राजनीति के क्षेत्र में तो हमने मैदान पर उनका अधिकार स्वीकार किया ही जिनका अधिकार नहीं होना चाहिए था। हमने धर्म के क्षेत्र में भी उन पाखंडियों और अंधविश्वासियों को खुला मैदान सौंप दिया जिन्होंने सदियों से देश के समाज का पाखंडीकरण किया था। इन सब बातों को देखकर आज यह कहने में कष्ट होता […]