मुसलमानों को सशक्त बनाने और ‘सबका साथ सबका विकास’ में मुसलमानों के साथ पक्षपात जैसी बातें होने के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान की समीक्षा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उन पर ‘मुस्लिम नेता की तरह बोलने’ का आरोप लगाया है। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने जो कुछ कहा है उस पर उन्हें उत्तर देने के […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्र सडक़ों पर है। उनका कहना है कि सरकार के द्वारा उन्हें सहायक अध्यापक बनाकर अब उन्हें हाईकोर्ट के द्वारा जिस प्रकार बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है वह गलत है और उनकी सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति पूर्ववत रहनी चाहिए। अपनी मांगों को लेकर अपने आंदोलन को उग्र करते […]
आज जब राजस्थान के राज्यपाल माननीय कल्याणसिंह जैसे लोग ‘जन-गण-मन’ के ‘अधिनायक’ शब्द पर आपत्ति करते हैं तो उसका अभिप्राय यह भी होता है कि हमारे द्वारा की गयी अब तक की ‘अधिनायक’ की चाटुकारिता ने इस देश के सम्मान को चोट पहुंचाई है और यह पूर्णत: हमारी गुलामी की मानसिकता का परिचायक है। इसलिए […]
जब देश के सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में आर्य समाज अपना बिगुल फूंककर भारत की बलिदानी परंपरा की धार को पैना कर रहा था, उसी समय भारत में एक और घटना भी आकार ले रही थी जो भविष्य की कई संभावनाओं को जन्म देने की सामथ्र्य रखती थी। ब्रिटिश काल में हिंदू समाज को अपने […]
स्वाध्याय बहुत ही मूल्यवान है। समाज में सामान्यत: स्वाध्याय का अर्थ अच्छी पुस्तकों को पढऩा माना जाता है। किन्तु स्वाध्याय केवल अच्छी पुस्तकों का अध्ययन मात्र ही नहीं है। स्व+अध्याय=अपने आप का अध्ययन=अपने आपको पढऩा, समझना। अपने विषय में ही यह जानना कि मैं क्या हूँ, कौन हँ, कहाँ से आया हूँ, कहाँ जा रहा […]
डा. विष्णुकांत शास्त्री भारतीय संस्कृति के विषय में लिखते हैं :-‘‘जीवन को सुसंस्कृत करते रहने के तीन साधन हमारे पूर्वजों ने बताये हैं। गुणाधान (गुणों को अर्जित करना) दोषापनयन (दोषों को दूर करना) और हीनांगपूत्र्ति (सतकर्म के लिए अन्य लोगों से सहायता साधन-आवश्यक अवयव प्राप्त करना)। ऋग्वेद की ही उक्ति है-‘‘आ नो भद्रा : क्रतवो […]
बिहार विधानसभा के चुनावों की घोषणा कर दी गयी है। ये चुनाव आगामी 12 अक्टूबर से 5 नवंबर तक संपन्न होंगे। जबकि 8 नवंबर को वोटों की गिनती की जाएगी और दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि अगले 5 वर्ष के लिए बिहार पर शासन किसको होगा? इस चुनावी महासमर की घोषणा होते ही […]
आज भारत की राजनीति जिस दौर में प्रविष्ट हो चुकी है, उसे देखकर दुख होता है। कभी-कभी तो राजनीतिज्ञों के व्यवहार और कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है कि देश में राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत विरोध में परिवर्तित कर देश के नेता देश में लोकतंत्र की ही हत्या करने जा रहे हैं। ऐसा नही है […]
बलराम, कृतवर्मा, सात्यकि जैसे लोग भी मूर्खता व धूर्तता का व्यवहार करने लगे। यह कलहपूर्ण व्यवहार बढ़ा और बढक़र झगड़े का रूप धारण कर गया। इस झगड़े में सारे यादव कट-कटकर परस्पर मर गये। श्रीकृष्ण और बलराम इस घटनाक्रम से दु:खी होकर वन में तपस्या करने चले। बलराम द्वारा ब्रह्मरंध्र से बाहर निकालकर प्राण त्याग […]
इस नियुक्ति का शिशुपाल ने उद्दण्डता पूर्वक विरोध् किया। उसके विरोध् को शांत करने का भीष्म पितामह और अन्य सभी महानुभावों ने प्रयास किया। कृष्ण शांतमना सारा दृश्य देखते और झेलते रहे। अंत में जब शिशुपाल उनका वध् करने भागा तो कृष्ण जी के द्वारा उसी का वध् कर दिया गया। उसके पश्चात् वह यज्ञ […]