क्या महर्षि दयानंद की तत्कालीन वायसराय गवर्नर जनरल लार्ड नॉर्थब्रुक से भेंट हुई थी?

images (13)

———————–
– डॉ. भवानीलाल भारतीय

अम्बाला निवासी दीवान अलखधारी नामक एक सज्जन ने मेरठ कॉलेज मेरठ की पत्रिका में 1963 में एक लेख प्रकाशित कराया जिसका शीर्षक था – Dayanand : Political Genius. इसमें उन्होंने महर्षि दयानन्द के 1873 के कलकत्ता प्रवास के समय की एक घटना का उल्लेख किया जिसके अनुसार महर्षि ने भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड नार्थब्रुक से भेंट की थी। लेखक के अनुसार इस भेंट का आयोजन कलकत्ता के लार्ड बिशप ने किया था और दोनों व्यक्तियों का वार्तालाप किसी बिचौलिये (Interpretor) के माध्यम से हुआ। इस तथाकथित वार्तालाप में वायसराय को महर्षि से यह आग्रह करते हुए बताया गया है कि वे अपने भाषणों में अंग्रेजी राज्य के उपकारों का वर्णन किया करें, क्योंकि इसी राज्य में वे निर्भीक होकर अपने धर्म का प्रचार कर रहे हैं। दीवान अलखधारी के अनुसार इसके उत्तर में महर्षि ने कहा बताते हैं कि वे ऐसी प्रार्थना कदापि नहीं करेंगे। इसके विपरीत वे परमात्मा से अहर्निश प्रार्थना करते हैं कि उनके देश को विदेशियों की दासता से मुक्ति मिल जाए। इसी लेख में आगे लिखा गया कि महर्षि दयानन्द के उक्त कथन का ध्यान में रखकर वायसराय ने उन्हें बागी फक़ीर (Rebel Fakir) करार दिया तथा उनके सम्बन्ध में गुप्त रिपोर्ट लंदन के इण्डिया आफिस को भेजी। साथ ही गुप्तचर विभाग को निर्देश दिया गया कि वह इस व्यक्ति पर कड़ी निगरानी रक्खे।

आश्चर्य है कि महर्षि दयानन्द के किसी भी पुराने जीवनी लेखक ने इस प्रसंग का कभी उल्लेख नहीं किया। कलकत्ता जैसे विख्यात तथा राजधानी के नगर में यदि सचमुच महर्षि की भेंट वायसराय से हुई होती तो उसका उल्लेख तत्कालीन पत्र- पत्रिकाओं में अवश्य होता। हेमचन्द्र चक्रवर्ती की जिस डायरी को पं० दीनबन्धु वेदशास्त्री ने ढूँढ़ निकाला था, उसमें इस प्रकार का कोई उल्लेख नहीं मिलता। परन्तु मेरठ कॉलेज की पत्रिका में उपर्युक्त लेख के प्रकाशित होने के उपरान्त अनेक उत्साही लेखकों ने बिना अधिक छानबीन किये, इस प्रसंग को उद्धृत करना आरम्भ कर दिया। जब स्वयं अलखधारीजी से इस घटना के मूल स्त्रोत के सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि गवर्नमेण्ट ऑफ इण्डिया के अभिलेखागार से उन्हें यह सूचना 1921 में प्राप्त हुई थी। आश्चर्य यह है कि एक ओर तो वे यह लिखते हैं कि दयानन्द विषयक गुप्त खरीता लंदन के इण्डिया आफिस को भेजा गया, और दूसरी ओर वे इसकी अवस्थिति भारत सरकार के अभिलेखागार में बताते हैं। 1921 में किसी भारतवासी द्वारा सरकारी अभिलेखागार के गुप्त दस्तावेजों को देखना या प्राप्त करना असम्भव था। प्रो० जयदेव आर्य द्वारा लार्ड नार्थब्रुक के प्रसंग के विषय में जब अखलधारीजी से जिज्ञासा की गई, तो उन्होंने अपने 16 फरवरी 1967 के पत्र में लिखा कि वायसराय से हुई इस भेंट का संकेत पं० लेखराम रचित महर्षि दयानन्द के उर्दू जीवन-चरित में मिलता है । (प्रो० जयदेव आर्य के नाम लिखा गया यह पत्र 10 सितंबर 1972 के आर्य मर्यादा में प्रकाशित हुआ है।) तथ्य यह है कि पं० लेखराम कृत जीवन-चरित में ऐसे किसी प्रसंग का उल्लेख नहीं है। दयानन्द के शोधपूर्ण जीवनी लेखक प्रो० बी० के० सिंह तथा डॉ० जॉर्डन ने वायसराय द्वारा ऐसे किसी खरीते के भेजे जाने का खण्डन किया है।
इन पंक्तियों के लेखक ने अपने एक मित्र पं० ईश्वरनाथ शिवपुरी, जो शोधकार्य हेतु 1974 में लंदन गये थे, के द्वारा इण्डिया आफिस लाइब्रेरी में लार्ड नार्थब्रुक के इस तथाकथित डिस्पैच के सम्बन्ध में जब खोज करवाई, तो ज्ञात हुआ कि 1873 में वायसराय नार्थब्रुक ने ड्यूक ऑफ आरगल को जो आफिशियल डिस्पैच भेजे थे उनमें महर्षि दयानन्द विषयक कोई सूचना नहीं थी। श्री शिवपुरी ने इन सारे खरीतों के एक एक पन्ने को सावधानी से देखा था। इस नवीनतम जानकारी के आधार पर यह कहना सर्वथा युक्तिसंगत है कि न तो महर्षि दयानन्द की तत्कालीन वायसराय से कलकत्ता में कोई भेंट हुई थी, और न कोई ऐसी गुप्त रिपोर्ट लंदन के इण्डिया आफिस को उस समय भेजी गई थी। सम्भावना यह जान पड़ती है कि महर्षि की अजमेर में तत्कालीन एजेण्ट टू दि गर्वनर जनरल कर्नल ब्रुक से जो भेंट हुई थी, उसी का आधार लेकर 1873 में लार्ड नार्थब्रुक से उनकी भेंट की कल्पना कर ली गई। (वायसराय लॉर्ड नॉर्थब्रुक तथा कर्नल बुक के नाम में किंचित् साम्य होने के कारण इस संभावना को बल मिलता है।) ऐतिहासिक शोध का तकाजा है कि बिना पूर्ण अनुसंधान किये मात्र भावुकतावश किसी बात को स्वीकार न किया जाये। उपर्युक्त विवेचन के आधार पर दीवान अलखधारी द्वारा प्रवर्तित वायसराय से भेंट का यह प्रसंग ऐतिहासिक प्रमाणों के अभाव में अपुष्ट ही रह जाता है।

…कलकत्ता में वायसराय लार्ड नार्थब्रुक से भेंट का प्रसंग एक अन्य कारण से भी कल्पित प्रतीत होता है। जब 1875 ई० में महर्षि दयानन्द बम्बई गये हुए थे, उस समय प्रिंस ऑफ वेल्स (कालान्तर में सप्तम एडवर्ड के नाम से ब्रिटिश सम्राट) के भारत आगमन पर उनका स्वागत करने हेतु लार्ड नार्थबुक बम्बई आये थे। कलकत्ता से केशवचन्द्र सेन ने बम्बई निवासी श्री आत्माराम पाण्डुरंग को पत्र लिखा कि वे वायसराय और स्वामीजी की भेंट की व्यवस्था कराएँ। इस पर आर्यसमाज बम्बई के प्रथम प्रधान गिरधरलाल दयालदास कोठारी ने महर्षि से निवेदन किया कि यदि वे चाहें तो वायसराय से उनकी भेंट की व्यवस्था की जा सकती है। महर्षि दयानन्द की इस प्रस्ताव पर जो प्रतिक्रिया रही, वह कुछ इस प्रकार थी – “लार्ड नार्थब्रुक तो हमारे पास आयेंगे नहीं और हम भी संन्यासी हैं, हम भी उनसे मिलने नहीं जायेंगे। एक मध्यस्थ स्थान नियत करो जहाँ दोनों का मिलन हो सके।” स्पष्ट है कि जो संन्यासी आर्यसमाज की स्थापना होने के पश्चात् भी विदेशी सत्ता के प्रतिनिधि से मिलने के लिए तैयार नहीं था, वह भला 1873 में उनसे भेंट हेतु क्यों उत्सुक होता ? अन्ततः यह मुलाकात नहीं हो सकी। (द्रष्टव्य – महर्षि दयानन्द सरस्वती का जीवन-चरित, भाग 2, पृ. 370, पं० घासीराम कृत)

[स्रोत : नवजागरण के पुरोधा महर्षि दयानंद सरस्वती, भाग 1, पृष्ठ 378-380, 391-392, प्रस्तुतकर्ता : भावेश मेरजा]

Comment:

betpark
mavibet giriş
betpark giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
imajbet giriş
holiganbet güncel
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet
safirbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet giriş