images (28)

 

*1920 में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो पुस्तकें वितरित की जाने लगी! एक पुस्तक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी”, और दूसरी पुस्तक का नाम था “उन्नीसवीं सदी का लंपट महर्षि”! ये दोनों पुस्तकें “अनाम” थीं! इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था, और इन दोनों पुस्तकों में भगवान श्री कृष्ण, हिंदू धर्म, इत्यादि पर बेहद अश्लील, बेहद घिनौनी बातें लिखी गई थीं!*

*और इन पुस्तकों में तमाम देवी-देवताओं के बेहद अश्लील रेखाचित्र भी बनाए गए थे!*

*और धीरे-धीरे, ये दोनों पुस्तकों को भारत की हर एक मस्जिद में से वितरित की जाने लगीं!*

*यह बात जब गांधी तक पहुंची, तो गांधी ने इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की बात बता कर, गौण कर दिया, और कहा भारत में सब को अपनी बात रखने का हक है!*

*लेकिन इन दोनों पुस्तकों से, भारत का जनमानस बहुत उबल रहा था!*

*फिर 1923 में लाहौर स्थित “राजपाल प्रकाशक” के मालिक “महाशय राजपाल जी” ने एक पुस्तक प्रकाशित की, जिसका नाम था “रंगीला रसूल”!*

*उस पुस्तक के लेखक का नाम गुप्त रखा गया था, और लेखक की जगह लिखा था “दूध का दूध, और पानी का पानी”*

*हालांकि उस पुस्तक के असली लेखक पंडित चंपूपति थे, जो इस्लाम के जाने-माने विद्वान थे!*

*और सबसे अच्छी बात यह थी, कि उस पुस्तक में कहीं कोई झूठ नहीं था, बल्कि तमाम सबूतों के साथ, बकायदा आयत नंबर, हदीस नंबर, इत्यादि देकर, कई बातें लिखी गई थीं!*

*देढ वर्षों तक “रंगीला रसूल” बिकता रहा पूरे भारत में! कहीं, कोई बवाल नहीं हुआ! लेकिन एक दिन अचानक 24 मई 1924 को गांधी ने अपने समाचारपत्र “यंग इंडिया” में एक लंबा-चौड़ा लेख लिखकर, “रंगीला रसूल” पुस्तक की खूब निंदा की, और अंत में 03 पंक्तियां ऐसी लिखी:

*”मुसलमानों को स्वयं ऐसी पुस्तक लिखने वालों को सजा देनी चाहिए!*

*गांधी का ये लेख पढ़कर, पूरे भारत के मुसलमान भड़क गए! और “राजपाल प्रकाशक” के मालिक महाशय राजपाल जी के ऊपर 03 वर्षों में 05 बार हमले हुए, लेकिन गांधी ने एक बार भी हमले की निंदा नहीं की!*

*मजे की बात यह कि कुछ मुस्लिम विद्वानों ने उस पुस्तक “रंगीला रसूल” का मामला लाहौर उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में दायर किया!*

*हाईकोर्ट ने चार इस्लामिक विद्वानों को न्यायालय में खड़ा करके, उनसे पूछा कि इस पुस्तक की कौन सी पंक्ति सही नहीं है, आप वह बता दीजिए!*

*चारों इस्लामिक विद्वान इस बात पर सहमत थे, कि इस पुस्तक में कोई गलत बात नहीं लिखी गई है!*

*फिर लाहौर उच्च न्यायालय ने महाशय राजपाल जी पर मुकदमा खारिज कर दिया! और उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया…. !!*

*फिर उसके बाद, 03 अगस्त 1924 को गांधी ने “यंग इंडिया” समाचारपत्र में एक और भड़काने वाला लेख लिखा, और इस लेख में उन्होंने इशारों इशारों में ऐसा लिखा था कि “जब व्यक्ति को न्यायालयों से न्याय नहीं मिले, तब उसे अपनेआप प्रयास करके न्याय ले लेना चाहिए!”*

*उसके बाद महाशय राजपाल जी के ऊपर दो बार और हमले के प्रयास हुए, और अंत में 06 अप्रैल 1929 का हमला जानलेवा साबित हुआ, जिसमें मोहम्मद इल्म दीन नामक एक युवक ने, गदा से महाशय राजपाल जी के ऊपर कई वार किए, जिनसे उनकी जान चली गई!*

*जिस दिन उनकी हत्या हुई, उसके ४ दिन बाद गांधी लाहौर में थे, लेकिन गांधी महाशय राजपाल जी के घर पर शोक प्रकट करने नहीं गए, और ना ही अपने किसी संपादकीय में महाशय राजपाल जी की हत्या की निंदा की!*

*उसके बाद, अंग्रेजों ने मुकदमा चलाकर, मात्र 06 महीने में महाशय राजपाल जी के हत्यारे इल्म दीन को फांसी की सजा सुना दी।*

*और वो भी इसलिए कि इस देश में पूरा हिंदू समाज उबल उठा था, और अंग्रेजो को लगा कि यदि उन्होंने जल्दी फांसी नहीं दी, तब अंग्रेजी शासन को भी खतरा हो सकता है!*

*उसके बाद 04 जून 1929को गांधी ने अंग्रेज वायसराय को चिट्ठी लिखकर महाशय राजपाल जी के हत्यारे की फांसी की सजा को माफ करने का अनुरोध किया था!*

*और उसके अगले दिन, अपने समाचारपत्र “यंग इंडिया” में एक लेख लिखा था, जिसमें गांधी ने यह साबित करने का प्रयत्न किया थी कि यह हत्यारा तो निर्दोष है, नादान है, क्यों कि उसे अपने धर्म का अपमान सहन नहीं हुआ, और उसने गुस्से में आकर यहहत्या करने का निर्णय लिया!*

*दूसरी तरफ, तब के जाने-माने बैरिस्टर मोहम्मद अली जिन्नाह ने भी, लाहौर हाईकोर्ट में बकायदा एक बैरिस्टर की हैसियत से, इस मुकदमे में पैरवी करते हुए, यह कहा था, कि अपराधी मात्र 19 वर्ष का लड़का है, लेकिन इसने जघन्य अपराध किया है! इसके अपराध को कम नहीं समझा जा सकता! लेकिन इसकी आयु को देखते हुए, इसकी फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दी जाए, या फिर इसे काले पानी जेल में भेज दिया जाए!*

*लेकिन अंग्रेजों ने 31 अक्टूबर 1929 को महाशय राजपाल जी के हत्यारे मोहम्मद इल्म दीन को लाहौर जेल में फांसी पर चढ़ा दिया!*

02 नवंबर 1929 को गांधी ने “यंग इंडिया” में इल्म दीन को फांसी देने को इतिहास का काला दिन लिखा!*

साभार

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş