प्रदेश के युवा सी.एम. अखिलेश यादव को जब प्रदेश की जनता ने पांच साल के लिए प्रदेश की बागडोर सौंपी थी तो उस समय उनसे बहुत सी अपेक्षाएं की गयीं थीं। पर उनमें से वह अधिकांश अपेक्षाओं पर खरे नही उतर पाये, और अब 2017 के विधानसभा चुनाव प्रदेश में आहट देने लगे हैं, तो […]
Month: June 2015
सी.एम. अखिलेश की स्वीकारोक्ति
प्रदेश के युवा सी.एम. अखिलेश यादव को जब प्रदेश की जनता ने पांच साल के लिए प्रदेश की बागडोर सौंपी थी तो उस समय उनसे बहुत सी अपेक्षाएं की गयीं थीं। पर उनमें से वह अधिकांश अपेक्षाओं पर खरे नही उतर पाये, और अब 2017 के विधानसभा चुनाव प्रदेश में आहट देने लगे हैं, तो […]
अशोक प्रवृद्ध भारतीय मौसम परम्परानुसार वसन्त के आनन्द, उल्लास और ग्रीष्म की मस्ती भरी धूप के पश्चात जून के अन्तिम सप्ताह अथवा जुलाई के प्रथम सप्ताह तक भारतवर्ष के कृषि प्रधान क्षेत्र में हाल के वर्षों तक वर्षा होने लगती थी और खरीफ की बुआई प्रारम्भ हो जाती थी। इसके बाद नवम्बर एवं दिसम्बर की […]
कलोल भारतीय सैनिक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ पर अटूट विश्वास करते हैं। वे कहते हैं और जानते भी हैं कि उन्हें कर्म का अधिकार है, फल का नहीं। वे हमेशा चट्टान की तरह दृढ़ रहते हैं। मगर फिर भी अगर सैनिक को वह न दिया जाए, जिसका कि वह हकदार है, तो मायूसी पैदा होती […]
ऐसे मनहूस मैग्नाकार्टा का गुणगान किसलिए
बनवारी इस जून के मध्य में भारत के अंगरेजी अखबारों में ऐसे अनेक लेख छपे, जिनमें मैग्नाकार्टा का गुणगान किया गया था। मैग्नाकार्टा उस राजकीय घोषणापत्र को कहते हैं, जिसे 15 जून, 1215 को इंग्लैंड के राजा जॉन ने जारी किया था। अंगरेजी जानने-समझने वाले कई अन्य देशों में भी इन दिनों मैग्नाकार्टा को लेकर […]
आपातकाल की आपदाओं की आपबीती व्यथा-कथा
हिमाचल में इससे भी ज्यादा क्रूर व्यवहार भारतीय मजदूर संघ के प्यारे लाल बेरी के साथ किया गया था। शांता कुमार, दौलतराम चौहान, कंवर दुर्गा चंद, किशोरी लाल सब सलाखों के पीछे पहुंच गए थे। उधर फिरोजपुर से जब पुलिस हमें पेशी के लिए जालंधर लेकर आती थी तो एक बुजुर्ग सिपाही हमें समझाता रहता […]
कांग्रेस मोदी का विकल्प पेश करे
कांग्रेस के पास एक ऐसे नेता हैं जो एक साथ दो परस्पर विरोधी गुणों से विभूषित हैं, अर्थात वे गुलाम भी हैं और आजाद भी हैं। जो व्यक्ति गुलाम है अर्थात दूसरे के शब्दों को बोलता है, जिसके पास अपना बोलने को कुछ नही है, वह आजाद कैसे हो सकता है? पर कांग्रेस के गुलाम […]
भारत में धर्म आधारित हिंसा और अमरीका
अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पुलिस एवं सुरक्षा बल के दुव्र्यवहार के अलावा वर्ष 2014 में भारत में धर्म आधारित सामाजिक हिंसा सबसे बड़ी मानवाधिकार समस्या रही। इसकी सालाना ‘कांग्रेसनली मैनडेटेड कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज फॉर 2014 रिपोर्ट’ के लंबे चौड़े इंडिया सेक्शन में मनमाने […]
तेरी कोमल काया के नही, चिन्ह दृष्टि कहीं आएंगे।पंचभूतों में पंचभूत, ये सारे ही मिल जाएंगे। पृथ्वी की उर्वरा शक्ति को, तेरे अवशेष बढ़ाएंगे।हरी-हरी फिर घास जमेगी, जिसे पशु चर जाएंगे। ध्यान कर उस हश्र का, जो अंतिम पल पर होवेगा।यदि सुरभि है तेरे अंदर, तभी जहां तुझे रोवेगा। बागबां है ये जहां, और कली […]
रवि शंकर जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत के लोग बाकी दुनिया खासकर धनी देशों के मुकाबले अधिक सजग और चिंतित हैं। इस मामले में भारतीय अपने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से अधिक जागरूक हैं। इस बात की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क संधि (यूएनएफसीसीसी) की पहल पर हुए एक विश्वव्यापी सर्वेक्षण में हुई […]