डॉ. पवन सिंह मलिक सावरकर कहा करते थे- “काल स्वयं मुझसे डरा है, मैं काल से नहीं। कालेपानी का कालकूट पीकर काल से कराल स्तंभों को झकझोर कर, मैं बार-बार लौट आया हूँ और फिर भी मैं जीवित हूँ, हारी मृत्यु है, मैं नहीं।”- ऐसे अदम्य साहस, महान क्रांतिकारी, दृढ़ राजनेता, ओजस्वी वक्ता व समर्पित […]