-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। हम मनुष्य कहलाते हैं। हम वस्तुतः सदाचार को धारण कर मनुष्य बन सकते हैं परन्तु सदाचारी व धर्मात्मा मनुष्य बनने के लिये सदाचरण रूपी पुरुषार्थ करना होता है। पुरुषार्थ सहित विद्यार्जन कर विद्या के अनुकूल आचरण करना होता है। क्या हम सब विद्यावान हैं? इसका उत्तर ‘न’ अक्षर में मिलता है। […]