नोबेल पीस प्राइज विनर हेनरी किसिंजर ‘सेंचुरी’ बनाकर विदा जिसके लिए इंदिरा गाँधी थीं ‘कुतिया’ और भारतीय ‘हरामी’

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                                     इंदिरा गाँधी के साथ हेनरी किसिंजर (चित्र साभार: Bangla Tribune)

हेनरी किसिंजर की मृत्यु हो गई है। वे 100 साल के थे। वह साल 1973 से 1977 के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री और 1969 से 1975 तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे। नोबल पीस प्राइज विनर किसिंजर को भले कई लोग ‘महान डिप्लोमेट’ मानते हैं, लेकिन वे अपनी कूटनीति से भारत पर प्रभाव नहीं डाल पाए। इस बौखलाहट में उन्होंने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और भारतीयों के लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया था। 2005 में उन्होंने इसके लिए माफी भी माँगी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जेराल्ड फोर्ड के कार्यकाल में किसिंजर विदेश मंत्री रहे थे। उन्हें अमेरिका के विदेश संबंधों में बड़ा नाम माना जाता है। 1973 में इजरायल और अरब राष्ट्रों के बीच योम किप्पुर युद्ध, वियतनाम युद्ध आदि में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका और चीन को करीब लाने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है। उनके लगातार एक देश से दूसरे देश जाकर कूटनीति करने के स्टाइल को ‘शटल डिप्लोमेसी’ का नाम दिया गया था।

किसिंजर की मृत्यु कनेक्टीकट स्थित उनके घर पर 29 नवंबर 2023 को हुई। उनकी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है। उनकी मौत को लेकर पूरी दुनिया से शोक सन्देश भेजे जा रहे हैं। कुछ जगह से उनकी मौत पर विपरीत प्रतिक्रिया भी आई हैं। किसिंजर, अमेरिका में काफी सम्माननीय थे. लेकिन भारत में उनको इतने अनुकूल रवैये से नहीं देखा जाता है। उनके भारतीय विरोधी बयान और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के लिए अभद्र भाषा इस्तेमाल करने को लेकर उनकी भारत में काफी आलोचना होती रही है।

किसिंजर ने भारतीयों और प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को लेकर क्या कहा?
नवम्बर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी पाकिस्तान (जो कि बाद में बांग्लादेश बना) को लेकर तल्खी बढ़ रही थी। इस दौरान भारत को जहाँ सोवियत संघ का साथ मिला हुआ था तो वहीं पाकिस्तान के लिए अमेरिका पूरा जोर लगा रहा था।
किसिंजर और निक्सन इस बात से खफा थे कि भारत मुक्ति वाहिनी (बांग्लादेश को आजाद करवाने के लिए बनाई गई गुरिल्ला फ़ौज) को ट्रेनिंग और अन्य सहायता दे रहा है। वह भारत पर दबाव बनाना चाहते थे कि वह बांग्लादेश से आ रहे शरणार्थियों को चुपचाप ले और पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी एक्शन ना ले।
इसी समबन्ध में इंदिरा गाँधी अमेरिका से बातचीत करने के लिए 4 और 5 नवम्बर 1971 को अमेरिका के दौरे पर गईं। उनके दौरे के दूसरे दिन तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन और सुरक्षा सलाहकार किसिंजर बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत का ब्यौरा अमेरिका के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है।
इसी बातचीत के दौरान निक्सन ने कहा, “यही कारण है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है।” इसके जवाब में किसिंजर कहते हैं, “कुछ भी हो भारतीय तो हरामी हैं ही।” इसके कुछ देर बाद बातचीत में किसिंजर कहते हैं, “यह बात जरूर है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है, लेकिन हम जो चाहते थे वह हमें मिल गया।”

इसके बाद फिर से एक बार किसिंजर यही बात दोहराते हैं। वह कहते हैं, “हालाँकि, वो एक कुतिया है, लेकिन राष्ट्रपति जी आपको यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए कि अपनी मर्जी का काम हो गया।” आगे वह कहते हैं, “वह एक कुतिया जरूर है, लेकिन मैं उसके साथ आज नरमी बरतूँगा।”

इंडिया फर्स्ट से साभार

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