सतपुड़ा, विंध्य, पामीर देख, पड़ रही बुढ़ापे की सलवट।त्राहि-त्राहि होने लगती, जब ज्वालामुखी लेता करवट। परिवर्तन और विवर्तन का क्रम, कितना शाश्वत कितना है अटल?…..जीवन बदल रहा पल-पल, सब गतिशील नश्वर यहां पर। जाती है जहां तक भी दृष्टि,अरे मानव! तू किस भ्रम में है? चलना है निकट प्रलय वृष्टि। पैसा पद जायदाद यहां, नही […]
Month: July 2015
महान कलाम को सलाम
संपूर्ण मानवता के लिए दुख और शोक की घड़ी है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम नही रहे। एक ऐसा महान व्यक्तित्व जिसे किसी प्रकार की संकीर्णताएं बांध नही सकीं, जिसे भाषा ने रोका नही और संप्रदाय ने टोका नही, जिसकी मानवता सदा ऊपर रही और जो आत्मिक प्रेरणा […]
माउंटेन मैन दशरथ मांझी सुलगते सवाल ?
तनवीर जाफऱी देश के हरियाणा राज्य में चौधरी बंसी लाल के शासन से जुड़ी एक घटना बेहद प्रचलित है। एक बार चौधरी बंसी लाल के मुख्यमंत्रित्व काल में पड़ोसी राज्य पंजाब से भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो गया। बताया जाता है कि पंजाब सरकार ने चेतावनी दी कि यदि पंजाब चाहे तो हरियाणा के शासकों […]
अमितशाह की भाजपा अपने प्रचण्ड बहुमत के नशे में चूर ‘फीलगुड’ की बीमारी से ग्रसित थी इसलिए यह भूल गयी कि सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना पार्टी का काम होता है। खरगोश की भांति अपनी गति पर भरोसा कर पार्टी आराम से सोती रही और विपक्ष का कछुआ भूमि विधेयक विरोधी प्रचार में […]
ढूंढ़ रहे पदचिन्ह मिले नही, यत्र तत्र सर्वत्र। मजार, मूर्ति बुत के रूप में, रह गयी शेष निशानी।नारे और संदेश गूंजते, चाहे घटना युगों पुरानी। अरे हिमालय तेरी गोदी में, तपे अनेकों संत।थे घोर तपस्वी मृत्युंजय, हुआ कैसे उनका अंत? बचपन में तू भी सागर था, है आज तेरा सर्वोच्च शिखर।अरे काल थपेड़ों के आगे, […]
भाजपा को ‘फीलगुड’ की पुरानी बीमारी है। बेचारी इसी बीमारी के कारण 2004 का लोकसभा चुनाव हार गयी थी। उसके पश्चात भी पार्टी में ‘फीलगुड’ के अलम्बरदारों ने सच कहने वालों की एक भी नही सुनी थी। फलस्वरूप पार्टी अपने पुराने ढर्रे पर ही चलती रही। नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह पार्टी के ऐसे नेता […]
आचार्य बालकृष्ण 1.यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है। 2.इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है। 3.पीपल की ताज़ी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है। 4.पीपल के ताज़े पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है। 5.हाथ -पाँव फटने […]
योग का इतिहास….
योग की उत्पत्ति संस्कृत शब्द युजष् से हुई है, जिसका अर्थ जोडऩा है। योग शब्द के दो अर्थ हैं और दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। पहला है. जोड़ और दूसरा है समाधि। जब तक हम स्वयं से नहीं जुड़ते तब तक समाधि तक पहुंचना असंभव होगा। योग का अर्थ परमात्मा से मिलन है। भारत के छह […]
1.) पहली आज्ञा अक्षैर्मा दिव्य ( ऋग्वेद 10/34/13 ) अर्थात जुआ मत खेलो । इस आज्ञा का उल्लंघन हुआ। इस आज्ञा का उल्लंघन धर्म राज कहे जाने वाले युधिष्ठर ने किया । परिणाम-एक स्त्री द्रौपदी का भरी सभा में अपमान । महाभारत जैसा भयंकर विश्व युद्ध जिसमे करोड़ो सेना मारी गयी । लाखो योद्धा मारे […]
पारदर्शिता से भागते राजनीतिक दल
पीयूष द्विवेदी यूँ तो देश के सभी राजनीतिक दल पारदर्शिता की बातें करने में एक से बढक़र एक हैं, लेकिन जब उनके खुद पारदर्शी होने की बात आती है तो वे तरह-तरह के कुतर्क गढक़र इससे बचने की कवायद करने लगते हैं। गौर करें तो आज से लगभग दो वर्ष पहले केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा […]