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प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम और योगी आदित्यनाथ

 अनेक बलिदान दिए हमने अपनी लाज बचाने को।
सारा देश संकल्पित था,  मंदिर भव्य बनाने को।।

22 जनवरी  2024 का वह ऐतिहासिक दिवस हम सबकी स्मृतियों में कैद होकर रह गया जब देश ने राम मंदिर का उद्घाटन होते हुए देखा।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस समय अपनी ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया । उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अलग हटकर एक राम भक्त की छवि प्रस्तुत करते हुए  प्रदेश भर में सुरक्षा के ऐतिहासिक प्रबंध करने के निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह सक्षम कार्य कुशलता ही थी, जिसके चलते न केवल अयोध्या धाम में बल्कि पूरे प्रदेश में कहीं पर भी कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई। कार्यक्रम से पहले और उसके पश्चात पूरे प्रदेश में पूर्णतया शांति बनी रही।
    मुख्यमंत्री ने एक सक्षम और मजबूत प्रशासक की छवि प्रस्तुत की। जिससे किसी भी असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व को मुंह निकालने तक का साहस नहीं हुआ । एहतियात के तौर पर इससे पहले कई बार ऐसा देखा गया था कि जब शासन प्रशासन में बैठे लोग जन सामान्य को ऐसे अवसरों पर आतिशबाजी करने से यह कहकर रोक दिया करते थे कि इससे दूसरे संप्रदाय की भावनाओं को चोट पहुंचेगी। इसलिए शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार से अपनी खुशी प्रकट न करें पहली बार देखा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को अपनी खुशी प्रकट करने का पूरा अवसर उपलब्ध कराया।
उन्होंने मजबूती के साथ यह घोषणा की कि 22 जनवरी को आतिशबाज़ी पर कोई रोक नहीं है।

मंगल गाओ खुशी मनाओ , शुभ दिन है ये आया।
सौभाग्य हमारा सबका है , इत्र सर्वत्र बरसाया।।

 मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को ‘राष्ट्रीय उत्सव’ के रूप में मनाने की योजना बनाई और अपनी इस योजना को क्रियान्वित करते हुए उन्होंने 22 जनवरी को शिक्षण संस्थाओं में अवकाश घोषित किया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया कि बालक भी घर पर रहकर उस दिन विशेष आनंद की अनुभूति करें। जिस प्रकार एक त्योहार पर घर परिवार में खुशी का परिवेश बनता है , उसी परिवेश में सब अपने आप को इस राष्ट्रीय पर्व के साथ जोड़ दें। लोगों के भीतर सात्विकता का भाव जागृत करने के लिए उन्होंने यह आदेश भी जारी किया कि प्राण-प्रतिष्ठा के दिन प्रदेश में  मदिरा की विक्री नहीं होगी । भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ लोगों को जोड़ने का सराहनीय कार्य करते हुए मुख्यमंत्री ने मदिरा की बिक्री पर पूरे प्रदेश में रोक लगा दी। उन्होंने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बनाने के लिए अयोध्या में बाहर से पहुंचने वाले आगंतुकों का अविस्मरणीय अतिथि सत्कार संपन्न करने के निर्देश अपने अधिकारियों को दिए। अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री योगी के दिए निर्देशों का पालन करते हुए छोटे-बड़े सभी आगंतुकों को भरपूर सम्मान देने का सराहनीय कार्य किया । उस समय लग रहा था कि शासन प्रशासन में बैठे सभी लोगों के भीतर राम की पवित्र भावना आकर रम गई थी।

अतिथि हमारा देव है, भारत की यह सोच।
अपमानित जो भी करे,उसकी खोटी सोच।।

मुख्यमंत्री के यह भी निर्देश थे कि 22 जनवरी को सभी सरकारी भवनों की साज-सज्जा कराई जाए।  सारे अयोध्या धाम को उसी प्रकार सजाने का प्रबंध किया गया जिस प्रकार कभी त्रेता काल में रामचंद्र जी के श्रीलंका विजय के पश्चात लौटने के समय अयोध्या को सजाया गया था । एक नया उत्साह लोगों में भरते हुए मुख्यमंत्री ने सरकारी संस्थानों  भवनों को तो सजाया ही उनके निर्देश से सड़कों / पार्कों आदि को भी दुल्हन की भांति सजाया गया। मुख्यमंत्री ने लोगों को अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए आतिशबाजी करने की भी खुली छूट प्रदान की।
   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुंभ मेले के समय सुरक्षा और सफाई के जिस प्रकार प्रबंध कराए थे उसने  कुंभ मेले में देश-विदेश से पहुंचे अतिथियों पर एक अलग ही छाप छोड़ी थी। कुंभ मेले में देखी गई उस स्वच्छता से उस समय प्रत्येक अतिथि अभिभूत था । उसका प्रभाव यह हुआ था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश की ओर लोगों ने आकर्षण भरी दृष्टि से देखना आरंभ किया था। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के समय एक बार फिर कुंभ मॉडल पर सफाई अभियान चलाया और शासन प्रशासन को इस बात के लिए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वच्छता का पालन कुंभ मॉडल के आधार पर ही किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्देश का भी अधिकारियों द्वारा अक्षरश: पालन किया गया। 14 जनवरी से अयोध्या में मुख्यमंत्री ने स्वच्छ्ता अभियान आरंभ किया। अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों  का स्वयं निरीक्षण किया और कड़े शब्दों में अधिकारियों से कहा कि सफाई व सुरक्षा से कोई समझौता उन्हें पसंद नहीं होगा। प्रशासन में बैठे अधिकारी भली भांति यह जानते थे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो कहते हैं उसे वैसे ही लागू होता भी देखना चाहते हैं । अतः उनके निर्देशों का यथावत पालन किया गया।

सुरक्षा और स्वच्छता, अधिकारी  दें ध्यान।
पालन करें निर्देश का नहीं तो होगी हान।।

 मुख्यमंत्री का निर्देश रहा कि  वीवीआईपी के विश्राम स्थल को पहले से ही निर्धारित कर दिया जाना चाहिए। अयोध्याधाम आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों को नव्य, दिव्य, भव्य अयोध्या की महिमा से परिचय कराने  के लिए टूरिस्ट गाइड किए गए।
अयोध्या में निवासरत बाहरी लोगों का सत्यापन कराएं। जिससे कि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाए।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पूर्व अयोध्या दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला और हनुमान गढ़ी के दर्शन-पूजन के उपरांत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उनकी मुस्तैदी को देखकर कोई भी यह सहज अनुमान लगा सकता था कि मुख्यमंत्री किसी भी प्रकार का कोई जोखिम लेना उचित नहीं मानते। वह कार्यक्रम स्थल के चप्पे चप्पे पर अपनी नजर जमाए हुए थे। अपने मजबूत और निडर व्यक्तित्व के चलते उन्होंने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को पूरी मुस्तैदी के साथ जुटे रहने के लिए प्रेरित किया। मकर संक्रांति के बाद प्रारंभ हो रहे प्राण प्रतिष्ठा के वैदिक अनुष्ठानों की जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने समारोह की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सभी आवश्यक सहयोग के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। इसके बाद, आयुक्त सभागार में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

राम हमारे पूज्य हैं , पूज रहा संसार।
अनुकरण के योग्य हैं, चरित्र और व्यवहार।।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारतीय संस्कारों में विश्वास रखते हैं । वह राजनीति के भारतीयकरण के पक्षधर रहे हैं। यही कारण है कि राजनीति से अलग वे राष्ट्रनीति में विश्वास रखते हैं।
उनकी भाषण शैली इतनी ओजस्वी होती है कि लोग उनके हिंदी प्रेम, राष्ट्र प्रेम और उनकी ओजस्विता के कायल हो जाते हैं। उनका संकल्प है कि राम को प्रदेश के जन-जन के हृदय मंदिर में विराजमान कर दिया जाए। उनकी सोच है कि राम का भ्रातृ प्रेम , माता पिता के प्रति समर्पण , भक्ति भावना,  ईश्वर प्रेम,  राष्ट्र प्रेम, विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के हृदय मंदिर में एक संस्कार के रूप में स्थापित कर दिया जाए। जिससे आने वाले भारत की तस्वीर को धार्मिकता से रंग कर दिया जाए। उनकी दृष्टि में धार्मिकता लाल कपड़ों को पहन लेना ही नहीं है । इसके विपरीत उनकी मान्यता है कि नैतिकता और न्याय के सिद्धांतों के साथ सबकी सोच को समन्वित दिया जाए। जिससे किसी प्रकार का उपद्रव , उत्पात या झगड़ा झंझट कहीं पर न हो।  अपनी सोच और नेतृत्व क्षमता के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश और देश से बाहर भी जाने जाते हैं । यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के भी उद्योगपति पूंजी निवेश के लिए आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्राण प्रतिष्ठा की अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि 500 वर्षों के सुदीर्घ अंतराल के बाद आए प्रभु श्री रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक और अत्यंत पावन अवसर पर आज पूरा भारत भाव-विभोर और भाव विह्वल है। श्री अवधपुरी में श्री रामलला का विराजना भारत में ‘रामराज्य’ की स्थापना की उद्घोषणा है। उन्होंने कहा कि: –
‘सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती’।।
की परिकल्पना साकार हो उठी है।
मुख्यमंत्री ने अपने इन शब्दों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने चाहे राम राज्य की स्थापना को कोरी कल्पना माना, पर हम उसे यथार्थ के धरातल पर लागू करके दिखाने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर का निर्माण भारत में राम राज्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
सीएम योगी ने कहा कि “रामकृपा से अब कभी कोई भी श्री अयोध्या धाम की पारंपरिक परिक्रमा को बाधित नहीं कर सकेगा। यहां की गलियों में गोलियां नहीं चलेंगी, सरयू जी रक्त रंजित नहीं होंगी। अयोध्या धाम में कर्फ्यू का कहर नहीं होगा। यहां उत्सव होगा। रामनाम संकीर्तन गुंजायमान होगा।”
अपने इस संबोधन के माध्यम से मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उत्तम स्थिति से लोगों को अवगत कराया। उन्हें भरोसा दिलाया कि वह हिंसा और अराजकता के प्रदेश की छवि को भूलकर नए स्वरूप में स्थापित हुए उत्तर प्रदेश को पहचानें और यह जान लें कि अब यहां वे परिस्थितियां नहीं रही हैं जिनसे इस प्रदेश को अपयश का पात्र होना पड़ता था।
योगी जी ने रामलला भगवान की जय बोलने के साथ भारत माता की जय और जैजै सीतारम से भाषण का शुभारंभ किया। उन्होंने परिवेश को भक्तिमय बनाने का प्रयास किया। लोगों ने भी उनका साथ दिया। जिससे पूरे परिवेश में ओज और जोश के साथ-साथ सात्विकता भारी भक्ति भी पसर गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रभु राम लला के भव्य, दिव्य और नव्य धाम में विराजने की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई। मन भावुक है।”

ओज जोश से भर गया,सारा था पंडाल।
योगी की हुंकार सुन, भाग चले चांडाल।।

ज्ञात रहे कि योगी जी की यह भावुकता किसी दुर्बलता का प्रतीक नहीं थी। उनकी यह भावुकता उन लोगों के स्मरण को लेकर थी जिन्होंने इस दिवस को लाने के लिए अपने प्राणों की आहुति पिछले 500 वर्ष के काल में किसी भी समय दी थी। उसको अभिव्यक्ति देने के लिए उनके पास शब्द नहीं थे। उनकी यह भावुकता लोगों के उस असीम प्यार के प्रति भी थी जिन्होंने उन्हें और प्रधानमंत्री मोदी को अपने मत के माध्यम से यह ताकत दी कि वह राम के सपनों का भारत बनाने के लिए प्रदेश और देश का नेतृत्व संभालें। कभी-कभी कृतज्ञता भी लोगों को भावुक कर देती है । ये ऐसे क्षण होते हैं जिनमें कृतज्ञता को प्रकट करने के लिए वक्ता के पास शब्द नहीं होते। व्यक्ति बहुत कुछ कहना चाहता है पर कुछ भी नहीं कर पा। बस, यही स्थिति उस समय योगी जी की हो गई थी।
अपने भाषण को जारी रखते हुए मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा महसूस कर रहे होंगे, आज इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का हर नगर, हर ग्राम अयोध्या धाम है। हर मन में राम नाम है। हर आंख हर्ष और संतोष के आंसू से भीगी है। हर जुबान राम नाम जप रही है। रोम-रोम में राम रमे हैं…ऐसा लगता है कि हम त्रेतायुग में आ गए हैं।”
ऐसा कहकर मुख्यमंत्री ने अपनी वाक शक्ति का परिचय दिया। उन्होंने कल्पनाओं को यथार्थ के साथ बांधने का सफल प्रयास किया। लोगों को लाखों वर्ष पुराने समय के साथ बांध दिया। कम शब्दों में लोगों को इतिहास की यात्रा कराना या घटनाओं के साथ सीधे जोड़ देना या घटनाओं से उनका सीधा सीधा संवाद स्थापित करवा देना, हर व्यक्ति के बस की बात नहीं होती। पर योगी आदित्यनाथ में ऐसी कला है कि वह अपने श्रोताओं को अपने साथ और अपने द्वारा बताई जा रही घटनाओं या घटनाक्रम के साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं। अपने मुख्यमंत्री के द्वारा सुनाये जा रहे इन ओजस्वी शब्दों का लोगों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। तालियों की गड़गड़हाट सारे वातावरण में फैल गई।
उन्होंने आगे कहा कि “भारत का हर मार्ग रामजन्मभूमि की ओर आ रहा है। सीएम योगी ने कहा कि मंदिर वहीं बना है, जहां बनाने का संकल्प लिया था। बहुसंख्यक समाज ने लंबी लड़ाई लड़ी।”

भूमि अयोध्या धाम की, हुई चंदन के समान।
धन्य दिशाएं हो गईं, मिट सभी व्यवधान।।

अपने इन शब्दों के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र के द्वारा आधारित किए गए संकल्प को अभिव्यक्ति दी और उसे किसी पार्टी विशेष का संकल्प न दिखाकर पूरे राष्ट्र का संकल्प दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज भारतवर्ष के प्रत्येक नगर में, प्रत्येक गांव में और प्रत्येक व्यक्ति के मन में अयोध्या के प्रति असीम प्रेम उमड़ रहा है। यह केवल श्री राम जी की कृपा है। क्योंकि श्री राम जी के साथ न केवल भारतवासियों का अपितु भारतवर्ष के बाहर भी रहने वाले करोड़ों लोगों का गहरा संबंध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा का यह ऐतिहासिक कार्यक्रम करोड़ों सभी सनातन आस्थावानों के लिए हर्ष-उल्लास, गौरव और आत्मसंतोष का अवसर है। उन्होंने कार्यक्रम से पूर्व ही देशवासियों के लिए यह अपील जारी की थी कि  22 जनवरी को सायंकाल हर देव मंदिर में दीपोत्सव मनाया जाएगा। हर सनातन आस्थावान अपने घरों/प्रतिष्ठानों में रामज्योति प्रज्ज्वलित कर रामलला का स्वागत करेगा। सभी सरकारी भवनों की साज-सज्जा कराई जाए। सायंकाल आतिशबाजी के भी प्रबंध हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म पथ, जन्मभूमि पथ, भक्ति पथ, राम पथ की थीम आधारित सजावट कराएं। यह उत्सव, आनंद का ऐतिहासिक अवसर है। ऐसे प्रयास करें कि हर आगंतुक/श्रद्धालु/पर्यटक यहां से सुखद अनुभव लेकर जाए।

डॉ राकेश कुमार आर्य

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