चीन के विषय में हम पहले से ही यह मानते आ रहे हैं कि इस देश की कथनी करनी में बहुत भारी अंतर है । चीन एक ऐसा देश है जो सोया हुआ दानव है । मानवता नाम की कोई चीज इसकी राजनीति में नहीं मिलती । इसलिए यह किस स्थिति में कहां तक […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
चीन के विषय में हम पहले से ही यह मानते आ रहे हैं कि इस देश की कथनी करनी में बहुत भारी अंतर है । चीन एक ऐसा देश है जो सोया हुआ दानव है । मानवता नाम की कोई चीज इसकी राजनीति में नहीं मिलती । इसलिए यह किस स्थिति में कहां तक […]
चीन प्रारंभ से ही भारत को एशिया में दबाकर रखना चाहता रहा है । विश्व का नेतृत्व अपने हाथों में लेने के लिए वह हरसंभव यह प्रयास करता है कि भारत किसी भी रूप में उभरने न पाए । इसके लिए उसने पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध हर समय उकसाने में कभी कोई कमी नहीं […]
भारत में ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र इन चार वर्णों की व्यवस्था की गई है । चारों ही वर्ण अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हैं । प्राचीन काल में भारत वर्ष में गुण – कर्म – स्वभाव के अनुसार व्यक्ति को उसका वर्ण प्राप्त होता था । इनमें से पहले वर्ण ब्राह्मण को […]
ईश्वर के प्रति हमारे कर्तव्य हमारा इस संसार में आना कोई आकस्मिक घटना नहीं है । इसके पीछे हमारे जन्म जन्मांतरों के संस्कार और प्रारब्ध का पूरा एक खेल है। जिसके परिणाम स्वरूप ईश्वर ने हमें यह मानव जन्म दिया है । ईश्वर ने संसार के समग्र ऐश्वर्यों को केवल हम मनुष्यों को ही भोगने […]
बीबीसी ने अपने उक्त आलेख में यह भी लिखा है कि — “भारतीय इतिहास में मध्यकाल को देखने के अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं । एक दृष्टिकोण वामपंथी इतिहासकारों का है। इनका मानना है कि मध्यकाल कई लिहाज़ से काफ़ी अहम था। वामपंथी इतिहासकारों का मानना है कि मध्यकाल में तेज़ी से शहरीकरण हुआ, स्थापत्य कला […]
जावेद अख्तर सुनो ! सावरकर की वाणी जिस समय बीबीसी ने अपना उपरोक्त समीक्षात्मक परन्तु भ्रमात्मक लेख प्रकाशित किया था उसी समय इन विवादों के बीच फ़िल्मकार और गीतकार जावेद अख़्तर ने कई ट्वीट किए थे । उनके ट्वीट की जानकारी देते हुए बीबीसी ने ही लिखा था कि जावेद अख़्तर ने बीजेपी पर निशाना […]
।संपूर्ण क्रांति दिवस। महान समाजवादी आंदोलन के नायक जेपी ने 5 जून को संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था। जेपी, लोहिया, जार्ज, चंद्रशेखर जैसे महान समाजवादी विभूतियों ने संपूर्ण क्रांति के नारे के साथ संकल्प लिया था समाजवाद का।। समाजवादी विभूतियों ने वंशवाद, परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए कैंसर से ज्यादा खतरनाक बिमारी बताया था। […]
पर्यावरण प्रकृति का हिस्सा है|प्रकृति व पर्यावरण एक दूसरे के पूरक हैं |प्रकृति के बिना पर्यावरण की परिकल्पना नहीं की जा सकती|प्रकृति दो शब्दों से मिलकर बनी है – प्र और कृति|प्र अर्थात प्रकृष्टि (श्रेष्ठ/उत्तम) और कृति का अर्थ है रचना |ईश्वर की श्रेष्ठ रचना अर्थात सृष्टि|प्रकृति से सृष्टि का बोध होता है |प्रकृति अर्थात […]
चीन का इतिहास एक बहुत ही कमजोर देश का इतिहास रहा है बहुत कम ऐसे युद्ध रहे हैं जिन्हें चीन ने जीता हो । मंगोलिया जैसा एक छोटा सा देश इस विशाल देश को जब निरंतर कई शताब्दी तक पीटता रहा तो इसने अपनी महान दीवार का निर्माण किया । चीन की महान दीवार चीन […]
जब विश्व में गुटनिरपेक्ष आंदोलन अपने चरम पर था , तब कर्नल गद्दाफी ने उस आंदोलन के बारे में कहा था कि इस संगठन से यदि भारत को निकाल दिया जाए तो यह नपुंसकों की चौपाल मात्र है । सचमुच उस संगठन के बारे में कर्नल गद्दाफी का यह कहना सर्वथा उचित ही था । […]