एस. निहाल सिंह मोदी सरकार का पहला चरण पूरा हो चुका है। इस एक साल में प्रधानमंत्री को गौरवान्वित करने वाली सफलता मिली है जब उन्होंने यूपीए-2 की मनमोहन सरकार में लगी घोटालों की झड़ी के विपरीत देश का रुख विकास की ओर मोड़ दिया है। हालांकि अब एक साल से कुछ ज्यादा का सफर […]
Month: July 2015
इरादा मजबूत कर बदलें बुरी आदतें
रेनू सैनी दिमाग हमारे पूरे शरीर को नियंत्रित करता है। यह स्नायु तंत्र के जरिए काम करता है। स्नायु तंत्र नर्व सेल्स से बना होता है। ये नर्व सेल्स करोड़ों सूचनाओं को एक साथ इधर से उधर पहुंचाती हैं। इन समाचारों को इधर-उधर पहुंचाने में जब एक ही प्रकार की सूचना बार-बार दोहराई जाती है, […]
जनप्रतिनिधियों की जरूरत का सवाल
कुलदीप नैयर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के इस सुझाव से भी सहमत हूं कि सांसदों की वेतनवृद्धि संबंधी निर्णय करने हेतु स्वतंत्र वेतन आयोग का गठन किया जाना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें अधिक पैसे चाहिए, लेकिन उनकी जरूरत को ठीक ढंग से जानने के […]
किसको कहते हैं पवित्र गाय
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गाय में देवी-देवता वास करते हैं इसलिए इसे पावन माना जाता है और समाज में इसकी पूजा की जाती है। तो सवाल ये है कि वह गाय कौन सी है जिसे पूजनीय माना जाता रहा है ? क्या दुनिया की सारी गायें उतनी ही पवित्र हैं या फिर सिर्फ़ […]
सोचो परमाणु युद्घ हुआ तो, पल भर में ही क्या होगा?है स्वर्ग से सुंदर चमन धरा पर, कश्मीर की वादी का क्या होगा? अन्न, औषधि, फल-फूल, वनस्पति, पृथ्वी के गहनों का क्या होगा?सरिता, सागर, पर्वत, पठार, इन मैदानों का क्या होगा? जल-थल में जो विचर रहे, निर्दोष प्राणियों का क्या होगा?बहुमंजिलें भवनों का, कारों यानों […]
बिहार के चुनाव की आहट
देवेन्द्र सिंह आर्य ज्यों-ज्यों बिहार के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, त्यों-त्यों नेताओं को अपनी औकात की जानकारी होती जा रही है। कभी नाज नखरों से मोदी की छाया से भी परहेज कर एनडीए छोड़ गये, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस समय अपनी नैया मझधार में फंसती दीख रही है। अब उन्होंने पराजित मानसिकता के […]
जीवन का पुनर्मूल्यांकन और जर्जर समाज
घनश्याम भारतीयभारत गांवो का देश है, क्योंकि देश की अधिकांश आबादी गांवो में बसती है। इसलिए गांवो और ग्रामीणो की दशा सुधारने के लिए सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रयास तो किये जा रहे है परन्तु वह परिणाम सामने नही आ पा रहा है जो आना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ कि हम […]
जहां मुंह में राम बगल में छुरी, आचरण में इतनी गलती हो। जहां धर्म और पूजा के नाम पर, लड़ते भाई-भाई हों।जहां ऊंच-नीच रंग जाति भेद, जैसी कुटिल बुराई हो। आस्तिकता को छोड़ जहां, नास्तिकता को अपनाते हों।सेवा, त्याग, प्रेम, अहिंसा को, जहां गहवर में दफनाते हों। मनुष्यता की छाती पर बैठी, पशुता जोर से […]
विनाश की ओर बढ़ती मानवता
अनिल कुमार पाण्डेय विश्व जनसंख्या दिवस कोई साधारण दिवस नहीं, बल्कि सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। विश्व में सुपर सोनिक गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के उद्देश्य से ही यह दिवस मनाया जाता है। ये बात अलग है कि इस तरह के उद्देश्यपूर्ण दिवसों की जानकारी […]
तब का और अब का भारत—एक अवलोकन
गंगानन्द झा तीस साल पहले जिस भारत को मैं गया था, वह आज के भारत से बिलकुल अलग मुल्क था। विदेशी के जेहन में उस वक्त यह अभी भी एक धुँधले, लेकिन व्यापक खतरे के खिलाफ आगाह करता था। सैलानी जरते थे कि उन्हें कोई छूत न लग जाए. भारत गन्दगी और मुसीबत की जगह […]