इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया गया। यही नहीं, मुद्दों पर बात करने के बजाय व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप पर फोकस किया गया। इसका कारण यह […]
Author: अमन आर्य
राजनीतिक भीख नहीं तपोवन सत्र
माननीय विधायक अगर वाकआउट करें, तो खर्च का हिसाब लगाना वाजिब है, लेकिन सदन में सत्र के दिन बढ़ें तो लोकतांत्रिक प्रासंगिकता बढ़ती है। अत: तपोवन में विधानसभा का ताप बढ़ाने के लिए सत्र की अवधि में विस्तार की गुंजाइश हमेशा रहेगी। विधानसभा का तपोवन में होना या शीतकालीन सत्र के दौरान होने की आशा […]
दम क्यों निकल रहा आलू का
आलू किसानों की बदहाली के बारे में सुनना जरा अजीब लगता है क्योंकि आमतौर पर हर सब्जी में आलू का समावेश है और चिप्स-पापड़ से लेकर तमाम व्यंजनों में पडऩे वाले आलू की मांग बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी करती हैं। जिस देश में आलू के चिप्स का पैकेट हर दूसरे व्यक्ति के हाथ में दिख जाता […]
शांता कुमार विश्व इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जहां किसी ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए घर-बार छोड़ दिया और फिर उसी मोक्ष को मातृभूमि की सेवा के लिए छोड़ दिया। ऐसे त्यागी और तपस्वी स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिन पर हम सब यह संकल्प करें कि अपने जीवन में उनके आदर्शों […]
अपने भक्तों, साधको का उद्धार करने वाले सूर्यदेव समस्त संसार मे एक मात्र दर्शनीय प्रकाशक है तथा विस्तृत अंतरिक्ष को सभी ओर से प्रकाशित करते हैं। सूर्यदेव मरुद्गणो, देवगणो, मनुष्यो और स्वर्गलोक वासियों के सामने नियमित रूप से उदित होते हैं, ताकि तीन लोको के निवासी सूर्य को दर्शन कर सकें। समस्त विश्व को दृष्टि […]
स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णत: पढ़ लीजिये. नोबेल से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी […]
कृषि क्षेत्र बदहाल क्यों है
दीपक गिरकर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की हालिया रिपोर्ट बताती है कि एक किसान परिवार खेती से औसतन 3078 रुपए ही कमा पाता है। जबकि सीएसडीएस के आंकड़े बताते हैं किबासठ फीसद किसान खेती छोडऩा चाहते हैं। ये दोनों आंकड़े किसानों और कृषिक्षेत्र की दुर्दशा की तरफ ही इशारा करते हैं। लेकिन कृषि ऋण की […]
तकनीकी शिक्षा बनाम रोजगार सृजन
वीरेंद्र पैन्यूली अब अधिकांश प्रथम स्तर के इंजीनियरिंग पासआउट छात्र-छात्राएं उच्च कोटी के प्रबंधन संस्थानों में स्पर्धा करके प्रबंधकीय सेवाओं में लगे होते हैं। तकनीकी छात्र ही सिविल सेवाओं में स्पर्धा करने में आगे आ रहे हैं। ये अव्वल छात्र शिक्षक भी कम ही बनना चाहते हैं। अत: उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी शिक्षकों की भी […]
ई-कचरे की अनदेखी के खतरे
सतीश सिंह बेकार मोबाइल, कंप्यूटर मदरबोर्ड, खराब हो चुके फ्रिज, वातानुकूलक आदि ई-कचरा की श्रेणी में आते हैं। आज की तारीख में ई-कचरा प्रबंधन केंद्रों में प्रबंधन के नाम पर ई-कचरे से कीमती धातुओं जैसे सोने, चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम के अंश को निकाले जाने का काम किया जा रहा है। कंप्यूटर के दूसरे हिस्सों […]
सोच है कि एक कर दर से विवाद कम होंगे, अर्थव्यवस्था सरल और गतिमान होगी। परंतु यह भूला जा रहा है कि यह गतिमानता रोजगार भक्षण की दिशा में होगी, न कि रोजगार सृजन की दिशा में। बजट की सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। टैक्स के सरलीकरण के नाम पर समाज […]