राजनीति में शाम दाम दंड व भेद यह चार सुत्र महत्वपूर्ण होते हैं। जिसका जाने अनजाने में लौकतंत्र में विभिन्न तरिको से इस्तेमाल होता आ रहा है जो शायद राजनीति में जरुरी हो गया है। राज करने की नीति में चाहे अपनी सीमा अथवा क्षमता बढाने का अवसर हो चुनाव के समय प्रतिद्वंद्वी को मात […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
जब कुछ समय पहले श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने थके हुए कंधों से बोझ उतार कर राहुल गांधी के युवा कंधों पर कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी डाली थी तो कांग्रेस ने अपने भीतर बहुत ऊर्जा का प्रवाह होता हुआ अनुभव किया था । सोनिया जी इस समय रुग्ण अवस्था में हैं । यह माना […]
विश्व का सिरमौर भारत देश है
ध्वजवाहिका धर्म की और सभ्यता की सारथी , संस्कृति रक्षार्थ तूने जने हैं अनेकों महारथी । संसार तेरा है ऋणी नहीं मुक्त हो सकता कभी, हम धन्य होंगे तभी जब तेरी सर्वत्र होगी आरती ।। रजकण हमारी धर्म धरा के देते यही संदेश हैं , सारी धरा पर एकमात्र धर्मधुरीण भारत देश है । इसके […]
मित्रो ! आज खुदीराम बोस जी का बलिदान दिवस है । आज ही के दिन 1908 में 18 वर्ष की अवस्था में भारतवर्ष के इस क्रांतिकारी युवा ने अपना बलिदान दिया था । 3 दिसंबर 1989 को पश्चिम बंगाल में जन्मे इस क्रांतिकारी युवा ने 1905 में भंग भंग के लिए जिम्मेदार रहे किंग्सफोर्ड के […]
ग्रेटर नोएडा । ( विशेष संवाददाता ) यहां पर चल रहे चतुर्वेद पंचम पारायण यज्ञ के बारे में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष आर्य वीरेश भाटी ने ‘उगता भारत ‘ को बताया कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतमबुद्ध नगर और आर्य समाज ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में हमारी […]
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र प्रतिष्ठा में, श्रीमान नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री भारत सरकार , नई दिल्ली महोदय सादर प्रणाम । आपके यशस्वी और तेजस्वी नेतृत्व के कारण भारतवर्ष का नाम संसार में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाने लगा है , जिस पर हम सभी देशवासियों को बहुत ही गर्व […]
9 अगस्त 1925 की घटना है । जब हमारे क्रांतिकारियों ने रेल डकैती की योजना बनाकर उसको अंजाम तक पहुंचाया था । रामप्रसाद बिस्मिल , चंद्रशेखर आजाद , अशफाक उल्ला खान और उनके कई साथियों ने मिलकर इस क्रांतिकारी कार्य को संपन्न किया था । इस डकैती के पीछे उनका उद्देश्य केवल यह था कि […]
यह बहुत ही कष्ट का विषय है कि आज के बच्चे अपने माता-पिता के प्रति सेवाभावी नहीं हो पा रहे हैं । जब माता-पिता के प्रति सेवाभावी या कहना मानने वाले नहीं है तो वह समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं , सेवा भाव का तो प्रश्न ही समाप्त हो जाता है। […]
हिंदुत्व आरएसएस और कम्युनिस्ट
साम्यवाद की विचारधारा क्या भारतीय संस्कृति के अनुकूल है? या साम्यवाद का भारतीय संस्कृति, धर्म और इतिहास से भी कोई संबंध है? यदि इन जैसे प्रश्नों के उत्तर खोजे जाऐं तो ज्ञात होता है कि वास्तविक साम्यवाद भारतीय संस्कृति में ही है। संसार का कम्युनिस्ट समाज भारतीय साम्यवाद को समझ नहीं पाया है और ना […]
जब सुभाष के मार्गदर्शक बने वीर सावरकर जब क्रांतिवीर सावरकर ने 26 फरवरी 1966 को अपना नाशवान शरीर त्यागा तो उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा था-‘‘सावरकर जी की मृत्यु से विद्यमान भारत के एक महान व्यक्ति को हमने खो दिया।’’ बात स्पष्ट है कि इंदिराजी की दृष्टि में […]