136 प्राण, अपान और व्यान हैं, संग में समान, उदान। पांच प्राण बतलाए दिए, तू जान सके तो जान।। तू जान सके तो जान , नाग, कूर्म और कृकल । पांच ही उप प्राण हैं , साथ में देवदत्त धनंजय।। प्राण होवें जिसके वश में, हुआ उसका कल्याण। प्राण जाने से पहले, तू भी कर […]
कुंडलियां … 46 ऐश्वर्यवान धर्मात्मा …..