोग आंदोलन […]
नोट: यह लेख हमसे किसी कारणवश प्रकसित नहीं हो पाया था और कुछ अन्य लेख जो इस श्रंखला में रह गए हैं, हम उन्हे प्रकसित करते रहेंगे। भारत का कण-कण वंदनीय है भारत से शांति प्राप्त करने के लिए प्राचीन काल से लोग यहां आते रहे हैं। यहां के कण-कण में शंकर की प्रतिध्वनि को […]
भाषा को लेकर भी होती रही है एक राजनीति
संजय द्विवेदी अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या हैं? वे कौन से लोग और तत्व हैं जो हिंदी की विकास बाधा हैं? सही मायनों में हिंदी के मान-अपमान का संकट राजनीतिक ज्यादा […]