कभी आंसू बन जाते हैं तकदीर,कभी आंसू मिटा देते हैं तस्वीर।आंसुओं का भी अपना इतिहास है,कभी इनसे घबराती है शमशीर।बादल गरजता है बरसता है,पर पपीहा एक बूंद को तरसता है।हृदयाकाश में उठे गर नेकनीयती की बदरिया,तो आंसू ‘मोदी के मोती’ बनकर झरता है।। 20 मई को भाजपा के नवनिर्वाचित सांसदों की बैठक संसद में हो […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
भारत के राजनीतिक क्षितिज पर नया सवेरा हो रहा है। इतिहास ने अपना नया अध्याय लिखना आरंभ कर दिया है, लगता है देश में फिर से मधुमास आ गया है। आज समय है स्वतंत्रता, स्वराज्य और व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की प्रचलित परिभाषाओं की समीक्षा करने का और इन प्रचलित परिभाषाओं की ओट में इन […]
जब विदेशियों ने भारत के इतिहास लेखन के लिए लेखनी उठाई तो उन्होंने भारतीय समाज की तत्कालीन कई दुर्बलताओं को दुर्बलता के रूप में स्थापित ना करके उन्हें भारतीय संस्कृति का अविभाज्य अंग मानकर स्थापित किया। जैसे भारत में मूर्तिपूजा ने भारत के लोगों को भाग्यवादी बनाने में सहयोग दिया, यद्यपि मूलरूप में भारत भाग्यवादी […]
भारत में प्राचीन काल में राजा अपने राजतिलक के पश्चात जो शपथ लेता था उसे ऐतरेय ब्राह्मण (8/15) में यूं बताया गया है-”मैं जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त का सारा समय तुम्हें समर्पित करता हूं। यदि कभी भी मैं प्रजा के साथ कोई असत्य व्यवहार करूंगा या उसके साथ कोई छल कपट करूं तो मेरा […]
जिस प्रकार हमारे पतन के राजनैतिक कारणों में कुछ काल्पनिक कारण समाहित किये गये हैं और वास्तविक कारणों को वर्णित नही किया गया है, उसी प्रकार हमारे पतन के लिए कुछ काल्पनिक सैनिक कारण भी गिनाये जाते हैं। पर इन सैनिक कारणों को गिनाते समय भी हमारे अतीत का ध्यान नही रखा जाता है और […]
भारत प्राचीन काल से ही पन्थनिरपेक्ष देश रहा है। क्योंकि इसकी राज्य व्यवस्था का मूल आधार समग्र समाज की मंगल कामना रही है। राज्योत्पत्ति के लिए अथर्ववेद (19-41-1) में आया है :-भद्रमिच्छन्त ऋषय: स्वर्विदस्तपा दीक्षां उपनिषेदुरग्रे।ततो राष्ट्रं बलमोजश्च जातं तदस्मै देवा उपसंनमस्तु।।अर्थात समग्र समाज के कल्याण की कामना करते हुए क्रांति दर्शी (ऐसे राष्ट्र चिंतक […]
15 अगस्त 1947 को देश ने सदियों के स्वातंत्रय समर की अपनी लंबी साधना के पश्चात स्वतंत्रता प्राप्त की। अब देश के सामने फिर से खड़ा होने का पहाड़ सा भारी संकल्प था। भारत के कण-कण में और अणु-अणु में उस समय उत्साह था, रोमांच था, अपने नेतृत्व पर विश्वास था और ‘शिवसंकल्प’ धारण कर […]
भारत की जनसंख्या चीन के पश्चात विश्व में सर्वाधिक है। यह देश विभिन्न संप्रदायों, जातियों वर्गों और समुदायों में बंटा हुआ है। इसलिए बहुत सारी सामाजिक विसंगतियां भी हमारे यहां बनी हुई हैं। इन सामाजिक विसंगतियों की देश में इतनी भरमार है कि कभी कभी तो इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि ये देश चल […]
राकेश कुमार आर्य नई दिल्ली। भारत में लोकसभा चुनावों का ‘महाभारत’ अपने चरमोत्कर्ष पर है। धृतराष्ट्र बने डा. मनमोहन सिंह अपने राजभवन में आराम फरमा रहे हैं। उनके पास वक्त तो खूब है, पर उनकी अपनी ‘वक्त’ समाप्त हो चुकी है। फुरसत में बैठे मनमोहन चुनावी समर की सूचना लेने का प्रयास कर रहे हैं। […]
भारत के एक अधिकार विहीन लेकिन अपनी सादगी के भीतर छिपे अधिकार संपन्न प्रधानमंत्री के अवसान का समय आ गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जा रहे हैं, लेकिन शिकन उनके चेहरे पर न होकर सोनिया गांधी के चेहरे पर हैं। डा. मनमोहन सिंह को राजनीतिक अधिकार विहीन करके बैठाया गया और ‘सोनिया कीर्तन मंडली’ ने […]