परमात्मा हमारे जीवन का मूलाधार किस प्रकार है? धरती माता की तुलना परमात्मा से क्यों की जाती है? इमे त इन्द्र ते वयं पुरुष्टुत ये त्वारभ्य चरामसि प्रभूवसो। नहि त्वदन्यो गिर्वणो गिरः सघत्क्षोणीरिव प्रति नो हर्य तद्वचः।। ऋग्वेद मन्त्र 1.57.4 (इमे) ये (ते) आपके (इन्द्र) परमात्मा (ते) आपके वयम्) हम (पुरुष्टुत) पूर्ण करता है और […]