दुर्गावती बोहरा यानी दुर्गा भाभी की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष

images (1) (28)

स्वतंत्रता सेनानी
विरांगना दुर्गावती वोहरा
साक्षात्कार के दौरान प्रश्नोत्तर

पुन्यतिथि पर शत शत नमन

    भारत की आजादी के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना अंग्रेजो से लड़ने वालों में महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भी विशेष महत्व है। देश की आजादी की लड़ाई के लिए महिलाओं ने खुद को बलिदान कर दिया था। झांसी की रानी, अहिल्या बाई होल्कर और कई दमदार व्यक्तित्व की महिलाओं की जाबांजी का भारतीय इतिहास गवाह है। इन महिलाओं में एक नाम भी शामिल हैं, वह है दुर्गावती का। दुर्गावती देवी को आप दुर्गा भाभी के नाम से जानते होंगे। दुर्गा भाभी भले ही भगत सिंह, सुख देव और राजगुरू की तरह फांसी पर न चढ़ी हों लेकिन कंधें से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ती रहीं। स्वतंत्रता सेनानियों के हर आक्रमक योजना का हिस्सा बनी। दुर्गा भाभी बम बनाती थीं तो अंग्रेजो से लोहा लेने जा रहे देश के सपूतों को टीका लगाकर विजय पथ पर भी भेजती थीं। 

     इनके स्वर्गवासी होने से पूर्व हमारे हरयाणे से दो प्रतिष्ठित आर्यसमाजी वीर पंडित सुखदेव शास्त्री एवं चौ. राममेहर एडवोकेट दुर्गा जी से मिले एवं साक्षात्कार किया। जिसके कुछ प्रश्नोत्तर मेैं प्रस्तुत कर रहा हुं। आशा है आप ध्यानपूर्वक पढ़ेगें। 

— अमित सिवाहा

राममेहर जी : – आप भगत सिंह जी को कैसे निकाल कर ले गई। मैने भगत सिंह जी की मां से पुछा था उन्होने कहा कि तथ्यों से छेड़छाड़ की इतिहासकारों ने! फिल्मी दुनिया वालों ने तो कपोल कल्पित बनावटी चरित्र दिखाया है। इस पर आप क्या कहोगे कैसे निकाला भगत सिंह को ??

दुर्गावती जी : – लाहौर से मैं बुर्का पहन कर निकली थी। बिल्कुल जो आम जीवन में घर परिवारों में होता है। हम तो ऐसे ही निकले थे। इन फिल्मों में तो बनावट दिखाई है। ऐसा हुआ नहीं था। जैसे परिवार के लोग जाते हैं मां बहन भाई ऐसे ही निकले थे। सब हमारा परिवार था। लोगों ने इस मुद्दे को उठा कर अलग तरीके से पेश किया है।

राममेहर जी : – आप लाहौर से निकल कर कहां पहुंचे थे?

दुर्गावती जी : – हमने शायद कानपुर या लखनऊ से ट्रेन बदली थी या कोई अन्य स्टेशन था मुझे नाम ध्यान नहीं आ रहा। हम वहां से निकल कर कलकत्ता पहुंचे थे।

राममेहर : – लाहौर से आप कौन कौन निकले थे?

दुर्गावती : – मैं भगत सिंह ओर मेरा बेटा हम तीन ही निकले थे। अब परिवार में भगत सिंह की कमी खलती है। वैसे पोता पोती हैं। यही परिवार है।

राममेहर जी :- सरकार ने आपको कितने वर्ष बाद सम्मान दिया पैंशन देनी प्रारम्भ की थी?

दुर्गावती जी :- ये तो मुझे अब याद नहीं लेकिन बहुत समय पश्चात सम्भाला। हमें पैंशन भी उतनी ही मिलती है जितनी अन्य सेनानियों को मिलती है।

राममेहर जी :- अब आपकी उम्र कितनी है जी?

दुर्गावती जी :- मेरा जन्म वर्ष 1907 का है अब मैं यही कोई 86-87 वर्ष की हुई हुं।

 स्मरण रहे यह साक्षात्कार वर्ष 1994 की ग्रीष्मऋतु में किया गया था। 

राममेहर जी :- जब लाहौर से भगत सिंह निकले तो उनकी ड्रैस क्या थी?

दुर्गावती जी :- यही पैंट पतलुन!!

राममेहर जी :- आप क्रांतिकारियों के सम्पर्क में कैसे आई?

दुर्गावती जी :- भई मेरे पति क्रांतिकारी थे मैं कैसे पीछे रहती?? आपने उनके बारे में शायद नहीं पढ़ा??
राममेहर जी :- भगवती चरण वोहरा खूब पढ़ा जी!!
दुर्गावती जी :- जब वो थे तो हम भी हुए। हालांकि अन्य महिलाएं पतियों के संग में पहले नहीं जाया करती थी। लेकिन मेरे पति के संग में, मैं खूब जाती थी। उन्होंने कभी ना नहीं कहा अपितू प्रेरित करते थे। मैं कोई तीसरी चौथी कक्षा में ही थी जब शादी हो गई थी। कोई 11 वर्ष की आयु थी।

▶️

राममेहर जी :- अपने क्रांतिकारी जितने भी थे उनके उपर धार्मिक असर किस संस्था का था?? आर्यसमाजी थे या सनातन धर्म का था ??

दुर्गावती जी :- देखिये आर्यसमाज का बहुत असर था। लेकिन बाद में देश की आजादी ही धर्म बन गया। हम लोग जितने भी थे नाटक वगैरा करते तो हम नाट्य कार्यक्रम में समाज की संरचना को प्रस्तुत करते थे।
जिन लोगों को काले पानी की सजा हुई तथा जो फांसी पर लटकाए गए हम उनकी कहानी लोगों को बताया करते थे।

   जब भगत सिंह को जेल हुई तो हमने जेल रोड़ पर एक मकान लिया किराये पर। उसमें मैं ओर सुशीला दीदी साथ थी। वहां रहने लगे। औरते साथ थी तो कोई शक नहीं करता था। मकान किसी मद्रासी इंजीनियर का था। उसका आधा मकान किराये पर लिया। उस मकान में हम सब चन्द्रशेखर, यशपाल, सुखदेव राज छोटा, मदन गोपाल,  मेरे पति अन्य क्रांतिकारी थे। खाना वगैरा भी बनाया करते थे। जब भगत सिंह को फांसी की सजा हुई थी, तो हमने कहा कि हम नहीं होने देगें फांसी। वहीं पर उनको झुड़ाने की प्लानिंग बनी थी। 

     मेरे पति व अन्यों ने मिलकर बम बनाया।  परीक्षण करने के लिए गए।  वहां वो तैयारी कर रहे थे।  सुखदेव राज ने कहा पंडित जी आप तो डरते हैं, लाइये मैं करुं।  वोहरा जी ने कहा देखिये मैं साइंटिस्ट हुं। मसाला वगैरा बनाने का तूजर्बेकार हुं। कहीं आप सोचते हो कि मैं कायर हुं।  लेकिन परीक्षण करते वक्त बम की कैप ठीक से नहीं लगी। बम फट गया। वोहरा जी वहीं गीर गए। सुखदेव राज हमारे पास आया भागता हुआ कि ऐसे ऐसे हो गया!! यशपाल वगैरा वहां पहुंचे तो उनकी सांसे फुल रही थी। हम वहां जा नहीं सकते थे क्योंकि पुलिस का पहरा ही इतना था। 

राममेहर जी :- आपकी उस वक्त आर्थिक सहायता कौन करता था ??

दुर्गावती जी :- भई हम ही रईस थे। मेरे ससुर राय साहब थे। अच्छी तनख्वाह मिलती थी उस वक्त। ओर लोग भी देते थे, जैसे जैसे आगे बढ़े।

राममेहर जी :- उन दिनों लाहौर में रोहतक के चौ. छोटूराम जी भी थे उनका क्या रोल था?

दुर्गावती जी – हां हां थे, लेकिन उनका याद नहीं आ रहा।
रोहतक से लाला श्यामलाल जी ने बहुत सहयोग किया, आर्थिक तौर पर।

    जब लाहौर से निकलने का प्लान बना तो सुखदेव मेरे पास आया कि आपने कलकत्ता जाना है भगत को लेकर, मैने कहा ठीक है। हम लाहौर से निकले,  मेरे पति पहले ही लाहौर छोड़ चुके थे। हम कलकत्ते में सेठ छाज्जूराम जी यहां ठहरे थे। वहां सुशीला जी सेठ छाज्जूराम जी की लड़की की ट्यूटर थी। वहां हम कोई पांच छ: दिन रहे।  सेठ छाज्जूराम ने व सुशीला जी ने भगत का रहने का प्रबन्ध किया। हमारे अलावा किसी को पता भी नहीं था कि ऐसे ऐसे आये हैं।  भगत को हम कहीं बाहर नहीं जाने देते थे, ये बोल देते की भगत को ज्वर (बुखार) हो गया है। झूठ की दवा ले ली थी। उन दिनों मैने सुभाष बाबू के नेतृत्व में कलकत्ता कांग्रेस में भाग लिया। जिस दिन कांग्रेस का फाइनल था उसी दिन बंगाली बनकर भगत गया था। 

  जब लाहौर से जेल काटकर निकली तो मुझे पंजाब व दिल्ली से निष्कासित कर दिया गया।  मैं गाजियाबाद आकर रहने लगी। तीन वर्ष के लिए मुझे निकाल दिया। यहां कन्या पाठशाला, एस डी स्कूल हैं। यहां में पढ़ाने लगी। एक वर्ष तक मैने पढ़ाया, हिन्दी मेरा विभाग था। मिस्टर मित्तल उनका मकान किराये पर लेकर रहने लगी। 

  वो भी समय निकल गया। जब तीन वर्ष पूर्ण हुये तो मैं दिल्ली आई। मैं कांग्रेस में शामिल हुई। मैने नोटिस किया कि ये कांग्रेसी झूठे हैं। इन्होनें सुभाष बाबू को डाउन किया एवं पंडित नेहरु को उंचे कर दिया। इन्होनें पंजाब से लोगों को बुलाया ओर सुभाष बाबू के खिलाफ भड़काया। लम्बी कहानी है। मैने कांग्रेस छोड़ दी। फिर मैने स्कूल शुरु किया। इससे पहले मैने मद्रास में 6 महिने का कोर्स किया। लखनऊ में स्कूल शुरु किया। इसके लिए बहुत संघर्ष किया। पैसे नहीं थे। पन्द्रह पन्द्रह रुपये में आदमी रखे ऑफिस मनी, उनके लिये खाना बनाना , कपड़े धोना इत्यादि। स्कूल का शिलान्यास पंडित नेहरु ने किया था। 

राममेहर जी :- जब आप आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे तो क्या थी मन में, कैसा होगी आजादी??

दुर्गावती जी :- जैसे दुनिया में होता है। हमने दुनिया का इतिहास पढ़ा था। कोई नई बात नहीं थी। सोवियत से भी प्रभावित थे। ज्यादातर क्रांतिकारियों के इतिहास पढ़ते थे।

पंडित सुखदेव शास्त्री :- स्वामी दयानंद जी का असर रहा आप पर?

दुर्गावती जी :- भई शुरु शुरु में बहुत रहा। लेकिन आगे चलकर छुट गया।
राममेहर जी :- भगत ओर अन्य क्रांतिकारियों पर स्वामी दयानंद का बहुत प्रभाव था।
दुर्गावती जी :- हम सभी पर प्रभाव था। भगत का तो सम्पूर्ण परिवार ही आर्यसमाजी था। उनके पिता जी एवं दादा जी के पास तो हवन कुंड सदैव साथ रहता था। भगत भी साथ रखता था। लेकिन गणेशंकर विद्यार्थी ने उसको अलग रख दिया। उनके केश वगैरा कटवा दिये थे। ताकि पहचान गुप्त रहे। आंदोलनों में हम सबने लाठियां खाई।

राममेहर जी :- कभी मौषम ठीक रहा तो आप दो चार दिन रोहतक भी रुकना चाहेगीं??

दुर्गावती जी :- नहीं मैं घर से बाहर नहीं निकलती। डॉ. से दवा वगैरा ली हैं।
तबीयत बहुत खराब रहती है। आज भी तबीयत खराब है। आप पहले भी आये थे तो आज आपके पास बैठ गई। यें दो चार बाते हो गई। घर से बाहर नहीं जाती कहीं भी।

पंडित सुखदेव शास्त्री :- आज के हालात पर बताओ जी क्या कहोगे ??

दुर्गावती जी :- ज्ञान की वृद्धि कम हो गई, विज्ञान की ज्यादा हो गई। कितने ही मरे, किसी को फर्क नहीं पड़ता। कुछ ऐसी चीजे हो गई जिसकी कल्पना हमने नहीं की थी। चार चार घण्टे बत्ती गुल रहती है। किसी को फर्क नहीं पड़ता।

सुखदेव जी :- बेरोजगारी के बारे में क्या कहोगे जी?

दुर्गावती जी :- जब आप पैदा ही ज्यादा करोगे तो बेरोजगारी बढ़ेगी ही। बच्चे बड़े होगें तो उनको सब कुछ चाहिये गा। स्कूल की फीस, ओढ़ने पहनने के लिए इत्यादि बहुत खर्चे हैं।

सुखदेव जी :- आज की राजनीतिक पार्टियों के बारे में आपके क्या विचार हैं जी कौनसी सही है।

दुर्गावती जी :- कोई भी अच्छी नहीं है। सब अपना भविष्य बनाते हैं। आपको पानी बिजली मीले न मीले, उनको मील जाती है। आपके लिए सड़क बने न बने उनके लिए रातों रात बन जाती है। इन सबका स्वार्थ है। देश सेवा वाली भावना किसी में नहीं है। हालात देखकर बहुत दुख होता है। इस हालात पर मैं बात ही नहीं करना चाहती

स्वतंत्रता सेनानी विरांगना दुर्गावती जी को शत शत नमन

इस साक्षात्कार के आगे के प्रश्रनोत्तर फिर कभी प्रकाशमय करेगें।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
bettilt giriş
meritking giriş
matbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
kralbet
kralbet
imajbet giriş
xslot giriş
xslot giriş
betvole giriş
betvole giriş
bettilt
betvole giriş
betvole giriş
bettilt
gobahis giriş