अतुल मोहन सिंहसमाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और 3 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव सूबे के ही आईपीएस अधिकारी को धमकी देने के मामले में विवादों में घिर गए हैं। सवाल ये है कि मुलायम जैसे क़द्दावर नेता ने ख़ुद फोन करके एक आईपीएस अधिकारी को धमकी क्यों दी। सूत्रों […]
Month: July 2015
क्यों हो गया रक्त पिपासु? आणविक रासायनिक अस्त्रों से,क्या तेरे बुझेगी प्यास? मायावाद की मरूभूमि में, तुझे कहां मिलेगी घास? संभूति और असंभूति का,मिलन ही पूर्ण विकास। है मंजिल यही तेरे जीवन की, तुझे कब होगा अहसास? क्या कभी सोचकर देखा?निकट है काल की रेखा। जीवन बीत रहा पल-पल, जीवन बदल रहा पल-पलअरे मनुष्य! तेरे […]
राजनीति ने भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाया
आलोक कुमार सेवा नहीं, खुद के लिए मेवा का जुगाड़ ही आज की राजनीति है। मेवा खाने की तड़प ही राजनीति की ओर खींच लाती है। आज राजनीति का मूल-मंत्र क्या है मेवा नहीं तो सेवा नहीं पिछले अड़सठ सालों में हमारी किसी भी सरकार ,हमारे किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी ऐसा ठोस […]
84 लाख योनियों के बाद: शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार कुछ पशु-पक्षी ऐसे हैं, जो आत्मा की विकास यात्रा के अंतिम पड़ाव पर होते हैं। उनमें से गाय भी एक है। इसके बाद उस आत्मा को मनुष्य योनि में आना ही होता है। हम जितनी भी गाएं देखते हैं, ये 84 लाख योनियों के विकास […]
मनुष्य के भटकाव का अन्त कहाँ है? जन्म लेने से मृत्यु तक कितने चरणों में उसका बाहरी रूप बदलता है? हर वर्ष का पतझड़ उसके हृदय के रेगिस्तान को और भी ‘तपन’ दे जाता है। पर फि र बसन्त आता है और मन का मोर नाचने लगता है।—-लेकिन कितनी देर, कभी गरम लू तो कभी […]
एक्शन के मूड में दिख रही है अखिलेश सरकार
अतुल मोहन सिंह लखनऊ. सोशल साइट्स पर सरकार के खिलाफ मुहीम छेडऩे वाले आईएएस अधिकारियों पर अखिलेश सरकार की आंखें टेढ़ी हो गई है। इसके साथ ही बिना किसी अनुमति के केस की जांच के लिए निकलने वाले अधिकारियों पर भी सरकार एक्शन लेने के मूड में है। इसके लिए मुख्य सचिव बागी अधिकारियों से […]
विश्वनाथ सचदेव सोशल मीडिया पर आजकल प्रधानमंत्री के नाम लिखा एक पत्र काफी चर्चित है। पत्र-लेखक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है, आप कृपया सारी योजनाएं बंद कर दीजिए, सिर्फ संसद भवन जैसी कैंटीन हर दस किलोमीटर पर खुलवा दीजिए और नाम रख दीजिए ‘मोदी ढाबा’। सारे लफड़े खत्म। 29 रुपये में भरपेट खाना […]
छोटी कमजोरी है राष्ट्रों की अपने देशवासियों को अथवा नागरिकों को उनकी गरिमा की रक्षा की गारण्टी देना और उसमें उनका असफ ल होना। मानवाधिकारवादी तनिक विचार करें कि ऊपरी स्तर पर बैठा व्यक्ति जब अधीनस्थों की सम्प्रभुता का सम्मान नही कर सकता, वहाँ एक दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण हो रहा है तो नीचे […]
अशोक प्रवृद्ध भारतीय जीवन एवं साधना में अप्रतिम महत्व रखने वाली सरस्वती भारतीय सभ्यता के उषाकाल से लेकर अद्यपर्यन्त अपने आप में ही नहीं,प्रत्युत अपनी अर्थ,परिधि एवं सम्बन्धों के विस्तार के कारण भी अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है। सरस्वती शब्द की व्युत्पति गत्यर्थक सृ धातु से असुन प्रत्यय के योग से निष्पन्न होता है शब्द सरस,जिसका […]
सिद्धार्थ शंकर गौतम हमारे देश में संसद सत्रों का बे-वजह ह्रास बड़ा तकलीफ देय होता है। इतिहास गवाह है कि विपक्ष ने संसद सत्रों में सरकारों को नाकों चने चबवा दिए। किन्तु मोदी सरकार ने बीते बजट सत्र में शुरुआती गलतियों के बाद खुद को विपक्ष की इस नीति से बचाते हुए सत्र के काम-काज […]