लव जिहाद तो खतरनाक है ही उससे भी खतरनाक है धर्मांतरण , लेना ही होगा कठोर निर्णय : संदीप कालिया

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नई दिल्ली। (अजय आर्य ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ओजस्वी नेतृत्व देश के लिए बहुत ही लाभकारी रहा है। विशेष रुप से हिंदू समाज के प्रति कांग्रेसी सरकारों की मानसिकता जिस प्रकार घातक हो चुकी थी, उसको रोकने में मोदी सरकार ने बहुत हद तक सफलता प्राप्त की है। मध्य प्रदेश सरकार ने गायों की सुरक्षा के लिए एक गौ कैबिनेट स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह कहना है अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया का । उन्होंने ‘उगता भारत’ के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि धर्मांतरण और लव जिहाद जैसी समस्याओं से जिस प्रकार मध्य प्रदेश व कर्नाटक सरकारें निपट रही हैं और अब उसका अनुकरण करते हुए असम सरकार बढ़ने जा रही है वह देश के लिए बहुत ही शुभ संकेत है। निश्चय ही इस प्रकार के निर्णय से हिंदू संस्कृति और धर्म की रक्षा करने में हमें सफलता मिलेगी ।
ज्ञात रहे कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने गायों की सुरक्षा के लिए एक गौ कैबिनेट बनाने का निर्णय लिया है। गौ कैबिनेट बनने के बाद गायों के संरक्षण, सुरक्षा और विकास को बल मिलेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर बताया कि गौ कैबिनेट की पहली बैठक 22 नवंबर को आगर मालवा में होगी। बता दें कि मध्य प्रदेश में धर्मांतरण रोकने के लिए शिवराज सरकार अब लव जिहाद कानून लाने जा रही है। इसकी घोषणा राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कर दी है।


मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए प्रदेश सरकार अगले विधानसभा सत्र में एक विधेयक लाएगी। मिश्र ने कहा कि लव जिहाद को गैर जमानती अपराध घोषित कर मुख्य आरोपी और इसके साथियों को पांच साल की कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण करवाकर शादी अब बहुत तेजी से चल रहा है। इसको आपकी भाषा में लव जिहाद कहते हैं। विधानसभा में हम मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र विधेयक-2020 लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसे हम अगले सत्र में विधानसभा में ला रहे हैं।
इस संबंध में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया का मत है कि केंद्र कि मोदी सरकार को भी धर्मांतरण को रोकने की प्रक्रिया पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए और जहां जहां भी इस प्रकार की घटनाएं होती हैं उन पर तुरंत लगाम लगाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष अधिकार प्रदान किया जाए।
श्री कालिया ने कहा कि धर्मांतरण एक ऐसी बीमारी है जो देश विभाजन की मांग को जन्म देती है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि धर्मांतरण से ही देश के भारतवर्ष के कई टुकड़े हुए हैं। ऐसे में इस बीमारी का समूल नाश करने का एक ही रास्ता है कि धर्मांतरण विरोधी कानून यथाशीघ्र लाकर मोदी सरकार अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति का वैसे ही प्रमाण दे जैसे उसने पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक करके या धारा 370 को समाप्त करके दिया है । उन्होंने कहा कि देश का हिंदू जनमानस निश्चय ही श्री मोदी जैसे सशक्त प्रधानमंत्री से यह अपेक्षा करता है कि वह ऐसा निर्णय लेकर हिंदू समाज की अप्रतिम सेवा कर राष्ट्र को उपकृत करेंगे।


श्री कालिया ने ब्यौरेवार और तथ्यात्मक जानकारी देते हुए हमें बताया कि उत्तर पूर्वांचल भारत का वह क्षेत्र है जिसमें ईसाई बहुल तीन प्रदेश अस्तित्व में आ गये हैं-नागालैंड, मिजोरम व मेघालय। ये तीनों क्षेत्र पहले असम प्रदेश के अंग थे। इसके बाद ईसाई मिशनरियों का विस्तार त्रिपुरा, अरूणाचल व मणिपुर में लक्ष्यित है। पूर्वोत्तर के सात प्रदेश असम, अरूणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर के साथ सिक्किम भी ईसाई षडयंत्र का केन्द्र है। अब पड़ोसी देश नेपाल भी इस समस्या से ग्रस्त हो चुका है।
तू महासभा के नेता ने कहा कि 1951 में भारत में 70 लाख ईसाई थे जो अब लगभग ढाई करोड़ हो गये हैं। भारत का लगभग 66,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ईसाइयत के प्रभाव में है। गृह मंत्रालय के अनुसार 66 देशों के लगभग 3 हजार विदेशी मिशनरी भारत में कार्यरत है। लगभग दो लाख ईसाई मिशनरी चर्च के विभिन्न कार्यक्रमों व हिंदुओं के धर्मांतरण में लगे हुए हैं। धर्मांतरण करने के लिए भारत को ईसाई मिशनरियों ने 138 क्षेत्रों में बांटा हुआ है और लगभग 2 लाख हिंदुओं को प्रतिवर्ष ईसाई बनाने का जाल फैलाया हुआ है। लगभग 200 ऐसे प्रशिक्षण केन्द्र हैं जहां से प्रतिवर्ष 2000 मिशनरी प्रचारक तैयार किये जाते हैं। भारत के सरकारी सूत्रों के अनुसार केवल 1980 से 1986 तक प्रतिवर्ष 200 से 448 करोड़ रूपया विदेशों से ईसाई संस्थाओं को प्राप्त हुआ है।
वर्तमान में चर्च दलित ईसाइयों के लिए आरक्षण की मांग कर रहा है जिससे कि हिंदू दलितों को मिल रही आरक्षण सुविधाओं का आर्थिक लाभ ईसाइयों को दिलाकर और अधिक धर्मांतरण कराया जा सके।
विश्व का चर्च अमेरिका आदि देशों के सहयोग से भारत के चार टुकड़े करना चाहता है जिससे भारत कभी महान शक्तिशाली देश न बन सके। युनाईटेड स्टेट्स ऑफ असम इन इंडिया नाम देकर ईसाई बहुल क्षेत्र बनाने का एक प्रारूप इस प्रकार है-नागालैंड (87.5 प्रतिशत ईसाई), मिजोरम (85.7 प्रतिशत ईसाई) मणिपुर (34.1 प्रतिशत ईसाई) त्रिपुरा (2 प्रतिशत ईसाई)।
श्री कालिया ने कहा कि सी.आई.ए. (अमेरिका गुप्तचर सेवा) ने यह योजना इसलिए बनाई जिससे अंग्रेजों के भारत से चले जाने के बाद भी पूर्वोत्तर भारत का ईसाई बहुल उपनिवेश बना रहे। बहुत बड़ी मात्रा में शस्त्र व धन देकर नागा विद्रोह जैसी षडयंत्रकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। 1982 में त्रिपुरा में कार्यरत एक अमरीकी मिशनरी एवं इससे पूर्व असम में एक मिशनरी को अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण भारत से निकाला गया।
1950 में नेपाल में केवल 50 ईसाई थे जो 1950 में 35 हजार 1991 में 50 हजार व 1994 में 1 लाख 20 हजार हो गये। नेपाल के 75 जिलों में चर्च की स्थापना हो चुकी है।
श्री कालिया ने इस बात पर अफसोस व्यक्त किया कि मदर टेरेसा-उत्तर पूर्वांचल में लाखों हिंदुओं को ईसाई बनाने वाली विदेशी महिला मदर टेरेसा को भारत सरकार ने भारत रत्न की उपाधि प्रदान की। अन्त्येष्टि (1997) भी सरकार के पैसे से की गयी।
उड़ीसा में स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या केवल इसलिए की गयी कि धर्मांतरित ईसाई पुन: हिंदू धर्म में वापिस आने लगे थे। इसके लिए लक्ष्मणानंद के सेवा कार्य को ध्वस्त किया गया। मेघालय में नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आफ नागालैंड के हथियार बंद आतंकी समूह कार्य कर रहे हैं। अरूणाचल के चांग्लोग व तिरप जिले के ईसाई आतंक से ग्रस्त है, इन जिलों को वृहत्तर नागालैंड में मिलाने की मांग की जा रही है। कोलकाता में एक ईसाई नन ने सात वर्षीय हिंदू बालिका को ईसाई न बनने पर चाकू से गोदकर मार डाला (दैनिक जागरण-30 जून 2001)। त्रिपुरा में सनातन धर्म के गुरूदेव शांति काली जी की 8 मार्च 2001 को हत्या की गयी। मिजोरम से 45 हजार रियांग जनजाति के लोगों को ईसाई न बनने पर राज्य से बाहर नि काल दिया गया। अगरतला व बैपटिस्ट चर्च का सेके्रटरी विस्फोट सामग्री के साथ गिरफ्तार हुआ (एशियन एज, 18 अप्रैल 2000) ये घटनाएं भारत व्यापी हैं। यदि समय रहते इसके निदान के उपाय नही सोचे गये तो संपूर्ण भारत किसी दिन अमेरिका व यूरोपीय देशों का चरागाह बन जाएगा। वर्तमान में 3 प्रदेश ईसाई बहुल बन चुके हैं। परंतु इन तीनों (नागालैंड, मिजोरम, मेघालय) के अतिरिक्त केरल व छत्तीसगढ़ में भी ईसाई मुख्यमंत्री बन चुके हैं। भविष्य का भारत हिंदू संचेतना तथा सांस्कृतिक गौरव के उद्घोष की सतत प्रतीक्षा कर रहा है।
श्री कालिया ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के ओजस्वी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिन्हें हमारा देश सदियों तक याद रखेगा । यदि श्री मोदी धर्मांतरण लव जिहाद जैसी समस्या पर स्थाई रूप से काबू पाने की दिशा में कोई ठोस कार्य करते हैं तो न केवल हिंदू महासभा उनका अभिनंदन करेगी बल्कि सारा देश उनकी महानता का यशोगान युग युग तक करेगा।

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