गतांक से आगे….. राजा अम्बरीष हम ऊपर लिख आए हैं कि अम्बरीष का वर्णन सहदेव के साथ आया है और वहां इसका अर्थ आमड़ा वृक्ष ही होता है। दूसरी जगह अमरकोष में अम्बरीष भड़भूंजे के भाड़ को भी कहते हैं। इससे अम्बरीष राजा सिद्घ नही होता। राजा त्रिशंकु यह राजा भी सूर्यवंश का है। इसके […]
Month: May 2014
मोदी जी का मौलिक नेतृत्व और अमेरिका
डॉ. मधुसूदनप्रवेश मुझे कुछ दिनों से निम्न प्रश्न पूछे जा रहे हैं। अपने विचार और मान्यता के आधार पर उनके, उत्तर संक्षेप में, पाठकों की जानकारी के लिए, प्रस्तुत करता हूं।(1) प्रश्न: मोदी जी के विषय में आप का क्या मत है?उत्तर: मोदीजी एक मौलिक नेतृत्व है। मौलिकता किसी लीक पर चलकर आगे नहीं बढती। […]
दोहावली
दोहावली:स्वास्थ संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी….1.दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय।होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय।।2. बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल।यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल।।3. अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय।चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय।।4. अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय।फोड़ा-फुंसी दूर हों, […]
आज का चिंतन-28/05/2014
यों ही भौंकते रहेंगे भौंकने और बहस करने वाले – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com दुनिया तीन तरह के लोगों से भरी पड़ी है। एक वे हैं जो चुपचाप अपने काम करते रहते हैं, दूसरे उदासीन बने रहते हैं जबकि तीसरी प्रकार के लोग और कुछ करें या न करें, ये लोग भौंकने और बहस करने में […]
आज का चिंतन-27/05/2014
तीसरा कोई न हो हमारे बीच में – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com सफलता और सिद्धि पाने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यही है कि साधक और साध्य के बीच और कोई तीसरा नहीं होना चाहिए। बात अपने जीवन के सोलह संस्कारों की हो या फिर चारों पुरुषार्थों की, इन सभी में सफलता का […]
जब विदेशियों ने भारत के इतिहास लेखन के लिए लेखनी उठाई तो उन्होंने भारतीय समाज की तत्कालीन कई दुर्बलताओं को दुर्बलता के रूप में स्थापित ना करके उन्हें भारतीय संस्कृति का अविभाज्य अंग मानकर स्थापित किया। जैसे भारत में मूर्तिपूजा ने भारत के लोगों को भाग्यवादी बनाने में सहयोग दिया, यद्यपि मूलरूप में भारत भाग्यवादी […]
रक्त-रंजित मुद्रा की चकाचौंध-9
मुजफ्फर हुसैन गतांक से आगे……. बकरा ईद आते ही अहिंसा प्रेमी और जागरूक पर्यावरणवादी इस प्रयास में जुट जाते हैं कि धर्म के नाम पर कम से कम कुरबानी हो। प्रबोधन के साथ साथ इस दिशा में क्या कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इस बात पर भी विचार किया जाता है। धर्मनिरपेक्ष देश के […]
आज का चिंतन-26/05/2014
बरबादी का मंजर दिखाता हैमूर्खों और चापलुसों का साथ – डॉ. दीपक आचार्य9413306077dr.deepakaacharya@gmail.com हर इंसान की जिंदगी में उतार-चढ़ावों का क्रम बना रहता है। कुछ लोग इतनेभाग्यशाली होते हैं कि पैदाईश से लेकर वापस ऊपर जाने तक पूरी मौज-मस्तीबनी रहती है। कुछ ऎसे होते हैं जिनके लिए अभावों की जिंदगी हमेशा बनीरहती है, ये लोग […]
भारत की बहुउद्देशीय नदी घाटी योजनाएं
बहुउद्देशीय योजनाएं वे हैं जिनसे अनेक उद्देश्यों की पूर्ति होती है, जैसे-1. बाढ़ों की रोकथाम ।2. सिंचाई के लिए जल की प्राप्ति।3. कल कारखानों के लिए विद्युत का उपलब्ध होना।4. पीने का पानी उपलब्ध होना।5. यातायात के साधनों में वृद्घि।6. मत्स्य उद्योग का विकास।7. मिट्टी के कटाव की रोकथाम।8. वनों में वृद्घि।9. पर्यटक आकर्षक केन्द्रों […]
…और नरेन्द्र मोदी ने बदल दिया निजाम
‘उगता भारत’ चिंतन इतिहास मे नया अध्याय पलटना बड़ा सरल है,परंतु नया इतिहास लिखना बड़ा कठिन है। वैसे इतिहास की भी ये प्रकृति और प्रवृति है कि वह कदमताल करते काल को धक्का देकर उसकी गति बढ़ाने के लिए समकालीन समाज को प्रेरित भी करता है और आंदोलित भी। ……. और यही हुआ है भारत […]