प्रभु की अनंत कथा वेद को सुनने के अभ्यासी बनो

images (47)

श्रीकृष्णजी कहते हैं कि अर्जुन ! जब देहधारी आत्मा सतोगुण की प्रधानता के काल में देह का त्याग करे तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है, अर्थात ऐसी स्थिति में आत्मा की सदगति हो जाती है। इसका अभिप्राय है कि किसी के लिए मरणोपरांत हमारा यह कहना कि उसकी आत्मा को सद्गति मिले, उचित नहीं है। सद्गति तो उसे अपने जीवन के कर्मों के आधार पर, उसके अन्त समय में बनी उसकी मति के आधार पर मिलती है, फिर भी हम यदि उसको सद्गति मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं तो यह हमारा पवित्र लोकाचार ही है – जिसे हम निभा लें पर उसे यह न मानें कि हमारे कहे से दिवंगतात्मा को सद्गति मिल गयी होगी।
आगे श्रीकृष्णजी कह रहे हैं कि जब देहधारी रजोगुण की अवस्था में मरे, तब कर्मों में आसक्त लोगों में जन्म लेता है और तमोगुणी अवस्था में मरकर मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।सतोगुण में देह त्यागता पाता उत्तम लोक।
रजोगुण में पुन: लौटता तमोगुण में हो शोक।।मानव जीवन तो पाया पर उसे पाकर ऐसी मलीन बस्तियों में रहना पड़ रहा है जहां गन्दगी ही गन्दगी है और मलमूत्र के त्याग का भी होश लोगों को नहीं है। यह क्या है ? निश्चय ही इसमें भी कोई पूर्व जन्म का प्रबल संस्कार है। गन्दगी से लोगों को घृणा नहीं होती, उसी में रम जाते हैं। कइयों को सरकार उभरने के अवसर देती है, तो कइयों को समाजसेवी संस्थाएं और लोग भी उभारने का काम करते हैं- पर सारे प्रयास व्यर्थ जाते हैं। क्यों ? निश्चय ही कोई प्रबल संस्कार है, जो इन्हें इस नरक से उभरने नहीं दे रहा है।
इस प्रबल संस्कार पर ही हमें चिंतन करना चाहिए। जो दिख रहा है वह भ्रांति मात्र है । रचना तो कहीं न दिखने वाले ने न दिखने वाले कर्म के आधार पर बनाई है । जिसे आज यह लोग भोग रहे हैं। यहां पर ऐसे ही कुछ प्रश्नों पर हम आगे विचार करते हैं। निश्चय ही यह प्रश्न हमें उस अनंत से जोड़ते हैं जिसकी कथा भी अनंत है। उस अनंत को समझना और उसकी अनंत कथा (वेद ) को सुनते रहना हमारे जीवन का उद्देश्य है। अतः हमें इसी का अभ्यासी बनना पड़ेगा। इसी का रस लेने वाला रसिया बनना पड़ेगा। इसी रस को ह्रदयंगम करना होगा।
‘तमोगुण का स्वरूप कैसा है ?’
‘अंधकार ,आलस्य, प्रमाद, निंद्रा।’
‘कल्याण की कामना करने वाले प्राणी को किस गुण में रहना चाहिए ?’
‘सत्व गुण में ।’
‘गुणातीत किसे कहते हैं ?’
‘जो द्वंद से परे है ।’
‘द्वंद किसे कहते हैं ?’
:जोड़े को जैसे सुख – दुख दिन – रात आदि।’
‘यह जीव क्या है ?’

‘परमात्मा का अंश ।’
‘जीवात्मा विषयों का सेवन कैसे करता है ?’
‘इंद्रियों तथा मन को आधार बनाकर ।’
कार्य और अकार्य की व्यवस्था में प्रमाण क्या है ?
‘शास्त्र ।’
‘सिद्धि सुख में परम गति किसे नहीं मिलती ?’
‘जो शास्त्र विधि का उल्लंघन करता है ।’
‘सात्विक ज्ञान क्या है ?’
‘देश, काल और पात्र के अनुसार दिया गया ।’
‘पांडवों का सेनापति कौन था ?’
‘ भीम ।’
‘सुदर्शन चक्र क्या है ?’
‘पूर्ण सत्यता से उत्पन्न ब्रह्म तेज का प्रतीक है।’ ‘जिसने मन, वचन, कर्म तीनों को साध लिया हो अर्थात जो सोचता हो , वही बोलता हो और करता भी हो तो उसमें इतनी शक्ति आ जाती है कि जिधर अंगुली उठा दे , मन का ध्यान ,शक्ति का बाण छोड़ दे उधर अपूर्णता नष्ट होगी ही । सुदर्शन चक्र सर्वशक्तिमान तेजस्विता का प्रतीक है । जिसका प्रयोग बार-बार नहीं किया जाता। जब अपूर्णता अपनी चरम सीमा पर पहुंचती है , तभी वार होता है। यह वही मानव कर सकता है जो वेद विज्ञान और विद्या ज्ञान से परिपूर्ण है।’
‘कमल किस चीज का प्रतीक है ?’
‘पूर्ण निर्लिप्तता का और पूरे – पूरे सहस्त्र विष्णु गुण जिसने अपने में पा लिए हों , उस का प्रतीक है । जो सब कला संपूर्ण हो, उसका सहस्रार पूरा विकसित होकर खुल और खिल जाता है।’
‘शंख किसका प्रतीक है ?’
‘संतुलित ऊर्जा का प्रतीक है ।जिस व्यक्ति की ऊर्जाएं संतुलित हों ,वह जो भी आवाज का शब्द करेगा , वह निर्दिष्ट स्थान पर पहुंच जाएगी ।नकारात्मक शक्तियों को काट देगी। इसलिए पूजा की सूचना हो या युद्ध की घोषणा दोनों अवसरों पर ही शंखनाद किया जाता है। ‘
‘ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाता है ?’
‘प्रकाश की उर्जा तरंग है जो सीधी चलती है उनसे आता है।’
‘भावनाओं का उद्योग किस आकार में प्रवाहित होता है ?’
‘भावनाओं का उद्वेग चक्रवात स्पाइरल आकार में प्रवाहित होता है ।जहां सीधा प्रकाश नहीं पहुंच पाता वहां चक्रवात तरंगें पहुंच जाती हैं, यही है शंख की विशेषता जो भाव डालकर फूँको वह आकाश , जल और थल पर फैल जाता है।’
‘सबसे अधिक सुंदरता किसने धारण की है ?’
‘मोर पंख ने।’
‘संसार रंगो का खेल है । सबरंग अपने आप में सुंदर और व्यापक अर्थ लिए हुए हैं । मोर पंख सब रंगों से सुंदरता धारण करता है । हमें भी प्रकृति के सब रंगों में लीलाओं से प्यार करना है ।अपनी भावनाओं को सुंदरता से प्रदर्शन करना है। प्रकृति ने सब कुछ दिया है। हम क्या धारण करते हैं ? – यह हमारी विशिष्टता है। ब्रह्मांड में सैकड़ों ग्रह हैं , परंतु हमारी पृथ्वी पर ही पांचों तत्वों को धारण करने की शक्ति है और यह धारण करके सुंदर रचना करती है ।मोर पंख में रंगों का समन्वय अनूठा व अनुपम है ,जैसे प्रकृति हमें संसार में हजार आंखों से निहार रही हो।’
‘ओम प्रणव क्या है ?’
‘इस प्रणव में तो संपूर्णता ही है, न कुछ कम न कुछ ज्यादा ।इसकी स्तुति में बस यही कहना है कि यह पूर्ण है ,प्रत्यक्ष है, प्रमाण है – सृष्टि होने का। इसी ओ३म को साधकर संपूर्ण ब्रह्मांड से जुड़ा जा सकता है ।तो प्रणाम का प्रतीक अपने आप में वह संदेश लिए है। संभवामि युगे युगे है। यही सत्य है प्रमाण का।’
‘गदा क्या है ?’
‘शारीरिक शक्ति का प्रमाण है।’
‘अभिमान से जो गर्दन अकड़ कर चलता है , वह अगले जन्म में क्या बना बनता है ?’
‘ऊंट की योनि प्राप्त करता है।’
‘ज्ञान का प्रथम सोपान क्या है ?’
‘अपनी अज्ञानता का आभास हो जाना ।’
‘अभिमानी का स्वभाव कैसा होता है ?’
‘पुचकारने पर मुंह चाटने लगे और ताड़ने पर मुंह काटने लगे ।’
‘वेदों की क्या शिक्षा है ?’
ईश्वर एक है ,जिसे अनेक नामों से पुकारा जा सकता है। ओ३म उसका सर्वश्रेष्ठ एवं निज नाम है।
ईश्वर के तीन रूप क्या हैं ?
‘सत, चित और आनंद।’
‘जीव के 2 गुण कौन से हैं ?’
‘सत और चित ।’
‘प्रकृति का कौन सा गुण है केवल सत ?’
‘संसार की उत्पत्ति, स्थिति, पालन और विनाश का हेतु कौन है ?’
‘ईश्वर।’
‘वह कैसा है ?’
‘अखिल ब्रह्मांड में व्याप्त है दोनों जन्म मरण से दूर है जिसका आदि अंत नहीं।’
जीव क्या है ?’
‘जीव चेतन शक्ति है। वह सूक्ष्म तथा स्वतंत्र है। वह अपने कर्मों के अनुसार जन्म मरण में फंसता है ।’
‘प्रकृति कैसी है ?’
‘प्रकृति जड़ और अचेतन है उसमें स्वयं कार्य करने की शक्ति नहीं है।’
‘सृष्टि का क्या रूप है ?’
‘सृष्टिअथवा संसार मरणशील है, नाशवान है, इसका प्रवाह अनादि काल से चला आ रहा है।’
‘स्वर्ग और नरक जीव को कैसे प्राप्त होते हैं? –
‘अच्छे और बुरे कर्म करने के अनुसार।’
‘वेदों में यज्ञों पर बहुत बल क्यों दिया गया है ?’
‘क्योंकि यज्ञ वस्तुतः वैदिक धर्म का मेरुदंड है।वेद ही विश्व बंधुत्व की भावना में विश्वास रखते हैं ।मानव मात्र की कल्याण भावना का उपदेश देते हैं व समस्त विश्व को श्रेष्ठ मानव बनने और बनाने का आदेश देते हैं ।वे उदारता और विश्वबंधुता की प्रेरणा देते हैं।’
‘आर्य शब्द की उत्पत्ति किस धातु से हुई ?’
‘संस्कृत की ‘ऋ गतौ’ धातु से बना। जिसका सीधा सादाअर्थ है :- ज्ञान , गमन और प्राप्ति। अर्थात जो व्यक्ति परमात्मा की इस सृष्टि में गतिशील है, क्रियाशील है, कर्मशील है, ज्ञानवान हैं, वह आर्य है।’ ‘एक मनुष्य को क्या करना चाहिए ?’
‘अपने अंदर बैठे परमात्मा को पहचानने की कोशिश।’
‘मनुष्य को क्या खाना चाहिए ? –
‘अभिमान।’
‘मनुष्य को क्या नहीं छोड़ना चाहिए ?’
‘विनम्रता।’
‘मनुष्य को क्या पीना चाहिए ? ‘
‘प्रेम रस।’
‘क्या नहीं पीना चाहिए ?’
‘ मदिरा।’
‘मनुष्य को क्या लेना चाहिए ?’
‘अपने से बड़ों का शुभाशीष ।’
‘क्या नहीं लेना चाहिए ?’
‘किसी की हाय ।’
‘मनुष्य को कैसे बोलना चाहिए ?’
‘मृदु बचन।’
क्या नहीं बोलना चाहिए ?’
‘कटु एवं असत्य वचन।’
‘मनुष्य को कैसे रहना चाहिए?’
‘सदाचार से ।’
कैसे नहीं रहना चाहिए ?’
‘दुराचार से।’
‘मनुष्य को कहां जाना चाहिए ?’
‘सत्संगति में ।’
‘मनुष्य को क्या जीतना चाहिए ?’
‘इंद्रियों को।’
‘मैं उसको क्या देखना चाहिए ?’
‘स्वयं के दोषों को और दूसरों के गुणों को ।’
‘मां को क्या बांटना चाहिए ?’
‘सुख लेकिन दुख नहीं ।’
‘आस्तीन का सांप और शत्रु की घात में कौन अच्छा होता है ?’
‘शत्रु की घात ।’देवेंद्र सिंह आर्य
चेयरमैन : उगता भारत

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
Hititbet Giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
kralbet
kralbet
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
grandpashabet
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
betpas giriş
goldenbahis giriş
goldenbahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
klasbahis giriş
goldenbahis giriş
goldenbahis giriş
interbahis giriş
interbahis giriş