सभी मनुष्यों का धर्म एक है या अनेक? वर्तमान में सभी समय में प्रचलित अनेक मत व धर्मों में लोग किसी एक को मानते हैं। प्रश्न का उत्तर देने के लिए हमें धर्म व मत को जानना होगा। यथार्थ धर्म को जान लेने के बाद स्वयं उत्तर मिल जायेगा। धर्म मनुष्य जीवन में श्रेष्ठ गुणों […]
Author: अमन आर्य
गायत्री मन्त्र व उसका प्रामाणिक ऋषिकृत अर्थ
गायत्री मन्त्र आध्यात्मिक एवं सामाजिक जीवन में एक श्रेष्ठ वेदमन्त्र के रूप में विश्व में जाना जाता है। इसमें दी गई शिक्षा के मनुष्यमात्र के लिए कल्याणकारी होने के प्रति कोई भी मतावलम्बी अपने आप को पृथक नहीं कर सकता जैसा कि अनेक मामलों में देखने में आता है। आज हम पाठकों के लिए इसी […]
वर्षा शर्मा इस बीमारी में हड्डियां भुरभरी हो जाती हैं। साथ ही हड्डियों के ऊतकों का घनत्व कम हो जाता है, इस कारण किसी भी झटके से उनके टूटने की आशंका बढ़ जाती है। उम्र का बढऩा और कैल्शियम की कमी ऑस्टियोपोरोसिस को आमंत्रित करने वाले मुख्य कारण हैं। कैल्शियम हमारी हड्डियों को मजबूती प्रदान […]
कहां-कहां है दीमक भारत में?
ओमप्रकाश त्रेहन दीमक प्राय: दिखाई नही देती। केवल चुपचाप पेड़ को खोखला करती है। पता तब चलता है जब पेड़ अचानक गिरता है। यही काम हमारे देश में साम्यवादी अर्थात कम्युनिस्ट करते हैं। इनकी हिंदुओं के प्रति घृणा विश्वविख्यात है। फिर भी देश के लोग अनजाने में भोलेभाव से इन्हें स्वीकार कर लेते हें। जिन्होंने […]
जीवात्मा और इसका पुर्नजन्म
हम इस विस्तृत संसार के एक सदस्य है। चेतन प्राणी है। हमारा एक शरीर है जिसमें पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां, मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार आदि अवयव हैं। शरीर से हम सुख व दुख का भोग करते हैं। हम चाहते हैं कि हमें कभी कोई दुख न हो परन्तु यदा-कदा जाने-अनजाने सुख व दु:ख आते […]
नीरज वाटर थिरेपी यह लेख आपके जीवन के लिए बेहद उपयोगी है अगर इसे आपने समझ लिया तो आप अपने बिमारियों के कारणों को आसानी से जान पाएंगे । सन 2007 में डाक्टर हिरेन पटेल को 24 घंटे हमेशा थोडा-थोडा बुखार रहता था, जो कि थर्मामीटर में नहीं आता था लेकिन इससे उनका वजन कम […]
ललित गर्ग पन्द्रह अगस्त हमारे राष्ट्र का गौरवशाली दिन है, इसी दिन स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। […]
प्रमोद भार्गव पाश्चात्य इतिहास लेखकों की स्वार्थपरक और कूटनीतिक विचारधारा से कदमताल मिलाकर चलने वाले कुछ भारतीय इतिहास लेखकों के चलते आज भी इतिहास की कुछ पुस्तकों और ज्यादातर पाठ्य-पुस्तकों में यह मान्यता चली आ रही है कि 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम अंग्रेजी मान्यता के खिलाफ बर्बरतापूर्ण संघर्ष था। यह संग्राम तत्कालीन ब्रितानी हुकूमत […]
‘खुदा के बन्दो को देखकर खुदा से मुनकिर हुई है दुनिया, कि जिसके ऐसे बन्दे हैं वो कोई अच्छा खुदा नहीं।।‘ आजकल संसार में सभी मतों के शिक्षित व धनिक मनुष्यों का आचरण प्रायः श्रेष्ठ मानवीय गुणों के विपरीत पाया जाता है जो मनुष्यों को नास्तिक बनाने में सहायक होता। इसका एक कारण ऐसे लोगों […]
आज से कुछ दिनों पहले , रविवार ९ अगस्त २०१५ को , गया की रैली में बिहार के पिछले २५ वर्षों के शासनकाल को , जंगलराज , कुशासन और बिहार की बदहाली का कारण बता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो भाजपा की प्रदेश इकाई को सांसत में ही डाल दिया है l प्रधानमंत्री के इस बयान […]