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उगता भारत न्यूज़

गार्गी कन्या गुरुकुल का आठ दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हुआ संपन्न

इगलास। ( विशेष संवाददाता ) श्रुति सौरभ धर्मार्थ न्यास द्वारा संचालित गार्गी कन्या गुरुकुल में आठ दिवसीय आर्य वीरांगना प्रशिक्षण शिविर के समापन का शुभारंभ वेद की पावन ऋचाओं से ऐश्वर्य की प्राप्ति की कामना के साथ हुआ। प्रातः 9 बजे राष्ट्रीय प्रार्थना के साथ शिविर समापन समारोह कार्यक्रम का शुभारंभ एम एल सी मानवेंद्र प्रताप , सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका आचार्या व्रतिका, स्वामी केवलानंद सरस्वती जी ने ध्वजारोहण कर किया।

संचालन का कार्यभार आदरणीय भूपेंद्र सिंह भ्राताश्री ने निरंतर संभाला। वीरांगनाओं द्वारा शिविर में सीखे गये नियुद्यम,भाला, लाठी, तलवार, सर्वांग सुंदर व्यायाम व गुरुकुल की स्थापना के आधार स्तंभ के स्तूपों आदि की प्रस्तुति दी गई जिसकी प्रशिक्षिका नर्मदा आर्या, रोहिणी आर्या वरेण्या आर्या रही। गुरुकुल की ब्रह्मचारिणियों द्वारा भी स्तूपों की प्रस्तुति दी गई। बौद्धिकाध्यक्ष आचार्य अरुण आर्यवीर जी द्वारा वैदिक सिद्धांतों के आधार पर वीरांगनाओं की मौखिक परीक्षा प्रस्तुति ली गई, जिसमें सभी ने पूर्ण उत्साह से उत्तर दिए। वीरांगनाओं ने ईश्वर, शिविर दिनचर्या आदि को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किये। माता कमलेश गर्ग जी द्वारा शिक्षा, संस्कृति एवं प्राचीन माताओं जैसे जीजाबाई आदि की शिक्षा दीक्षा को लेकर विचार रखे। पू.स्वामी केवलानंद सरस्वती जी द्वारा वीरांगनाओं को भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति, गुरुकुल शिक्षा आदि को लेकर जागरूक और प्रेरित किया गया। स्वामी सूर्यवेश जी द्वारा वीरांगनाओं को गुरुकुल शिक्षा और स्कूल शिक्षा में अंतर समझाया व गुरुकुलीय शिक्षा का महत्व बताकर सनातन संस्कृति की ओर प्रेरित किया गया। स्वामी वेदप्रकाश जी द्वारा बताया गया कि अधिकांश गुरुकुलों का संचालन दान पर ही चलता है और गुरुकुलों की शिक्षा ही समाज का आधार है अतः हमें इसको आगे लाने निरंतर सहयोग करना चाहिए। माताजी यशवाला शर्मा जी द्वारा गुरुकुल की ब्रह्मचारिणियों एवं शिविर में उपस्थित वीरांगनाओं को प्रोत्साहित किया और निरंतर गुरुकुल को सहयोग करने की इच्छा जताई एवं अनाथ असहाय बच्चियों की गुरुकुलीय शिक्षा का खर्च व्यय करने की भी इच्छा व्यक्त की।

आदरणीय मानवेन्द्र प्रताप गुरुजी एमएलसी द्वारा भारतीय प्राचीन संस्कृति का इतिहास अर्थात् भरत का देश अखंड भारत के बारे में एवं गुरुकुल शिक्षा, स्कूल शिक्षा आदि के बारे में वीरांगनाओं के समझ विचार प्रस्तुत किये। प्रधान संचालिका, सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की आचार्या व्रतिका आचार्या द्वारा प्रातः काल ध्यान संध्या एवं वैदिक संस्कृति की रक्षा, अनुशासन युक्त संस्कृति अर्थात् ऋषि-मुनियों की संस्कृति की ओर प्रेरित किया। गुरुकुल संचालिका डॉ मनु आर्या शिविर समापन समारोह में उपस्थित हुए सभी विद्वज्जन, संन्यस्तवृन्द, अभिभावकों आभार व्यक्त किया और सभी वीरांगनाओं को पुनः गुरुकुल महाविद्यालय में आमंत्रित किया। शिविर समापन समारोह में संरक्षक स्वामी चेतनदेव वैश्वानर जी, शिविर प्रधान भूपेंद्र सिंह जी धर्मपत्नी सहित, उमेश आर्य, स्वामी प्राणदेव जी, योगी जी, मुनि जी, श्री संजय कुमार, वरेण्या आर्या , शुभि आर्या, साधना आर्या, गायत्री आर्या, तितिक्षा आर्या आदि उपस्थित रहे।

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