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देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी की मनाई गई पुण्यतिथि : राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा का लिया गया संकल्प

पलवल। देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी आर्य समाज के नेता और कन्या गुरुकुल हसनपुर के संस्थापक स्वर्गीय महाशय मनफूलसिंह की 38 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भव्य समारोह के साथ पूर्णाहुति संपन्न हो गई। कन्या गुरुकुल भुसावर की ब्रह्मचारिणियों ने वेदपाठ किया और पलवल क्षेत्र की सैकड़ो प्रतिष्ठित महिला एवं पुरुषों ने आहुतियां प्रदान की। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय स्वामी श्रद्धानंद शोधपीठ के अध्यक्ष डॉ सत्यदेव निगमालंकार के ब्रह्मत्व में आयोजित महायज्ञ के समापन अवसर पर देश के अनेक प्रान्तों से प्रतिष्ठित आर्य नेता सम्मिलित हुए। इस अवसर पर राष्ट्र सुरक्षा और धर्म रक्षा का संकल्प लिया गया। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से पधारे अंतर्राष्ट्रीय आर्य नेता और आर्य जगत के भामाशाह ठाकुर विक्रम सिंह ने कहा कि समय की आवश्यकता है कि हम सारे हिंदू समाज को एक साथ लेकर चलें। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति डॉ रूप किशोर शास्त्री, प्रतिष्ठित विद्वान आचार्य विद्या मिश्र शास्त्री, आचार्य भगवानदेव पूर्व विधायक श्री दीपक मंगला, सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता एवं आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने भारत के स्वर्णिम इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हमको अपने इतिहास की गौरवपूर्ण परंपराओं और उनको स्थापित करने के लिए काम करने की आवश्यकता है। इस कार्य को करने के लिए आर्य समाज को ही आगे आना होगा।

भजनोपदेशक ओमप्रकाश फ्रंटियर, बहन स्वदेश आर्या कन्या गुरुकुल भुसावर राजस्थान से पधारी सुमन शास्त्री, सरस्वती आर्या कन्या गुरुकुल हसनपुर की छात्र एवं आचार्या ए बाल गुरुकुल की आचार्य महेंद्र शास्त्री श्री अफलासिंह, श्रीमती मंजू।श्री राधेलाल आर्य धतीर मेवात पुनहाना से पधारे आर्य नेता उमेश आर्य पलवल नगर की सभी आर्य समाजों के अधिकारी फरीदाबाद से लेकर ब्रजमंडल तक ग्रामीण क्षेत्र की आर्य समाजों के अधिकारी कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित रहे। सभी भक्तों ने स्वर्गीय मंगल सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनको सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। यह बात बहुत ही गौरव की है कि देश के स्वाधीनता आंदोलन में भारतीय समाज में प्रतिष्ठा योगदान दिया था। आर्य समाज के क्रांतिकारी आंदोलन को विस्मृत नहीं किया जा सकता। उसी का एक महत्वपूर्ण भाग स्वर्गीय मनुकूल सिंह थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री देवेंद्र आर्य एडवोकेट ने की । उन्होंने बृहदारण्यकोपनिषद के माध्यम से जीव और जीवात्मा की गति पर सुंदर विवेचना प्रस्तुत की। जबकि मंच संचालन हरिश्चंद्र शास्त्री ने किया।इस अवसर पर हरिश्चंद्र शास्त्री की ज्येष्ठ पुत्री पुत्री डॉक्टर उषा रावत द्वारा लिखित शोध ग्रंथ अर्थात पीएचडी स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के भाषिक एवं साहित्य के सरोकार नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।।डा धर्म प्रकाश आर्य उनकी पत्नी श्रीमती शीला देवी और सभी बहनों भाइयों ने उपस्थित होकर यज्ञ में आहुतियां प्रदान की।

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