डा0 इन्द्रा देवीभारतीय विचारक ‘काम’ को मनुष्य की सहज और सर्वाधिक प्रबल प्रवृति मानते हैं। पुरूषार्थ में इसको मान्यता प्रदान की है। श्रृंगार के रसराजत्व की महत्ता भी यही है। समस्त संसारी भावों का समावेश एक मात्र ‘रति’ स्थायी भाव मेें है। मुक्त तृप्ति यदि अमर्यादित एवं पशु जीवन की परिचायक हैं, तो वहीं मर्यादित […]
Month: March 2014
अरविन्द विद्रोहीलोकसभा चुनाव का जंग लडऩे व जीतने के लिए राजनेताओं-राजनैतिक दलों ने चुनावी रण में अपने-अपने योद्धाओं को उतारना शुरू कर दिया है। 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर-प्रदेश में प्रत्येक दल अपनी पकड़ बनाने के लिए बैचैन है। उत्तर-प्रदेश में रैलियों में उमड़ रहे जन रेला ने राजनेताओं और चुनावी पंडितों को अज़ब झमेले […]
आज का चिंतन-06/03/2014
जवाबदेह रहें ईश्वर के प्रति मरणधर्माओं से क्या चाहना – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com जो नियोक्ता होता है उसे ही हमारे मूल्यांकन, पुरस्कार और दण्ड का अधिकार है, दूसरों को नहीं। ऎसे तो हर क्षेत्र में कई सारी कड़ियाँ जुड़ी होती हैं मगर उनका कोई अधिकार नहीं होता। हमारे जीवन का हर कर्म ईश्वर से बँधा हुआ […]
भारत बना 70 अरब पतियों का देश
उ.भा. : समसामयिक चिंतनदेश में 70 अरबपतियों के होने से भारत धनकुबेरों की संख्या के दृष्टिकोण से दुनिया का पांचवां देश बन गया है। समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार जर्मनी, स्विटजरलैंड, फ्रांस और जापान जैसे विकसित देशों को भी पीछे छोड़कर भारत आगे आ गया है। बताया जा रहा है कि 2013 में […]
गतांक से आगे………इस नील रंग का व्यापार मिश्र की जिस नदी के द्वारा होता था, उसको भी यहां रहने वाले नील ही कहते थे, जो नाइल के नाम से अब तक प्रसिद्घ है। जायसवाल महोदय कहते हैं कि भारतवासी नील नदी को जानते थे। हम कहते हैं कि यहां वाले नील नदी को जानते ही […]
मनमोहन शर्मागतांक से आगे………जहां तक अय्यर का संबंध है, उनका तो क्या, उनके पुरखों तक का देश के स्वाधीनता संग्राम से कभी कोई नाता नही रहा। जब क्रांतिकारी देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, तो मणिशंकर के पुरखे ब्रिटिश सरकार की चाकरी कर रहे थे। अय्यर कितने देशभक्त हैं, इसका पर्दाफाश विख्यात लेखक […]
आज का चिंतन-05/03/2014
साधना में सफलता पाने जरूरी है पुण्य संचय – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com खूब सारे लोग रोजाना घण्टों तक अपनी-अपनी पूजा पद्धतियों के अनुरूप भजन-पूजन और साधना करते रहते हैं। इनमें से अधिकांश लोग इस कामना से साधना और पूजा करते हैं कि उनके कामों में कोई बाधाएं सामने न आएं, जो समस्याएं हैं वे दूर […]
गाय, गांधीजी और कांग्रेस
राकेश कुमार आर्यगोडसे और गांधीजी दोनों में एक ‘उभयनिष्ठ’ गुण ये था कि वे दोनों गौभक्त थे। गांधीजी की गौभक्ति को कांग्रेस ने मार दिया, और गांधीजी की यह सैद्घांतिक हत्या भी उनके परम शिष्य नेहरू के शासन काल में ही कर दी गयी। गांधीजी की कांग्रेस में सन 1921 से कई बार गोरक्षा को […]
आज का चिंतन-04/03/2014
सामने करते हैं जो तारीफ वही करते हैं पीठ पीछे बुराई – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com संसार भर में सबसे ज्यादा कोई लोक व्यवहार प्रचलित है तो वह है तारीफ और बुराई।इन दोनों का परस्पर चोली-दामन का साथ रहा है। आमतौर पर जो लोग अच्छे काम करते हैं उनके कामों की प्रशंसा करने से उन्हें […]
गतांक से आगे….जो गऊ हमें दूध से लगातार गोबर तक का वरदान देती है उसके शरीर पर 1 पौंड मांस की वृद्घि के लिए 5214 गैलन पानी खर्च होता है। सुअर के मांस के लिए प्रति पौंड 815 और बकरा बकरी के लिए छह सौ गैलन पानी प्रति पौंड चाहिए। सबसे अधिक ऊंट के शरीर […]