दादू दुनिया बावरी, कबरे पूजे ऊत।

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दादू दुनिया बावरी, कबरे पूजे ऊत।
जिनको कीड़े खा गए उनसे मांगे पूत ॥
अजमेर और बहराइच जैसी कब्रों की पूजा करने वाले विचार करें—-
लाखों सूरमा वीर हृदय वाले महात्मा जान पर खेल कर धर्म पर बलि दे गये |
सीस दिये किन्तु धर्म नहीं छोड़ा |
आप जानते हैं जब मुसलमान नहीं आए थे | तो उनकी जियारतें, कबरें, मकबरे, खानकाहें और गोरिस्तान भी इस देश में न थे जब 8-9 सौ वर्ष से मुसलमान आए तब से ही भारत में कबरपरस्ती शुरू हुई |
जो अत्याचारी मुसलमान हिन्दु वीरों के हाथ से मारे गए | मुसलमानों ने उनको शहीद बना दिया और हिन्दुओं को जहन्नमि (नारकी)। शोक शत सहस्त्र शोक |
हमारे वीर बलिदानी धर्म रक्षक पूर्वजों जिन अत्याचारियों का वध किया,
हमारे पूर्वजों के हाथों से जो लोग मर कर दोजख (नरकाग्नि) में पहुँचाए गए |
हम अयोग्य सन्तान और कपूत पुत्र उन्हें शहीद समझ कर उन पर धूपदीप जलाते हैं
| इस मूर्खता पर शोकातिशोक ! इस अपमान की कोई सीमा नहीं रही |
ऐ हिन्दु भाइयो ! सारे भारत में जहां पक्के और उँचे कबरें देखते हो, वह लोग तुम्हारे ही पूर्वजों के हाथों से वध किये गये थे |

उनके पूजने से तुम्हारी भलाई कभी और किसी प्रकार सम्भव नहीं | प्रथ‌म अच्छी प्रकार सोच लो |

अगर पीरे मुर्दा बकारे आमदे |
जि शाहीन मुर्दा शिकार आमदे ||
यदि मरा हुआ पीर काम आ सकता तो मृत बाज भी शिकार कर सकते | मुसलमानों ने मन्दिर तोड़े, बुत तोड़े | लाखों का वध किया | इस कठोर आघात के कारण लोग मुसलमान हुए | देखो तैमूर का रोजनामचा (डायरी)
पण्डित लेखराम जी आर्य पथिक कृत ‘कुलियात आर्य मुसाफिर ‘से
—-–-
अपने आपको हिन्दू कहने वाली हिन्दू जाति राम, कृष्ण, हनुमान आदि व अन्य देवी देवताओं को छोड़कर मुसलिम पीरों कि कब्रों पर सर पटकती फिरती हैं। मेरे इस हिन्दू जाति से कुछ प्रश्न हैं।
१.क्या एक कब्र जिसमे मुर्दे की लाश मिट्टी में बदल चूँकि हैं वो किसी की मनोकामना
पूरी कर सकती हैं?
२. सभी कब्र उन मुसलमानों की हैं जो हमारे पूर्वजो से लड़ते हुए मारे गए थे, उनकी कब्रों पर जाकर मन्नत मांगना क्या उन वीर पूर्वजो का अपमान नहीं हैं जिन्होंने अपने प्राण धर्म रक्षा करते की बलि वेदी पर समर्पित कर दियें थे?
३. क्या हिन्दुओ के रामजी, कृष्णजी देवी देवता शक्तिहीन हो चुकें हैं जो मुसलमानों की कब्रों पर सर पटकने के लिए जाना आवश्यक हैं?
४. जब गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहाँ हैं की कर्म करने से ही सफलता
प्राप्त होती हैं तो मजारों में दुआ मांगने से क्या हासिल होगा?
५. भला किसी मुस्लिम देश में वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, हरी सिंह नलवा आदि वीरो की स्मृति में कोई स्मारक आदि बनाकर उन्हें पूजा जाता हैं तो भला हमारे ही देश पर आक्रमण करने वालो की कब्र पर हम क्यों शीश झुकाते हैं?
६. क्या संसार में इससे बड़ी मुर्खता का प्रमाण आपको मिल सकता हैं?
७. हिन्दू जाती कौन सी ऐसी अध्यात्मिक प्रगति मुसलमानों की कब्रों की पूजा
कर प्राप्त कर रहीं हैं जो वेदों- उपनिषदों में कहीं नहीं गयीं हैं?
८. कब्र पूजा को हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल और सेकुलरता की निशानी बताना हिन्दुओ को अँधेरे में रखना नहीं तो क्या हैं ?
९. इतिहास की पुस्तकों कें गौरी – गजनी का नाम तो आता हैं जिन्होंने हिन्दुओ को हरा दिया था पर मुसलमानों को हराने वाले राजा सोहेल देव पासी का नाम तक न मिलना क्या हिन्दुओं की सदा पराजय हुई थी ऐसी मानसिकता को बनाना नहीं हैं?
१०. क्या हिन्दू फिर एक बार २४ हिन्दू राजाओ की भांति मिल कर संगठित होकर देश पर आये संकट जैसे की आंतकवाद, जबरन धर्म परिवर्तन,नक्सलवाद,बंगलादेशी मुसलमानों की घुसपेठ आदि का मुंहतोड़ जवाब नहीं दे सकते?

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