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गार्गी वैदिक कन्या गुरुकुल कनियान, शामली का वार्षिकोत्सव हुआ संपन्न

शामली।  ( विशेष संवाददाता) गार्गी वैदिक कन्या गुरुकुल कनियान, शामली का वार्षिकोत्सव वैदिक सम्मेलन के रूप में महर्षि दान सरस्वती की 200वी जन्म जयंती के रूप में हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। गुरुकुल के प्रांगण में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य करण सिंह शास्त्री जी ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जितेंद्र भाटिया जी प्रतिनिधि एमडीएच ग्रुप रहे, विशिष्ट अतिथियों में श्री संजीव आर्य जी कुरुक्षेत्र, मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य योगेश भारद्वाज जी रहे। विशिष्ट वक्ताओं में डॉ मनीष आर्या केंद्रीय विश्वविद्यालय संस्कृत विश्वविद्यालय उत्तराखंड रही, और साथ में करूणा आर्या योगाचार्या जी रही,श्री ओमवीर सिंह चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे। कार्यक्रम में आर्य समाज के अन्य स्थानों से मंत्री प्रधान और सभाओं के अधिकारी भी उपस्थित रहे।गुरुकुल में पढ़ने वाली ब्रह्मचारिणियों के अभिभावक भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ब्रह्मचारियों ने अपना प्रदर्शन बहुत ही सुंदर एवं भव्य रूप में प्रदर्शित किया। जिसे देखकर सभी में बड़ा उत्साह, आकर्षण बना और सभी ने कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की। वार्षिकोत्सव में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और बढ़ते हुए गार्गी वैदिक कन्या के गुरुकुल के इस कार्यक्रम में सभी बड़े उत्साहित आनंदित रहे। गुरुकुल की कन्याओं के प्रदर्शन को देखकर सभी में बड़ा उत्साह रहा, सभी ने गुरुकुल को अपना सहयोग प्रदान करने की घोषणा की । गुरुकुल प्रबंध समिति के प्रबंधक डॉ विकास पवार ने संचालन किया और श्री अनिल कुमार कोषाध्यक्ष एवं मा अशोक कुमार जी ने मंच पर उपस्थित सभी महानुभवों का अंग वस्त्र पहनकर स्वागत किया। बाहर से आए हुए अतिथियों विशिष्ट वक्ताओं एवं विद्वानों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और कार्यक्रम बहुत ही व्यवस्थित ढंग से लंबे समय तक चला। इस कार्यक्रम में जलपान एवं भोजन की व्यवस्था मास्टर अशोक कुमार कनियान जी की ओर से की गई और अपनी सेवा देकर उन्होंने वहां इस भोजन के कार्यक्रम को बहुत ही सुंदर बनाया। भोजन बड़ा सात्विक और आनंदित पौष्टिक था। इसी प्रकार का भोजन आर्य समाज और गुरुकुलों में होना चाहिए। वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए गुरुकुलों की प्रासंगिकता पर विचार करते हुए गुरूकुल की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आवाह्न किया। कि आने वाला समय हमारे लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण समय है। इसमें अगर हम कुछ करना चाहते हैं, आर्य समाज को जीवित रखना चाहते हैं ,तो आर्य समाज को जीवित रखने का एक ही उपाय है वह गुरुकुल शिक्षा प्रणाली गुरुकुल के माध्यम से ही आर्य समाज मजबूती को प्राप्त कर सकता है। इसीलिए आर्य समाज को जीवित रखना है तो हमें बालक- बालिकाओं के गुरुकुलों को सहयोग प्रदान करना चाहिए। आचार्य योगेश भारद्वाजें ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज बहुत सारे मिशनरी ईसाई और मुस्लिम आदि लोग इस भारत राष्ट्र की संस्कृति को छिन्न भिन्न करने में नष्ट करने में लगे हुए हैं।लेकिन आर्य हिंदू अभी भी जागृत नही है।वह सोए हैं और जागृत मुद्रा में नहीं हुए हैं उन्हें भी जागरूक होकर के काम करना चाहिए।आर्य समाज राष्ट्र का सूचक प्रहरी है और उसे हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए।कार्यक्रम में चौधरी ओमवीर सिंह जी ने भी गुरुकुलों की प्राचीनता पर विचार दिए और कहा कि मैं काली ने हमारी संस्कृति को बड़ा छिन्न भिन्न किया है और उसे हमें पुनः गुरुकुल के माध्यम से जीवित करना चाहिए मैं गुरुकुल प्रबंध समिति के सभी अधिकारियों को बधाई देता हूं कि वह इस कार्यक्रम को चला रहे।डॉ मनीषा आर्या जी ने भी महर्षि दयानंद के विचारों को बताते हुए अपने विचारों की सार्थकता से अवगत कराने का प्रयास किया। करूणा आर्या ने भी महिलाओं की शिक्षा और योग की शिक्षाओं को महत्वपूर्ण मानते हुए ब्रह्मचारिणियों को योग करने की प्रेरणा देते हुए स्वस्थ रहने का आह्वान किया। अंत में आर्य जितेंद्र भाटिया जी जो कुछ विलंब से पहुंचे थे। उनका बहुत ही भव्य सम्मान किया गया और उन्हें भी स्मृति चिन्ह भेद कराया गया । उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मैं आर्य समाज का सेवक हूं और जहां मुझे याद किया जाता है। यह जो सच्चे मन से आर्य समाज का कार्य कर रहे हैं उन लोगों की सेवा में हम सदा उपस्थित रहते हैं। एमडीएच राजीव गुलाटी का उन्होंने गुणगान करते हुए कहा का जहां इस प्रकार के धनी लोग कल्बो में ,होटल में ,अपना जीवन व्यतीत करते हैं। लेकिन उनमें एम डी एच के मालिक माननीय राजीव गुलाटी जी अपने धन का प्रयोग आर्य समाज के निर्माण में गुरुकुल आर्य समाज की संस्थाओं को दान देकर के अपने आप को धन्य करते हैं। वेद प्रचार के लिए सजग बने रहते हैं। ऐसे दानी महानुभावों का हम आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने मुझे यहां आपकी सेवा में भेजा है। आपके लिए जहां संजीव आर्य जी ने 151000 रूपये की बात मुझे रखी थी और आचार्य करणसिह जी का पत्र मुझे आया था। तो मैं इस आधार पर फिर भी आपके कार्यक्रम को देखते हुए आपकी आवश्यकता को अनुभव करते हुए। 2 लाख 51000 का चेक में एमडीएच की ओर से लाया हूं और आचार्य करण सिंह जी आकर के इस चेक को ग्रहण करें।कन्या गुरुकुल के प्रधान होने के नाते यह चेक मै उनको प्रदान करता हूं। तो आचार्य करण सिंह ने उठकर के चेक लिया और भविष्य में भी उन्होंने गुरुकुल को सहयोग करने का आश्वासन दिया है। बाहर बने चार अतिथि कक्ष को अधूरा देखकर उन्होंने कहा कि मैं इस पर जाकर के गुलाटी जी से विचार करूंगा और मैं इन कक्षाओं को शीघ्र ही पूर्ण कराऊंगा ₹500000 की उन्होंने संभावित राशि देने की योजना का आवाहन किया है। तो इस प्रकार से गार्गी वैदिक कन्या गुरुकुल बहुत ही शीघ्रता से आगे बढ़ रहा है। आप सभी से हम निवेदन करते हैं कि भारतवर्ष से अनेक कन्याएं यहां आए उन्हें हम शिक्षित दीक्षित करेंगे। हमारी गार्गी वैदिक कन्या गुरुकुल की सभी ब्रह्मचारियों ने अनेक विषयों पर उन्होंने आसान, जुड़े कराटे, सूर्य नमस्कार, योगाभ्यास और अग्नि के गोले से निकलते हुए अपना कठोर परिश्रम से जो प्रदर्शन किया है। वे बालिकाएं सभी सराहनीय और धन्यवाद की पात्र हैं। इसके उपरांत उन्होंने आध्यात्मिक और बौद्धिक प्रगति में भी अपनी योग्यता हासिल की है। उसको भी प्रदान करते हुए गुरुकुल की कर्म
ब्रह्मचारिणियों ने कविता ,भजन, भाषण और यज्ञ पर चर्चा करते हुए हानि – लाभ बताते हुए यज्ञ को रोज करना चाहिए ऐसा संकेत दिया है।वेद पाठ हमने सभी ब्रह्मचारिणियों को बड़ी तन्मयता के साथ सिखाया है। हमारी सभी ब्रह्मचारियां वेद पाठ कर लेती है।इसका प्रमाण इस बात से मिलता है। कि आचार्य योगेश भारद्वाज जी ने लूम्ब में आए हुए कार्यक्रम में इन ब्रह्मचारियों को नजदीक से देखा तीनों दिन अलग-अलग ब्रह्मचारिणियों ने जाकर के वेद पाठ किया। तो इस तरह से बड़ी मेहनत के साथ यहां हमारी स्वाति आचार्या, आचार्या सोनिया जी जो बड़ी मेहनत पुरुषार्थ लग्न से श्रद्धा के साथ कार्य करते हुए इस राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटी है। ऐसी दोनों बहनों को हम आभार व्यक्त करते हैं। उनका धन्यवाद करते हैं। और इसी प्रकार से निरंतर श्रद्धापूर्वक राष्ट्र के निर्माण में अनवरत लगी रहेगी।महर्षि दयानंद के सिद्धांतों पर अडिग रहेंगी। तो इसी पर अंत में इस कार्यक्रम को समाप्ति की ओर ले जाया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर दिवाकर आचार्य जी उपस्थित रहे परंतु समय का अभाव होने के कारण उन्हें समय बोलने का नहीं मिल सका उन्होंने अपनी ब्रह्म ज्योति पत्रिका का वहां परिचय दिया और उसे लोगों तक पहुंचाया। जिसमें वैदिक ज्ञान के द्वारा वह भी प्रचार कर रहे हैं। जो अब 83 वर्ष के हैं। आर्य समाज के लिए समर्पित हैं। आचार्य जी का भी हम वहां पधारने पर धन्यवाद करते हैं। उनकी बेटी डॉक्टर सुमेधा आर्या जी ने भी पूर्व 3 वर्ष गुरुकुल की वहा सेवा की है। तो उनका धन्यवाद करते हुए अंत में प्रबंधक महोदय डॉ विकास कुमार जी ने सबका हृदय से धन्यवाद किया और धन्यवाद करते हुए गुरुकुल की भावी योजनाओं के बारे में कुछ चिंतन प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष आचार्य करण सिंह जी को आमंत्रित किया और सभा को समापन करने के लिए निवेदन किया आचार्य करण सिंह जी ने महर्षि दान जी के 200वीजयंती पर उनके जीवन के संस्मरण सुनाते हुए समय की प्रतिबद्धता को देखते हुए बहुत ही सुंदर ढंग से इस कार्यक्रम का समापन किया। शांति पाठ जय घोष के बाद इस कार्यक्रम को विधिवत्त समाप्त किया गया। आचार्य करण सिंह जी ने क्षेत्र में से आए हुए सभी लोगों से निवेदन किया कि आप अपनी थोड़ी-थोड़ी आहुति भी यज्ञ में प्रदान करेंगे तो हमें बहुत बड़ा बल मिलेगा और कहां के मै प्रधान नहीं हूं आप सभी प्रधान है। तो आप सभी मिलकर के चलेंगे तो यह गुरुकुल निरंतर दिनों दिन रात दूनी चौगुनी उन्नति करेगा। आप सभी हमारे साथ जुड़े रहें। हम आपको इसे एक विश्वविद्यालय के रूप में बना कर देना चाहते हैं । शीघ्र ही इस गति के साथ चलता रहा तो यह निश्चित ही इस गति को प्राप्त करेगा आचार्य जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमारा उद्देश्य इस गुरुकुल में 9000 छात्रा ओ का करने का है। जिससे यह एक विश्वविद्यालय के रूप में प्रेषित हो जाए। यहां से अनेक प्रकार की प्रतिभाओं को सीखकर समाज के अंदर में राष्ट्र के लिए अपना योगदान प्रदान करती रहे। तो सभी का धन्यवाद आभार व्यक्त करते हुए आदरणीय अध्यक्ष आचार्य करण सिंह जी ने अपना उद्बोधन को विराम देते हुए ऋषि दयानन्द जी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर शांति पाठ और जय घोष के साथ इस कार्यवाही को संपादित कराया।इस अवसर पर बहत से गणमान्य लोग उपस्थित रहे श्री शीशपालजी, श्री अजयपाल जी, श्री राजवीर जी, श्री ऋषिपाल जी, श्री अनिल जी, मा ओमप्रकाश जी,मा अशोक कुमार जी ,श्री सतेन्द्रजी,श्री बालकराम आर्य जी,मा गिरवरसिहजी,श्री रणसिह जी तेडा,श्री राजेन्द्र सिह जी रठौडा,श्री रामपाल जी बडौत , श्री यशवीर आर्य जी आदर्शनगला आदि और भी बहुत लोग उपस्थित रहे ।

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