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आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी
ऋषिकेश उत्तरखण्ड के देहरादून ज़िले में देहरादून के निकट एक नगर है। यह गंगा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है और हिन्दुओं का एक तीर्थस्थल है, जहाँ प्राचीन सन्त उच्च ज्ञानान्वेषण में यहाँ ध्यान करते थे।नदी के किनारे कई मन्दिर और आश्रम बने हुए हैं। इसे “गढ़वाल हिमालय का प्रवेश द्वार” और “विश्व की योगनगरी” के रूप में जाना जाता है।
यहां से टिहरी बाँध केवल 86 किमी दूर है और उत्तरकाशी, एक लोकप्रिय योग स्थल है, जो गंगोत्री के मार्ग में 170 किमी की पर्वतोर्ध्व पर स्थित है। हृषीकेश छोटा चार धाम तीर्थ स्थानों जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री और हरसिल, चोपता, औली जैसे हिमालयी पर्यटन स्थलों की यात्रा हेतु प्रारम्भिक बिन्दु है और शिविर वास और भव्य हिमालय के मनोरम दृश्यों हेतु डोडी ताल, दयारा बुग्याल, केदार कण्ठ, हर की दून घाटी जैसे प्रसिद्ध ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन पदयात्रा गन्तव्य हैं।
इतिहास
ऋषिकेश सतयुग से ही ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है. यहां स्थित प्राचीन श्री भरत मंदिर में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी. भगवान नारायण ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे।ऋषिकेश को “ स्वर्ग की जगह” के नाम से भी जाना जाता है।चंद्रभागा और गंगा के संगम पर हरिद्वार से 24 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित एक आध्यात्मिक शहर है। हृषिकेश मूल शब्द “हृषि” और “ईश” मिलकर “हृषि+ईश, हृषिकेश” बनाते हैं; हृषिक” का अर्थ है “इंद्रियाँ” और “ईश” का अर्थ है “स्वामी” या “भगवान”। इसलिए इस शब्द का अर्थ है जिसने महारत हासिल कर ली है। रैभ्य ऋषि ने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त की और भगवान विष्णु को प्राप्त किया था। इसलिए इस स्थान को हृषिकेश के नाम से जाना जाता है। यह माना जाता है कि “ऋषिकेश” के नाम से भगवान रैभ्य ऋषि द्वारा कठिन तपस्या से प्रकट हुए थे और अब से इस जगह का नाम व्युत्पन्न हुआ है।
-: ऋषिकेश के प्रमुख आकर्षण :-
लक्ष्मण झूला
गंगा नदी के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ता यह झूला नगर की विशिष्ट की पहचान है। इसे विकम संवत 1996 में बनवाया गया था। कहा जाता है कि गंगा नदी को पार करने के लिए लक्ष्मण ने इस स्थान पर जूट का झूला बनवाया था। झूले के बीच में पहुँचने पर वह हिलता हुआ प्रतीत होता है। 450 फीट लम्बे इस झूले के समीप ही लक्ष्मण और रघुनाथ मन्दिर हैं। झूले पर खड़े होकर आसपास के खूबसूरत नजारों का आनन्द लिया जा सकता है। लक्ष्मण झूला के समान राम झूला भी नजदीक ही स्थित है। यह झूला शिवानन्द और स्वर्ग आश्रम के बीच बना है। इसलिए इसे शिवानन्द झूला के नाम से भी जाना जाता है। ऋषिकेश मैं गंगाजी के किनारे की रेेत बड़ी ही नर्म और मुलायम है, इस पर बैठने से यह माँ की गोद जैसी स्नेहमयी और ममतापूर्ण लगती है, यहाँ बैठकर दर्शन करने मात्र से हृदय मैं असीम शान्ति और रामत्व का उदय होने लगता है।
त्रिवेणी घाट
गढ़वाल, उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसे ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है।
यह प्रमुख स्नानागार घाट है जहाँ प्रात:काल में अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं।कहा जाता है कि यह हिन्दू धर्म की तीन प्रमुख नदियों गंगा,चंद्रभागा और अदृश्य सरस्वती के संगम पर बसा हुआ है। त्रिवेणी घाट से ही गंगा नदी दायीं ओर मुड़ जाती है।त्रिवेणी घाट के एक छोर पर शिवजी की जटा से निकलती गंगा की मनोहर प्रतिमा है तो दूसरी ओर अर्जुन को गीता ज्ञान देते हुए श्री कृष्ण की मनोहारी विशाल मूर्ति और एक विशाल गंगा माता का मन्दिर हैं।घाट पर चलते हुए जब दूसरी ओर की सीढ़ियाँ उतरते हैं तब यहाँ से गंगा के सुंदर रूप के दर्शन होते हैं।
शाम को त्रिवेणी घाट पर भव्य आरती होती है और गंगा में दीप छोड़े जाते हैं, उस समय घाट पर काफ़ी भीड़ होती है।ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट अपने आप में विशेष महत्त्व रखता है.यहां इस स्थान पर देश-विदेश से श्रद्धालु स्नान करने और दान, पुण्य, कर्मकांड करने आते हैं. इस स्थान की पौराणिक मान्यता है कि यहां स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस स्थान पर पितरों का पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही श्राद्ध तर्पण करने से उन्हें स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इस पवित्र स्थान का दौरा किया था। इस तीर्थ घाट पर भक्तगण अपने पितरों की शांति के लिए पिंड श्राद्ध की पूजा का पाठ भी कराते हैं। पास में ही है गंगा माता का मंदिर भी स्थित है। बाल्मीकि भगवान का एक आधुनिक मंदिर भी यहां स्थित है।
गंगेश्वर महादेव मन्दिर
गंगेश्वर घाट और मंदिर,आस्था पथ , 72 सीढ़ी, माया कुंड वा एम्स के पास ऋषिकेश में स्थित है। एम्स के पास बैराज से थोड़ा आगे की ओर बढ़ेंगे तो श्री गंगेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। मंदिर परिसर से अविरल गंगा के दर्शन और घने जंगलों वाले पहाड़ों के दर्शन का आनंद मिलता है। मंदिर परिसर से अविरल गंगा के दर्शन और घने जंगलों वाले पहाड़ों के दर्शन का आनंद मिलता है।
ऋषिकेश में लक्ष्मण मंदिर –
तपोवन, ऋषिकेश में लक्ष्मण मंदिर की जड़ें रामायण के समय से जुडी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मण और राम को यहां ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। माना जाता है कि जूट पुल जिसे अब लक्ष्मण झूला कहा जाता है, का निर्माण राम और लक्ष्मण ने किया था। इस मंदिर तक स्थानीय परिवहन जैसे कैब या ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। इस मंदिर को सुशोभित करने वाली प्राचीन मूर्तियों और चित्रों को देखने के लिए इस मंदिर में जरूर जाएं।वर्तमान समय में इसे भव्य बनाया जा रहा है।
शत्रुघ्न मंदिर
शत्रुघ्न मंदिर मुनि-की-रेती, शिवानंद नगर, ऋषभ गढ़वाल में स्थित है। जो लोग विश्व में शांति और शांति चाहते हैं, उन्हें शत्रुघ्न मंदिर की ओर अवश्य जाना चाहिए, जो तीर्थों के सबसे महान मंदिरों में से एक है। लोग मंदिर के अंदर आराम और योगाभ्यास भी कर सकते हैं। इस मंदिर का निर्माण केरल के त्रिशूर जिले में मौजूद मंदिर के साथ-साथ भगवान राम के छोटे भाई के रूप में किया गया है।
स्वर्ग आश्रम
स्वामी विशुद्धानन्द द्वारा स्थापित यह आश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन आश्रम है। स्वामी जी को ‘काली कमली वाले’ नाम से भी जाना जाता था। इस स्थान पर बहुत से सुन्दर मन्दिर बने हुए हैं। यहाँ खाने पीने के अनेक रस्तरां हैं जहाँ केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है। आश्रम की आसपास हस्तशिल्प के सामान की बहुत सी दुकानें हैं।
नीलकण्ठ महादेव मन्दिर
भगवान शिव को समर्पित, नीलकंठ महादेव मंदिर कोटद्वार पौडी रोड पर स्थित है । अपने स्थानऔर प्राथमिकता के कारण, यह मंदिर देवताओं के अन्य शिव चित्रों की तुलना में छोटा दिखता है । मंदिर के किसी को भी यात्रा के दौरान सकारात्मक ऊर्जा महसूस हो सकती है। इसके अलावा इस मंदिर की यात्रा के दौरान झरने और प्रकृति के अन्य चमत्कार भी देख सकते हैं।यह मंदिर स्वर्ग आश्रम से लगभग 7 किमी दूर है। ऐसा कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव ने पौराणिक ‘अमृत मंथन’ के बाद समुद्र मंथन से निकले विष को पिया था। इस विष की वजह से उनका गला नीला पड़ गया था और यही वजह है कि इस मंदिर का नाम नीलकंठ महादेव रखा गया। तीर्थयात्री इस मंदिर में गंगा जल चढ़ाते हैं। लगभग 5,500 फीट की ऊँचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकण्ठ महादेव मन्दिर स्थित है। मन्दिर परिसर में पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मन्दिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।
त्र्यंबकेश्वर तेरह मंजिल मंदिर
लक्ष्मण झूला के पास इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव के निवास के रूप में किया गया था, और यह विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर तेरह मंदिर भगवान शिव के कई ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इस त्रयंबकेश्वर मंदिर के अंदर की दीवारों और अलमारियों पर जटिल डिजाइन और वास्तुशिल्प प्रतिभा को देख सकते हैं। 400 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाने वाला यह मंदिर देवताओं में से एक है । यहां के प्रमुख देवता भगवान शिव हैं। यह मंदिर ऋषिकेश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है, जो लक्ष्मण झूला से दिखाई देता है। अपनी आकर्षक वास्तुकला के लिए लोकप्रिय इस मंदिर की 13वीं मंजिल से आप मनोरम दृश्य भी देख सकते हैं।
भरत मन्दिर
12 वीं शताब्दी में आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित, मंदिर में भगवान विष्णु को सालिग्राम के एक टुकड़े से उकेरा गया है। भगवान राम के छोटे भाई भरत को समर्पित यह मन्दिर त्रिवेणी घाट के निकट ओल्ड टाउन में स्थित है। मन्दिर का मूल रूप 1398 में तैमूर आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। मन्दिर की बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों को उस हमले के बाद आज तक संरक्षित रखा गया है। मन्दिर के अन्दरूनी गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा एकल शालीग्राम पत्थर पर उकेरी गई है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रखा गया श्री यन्त्र भी यहाँ देखा जा सकता है। मंदिर की वास्तुकला और आंतरिक सज्जा का विवरण केदार खंड के प्राचीन अभिलेखों में मिलता है। तैमूर द्वारा नष्ट किए गए मूल मंदिर के खंडहरों का फिर से पुनर्निर्माण किया गया था। उत्खनन से इस स्थल से कई पुरानी मूर्तियाँ, प्राचीन बर्तन और सिक्के प्राप्त हुए हैं।
कुंजापुरी देवी मंदिर
मुख्य स्टेशन से 25 किमी की दूरी पर स्थित इस मंदिर तक बस या कार से एक घंटे में पहुंच सकते हैं। कोई भी व्यक्ति केवल 2 घंटों के अंदर मंदिर का भ्रमण पूरा कर सकता है। नवरात्रि और दशहरे के समय, मंदिर हमेशा के लिए संजोने दृश्य पेश करता है क्योंकि पूरी जगह रोशनी से जगमगा उठता है और सभी लोग भव्य उत्सव के लिए एक साथ आते हैं। कुंजापुरी मंदिर की देवी सती, शिव की पहली पत्नी थी और देवी पार्वती के अवतार को समर्पित है। यह शक्ति पीठों में से एक है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव उनके शव के साथ पूरे ब्रह्मांड की यात्रा कर रहे थे, तो सती का एक अंग इस स्थान पर गिरा था।
रघुनाथ मंदिर – :
यह प्रगति विहार,त्रिवेणी घाट पर स्थित, जहां हर शाम गंगा आरती होती है, ऋषिकेश में रघुनाथ मंदिर हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। रघुनाथ मंदिर भगवान राम और देवी सीता को समर्पित है। इस मंदिर के पास ही एक पवित्र तालाब ऋषिकुंड भी है। ऋषि कुंड, एक छोटा सा मठ भी रघुनाथ मंदिर के सामने स्थित है । कोई भी मंदिर के आसपास के स्थानीय बाजार मे कुछ समग्र मूर्तियां, तैयार किए गए आभूषण और बहुत कुछ खरीद सकता है।
ऋषिकेश में हनुमान मंदिर –
यह मंदिर पुरषोत्तम फॉर्म (दिल्ली फॉर्म), खदरी रोड श्यामपुर, ऋषिकेश में स्थित है। यह मंदिर उन लोगों द्वारा सबसे अधिक देखे जाने वाले चित्रों में से एक माना जाता है जो कि तीर्थनगरी की यात्रा पर आते हैं। हर साल यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है। यहां भारी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं और उनके लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है। हनुमान मंदिर को ऋषिकेश में अधिक लोकप्रिय मंदिरों में से एक माना जाता है। हनुमान मंदिर में मंगलवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है, साथ ही आमतौर पर बहुत व्यस्त दिन भी होता है, क्योंकि यहां इस दिन कई अनुष्ठान होते हैं। यहां होने वाली गंगा आरती भी एक प्रमुख आकर्षण है।
शत्रुघ्न मंदिर
शत्रुघ्न मंदिर महाकाव्य रामायण के शत्रुघ्न को समर्पित है। ऋषिकेश में इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने ऋषिकेश की यात्रा के दौरान किया था। यह प्राचीन मंदिर राम झूला के पास स्थित है।
भूतनाथ मंदिर –
ऋषिकेश के स्वर्ग आश्रम में यह अलग-थलग मंदिर तीन तरफ से राजाजी नेशनल पार्क और दूसरी तरफ गंगा नदी के किनारे ऋषिकेश शहर से घिरा हुआ है। मंदिर के ऊपर से शहर का शानदार दृश्य देख सकते हैं। यह वह स्थान है जहां भगवान शिव ने उस समय विश्राम किया था जब उन्होंने अपनी पत्नी सती से विवाह करने की योजना बनाई थी। यह आम तौर पर प्रकृति के बीच शांति और एकांत से भरा स्थान होगा क्योंकि अभी तक यात्रियों द्वारा इसकी पूरी क्षमता से इसकी खोज नहीं की गई है। दोस्तों और परिवार के साथ घूमने के लिए एक आदर्श स्थान, एक आदर्श दिन की योजना बनाने के लिए यह देवताओं के सबसे महान मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है क्योंकि उन्हें देवी सती की बारात के दौरान यहीं विश्राम किया था।
कैलाश निकेतन मन्दिर
लक्ष्मण झूले को पार करते ही कैलाश निकेतन मन्दिर है। 12 खण्डों में बना यह विशाल मंदिर ऋषिकेश के अन्य मन्दिरों से भिन्न है। इस मंदिर में सभी देवी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं।
वशिष्ठ गुफा मन्दिर
ऋषिकेश से 22 किलोमीटर की दूरी पर 3,000 साल पुरानी वशिष्ठ गुफा बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर स्थित है। इस स्थान पर बहुत से साधुओं विश्राम और ध्यान लगाए देखे जा सकते हैं। कहा जाता है यह स्थान भगवान राम और बहुत से राजाओं के पुरोहित वशिष्ठ का निवास स्थल था। वशिष्ठ गुफा में साधुओं को ध्यानमग्न मुद्रा में देखा जा सकता है। गुफा के भीतर एक शिवलिंग भी स्थापित है। यह जगह पर्यटन के लिये बहुत मशहूर है।
गीता भवन
गंगापार , स्वर्ग आश्रम क्षेत्र में यह बहुत प्रसिद्ध मन्दिर है।
राम झूला पार करते ही गीता भवन है जिसे विकम संवत 2007 में श्री जयदयाल गोयन्दका जी के द्वारा बनवाया गया था। यह अपनी दर्शनीय दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामायण और महाभारत के चित्रों से सजी दीवारें इस स्थान को आकर्षण बनाती हैं। यहां एक आयुर्वेदिक डिस्पेन्सरी और गीताप्रेस गोरखपुर की एक शाखा भी है। प्रवचन और कीर्तन मन्दिर की नियमित क्रियाएँ हैं। शाम को यहां भक्ति संगीत की आनन्द लिया जा सकता है। तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए यहाँ सैकड़ों कमरे हैं।
यह तीर्थस्थल में दर्शन का दृश्य सबसे पुराना तीर्थस्थल में से एक माना जाता है । इस मंदिर की क़ीमती प्रसिद्ध महाकाव्यों, रामायण और महाभारत के सुंदर चित्रण से अलंकृत हैं। प्रसिद्ध गंगा आरती के उत्साह का अनुभव लेने के लिए लोग यहां आते हैं।
मोहनचट्टी
ऋषिकेश से नीलकण्ठ मार्ग के बीच यह स्थान आता है जिसका नाम है फूलचट्टी , मोहनचट्टी , यह स्थान बहुत ही शान्त वातावरण का है यहाँ चारों और सुन्दर वादियाँ है , नीलकण्ठ मार्ग पर मोहनचट्टी आकर्षण का केंद्र बनता है ।
वीरभद्र मंदिर
ऋषिकेश के आईडीपीएल कॉलोनी वीरभद्र क्षेत्र में स्थित है. मान्यता है की इस मंदिर में भगवान शिव ने का क्रोध शांत करवाया था और तभी से वीरभद्र शिवलिंग के रूप में यहां विराजमान है, और तभी से यह मंदिर वीरभद्र मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर लगभग 1300 वर्ष पुराना है। हरिद्वार में दक्ष प्रजापति का यज्ञ चल रहा था जिसमे सभी देवी देवता आमंत्रित थे, पर राजा दक्ष ने अपनी बेटी सती और दामाद भगवान शिव को आमंत्रण नही दिया. भगवान के मना करने के बाद भी माता सती उस यज्ञ में चली गई. माता सती का मानना था की वह उन्हीं का घर है तो आमंत्रण कैसा. सती पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां सभी देवी देवता आमंत्रित थे और यज्ञ चल रहा था, यह देख मां सती राजा दक्ष से पूछ बैठी की उन्हें आमंत्रण क्यों नहीं दिया, यह सुन राजा दक्ष ने भगवान शिव के लिए कई अपशब्दो का प्रयोग किया जो सती सुन नहीं पाई और हवन कुंड की अग्नि में खुद की आहुति दे दी .जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया. उस जटा के पूर्वभाग से महा भंयकर वीरभद्र प्रगट हुए. भगवान शिव के वीरभद्र अवतार है ।
शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया. फिर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ. रास्ते में जो भी दिखता वो उसका गला काट देते. जब वीरभद्र ऋषिकेश पहुंचे, तो वहां भगवान शिव ने उन्हें गले लगा लिया, जिसके बाद वो शांत हुए और वहीं शिवलिंग के रूप में विराजमान हो गए. तभी से इस क्षेत्र को वीरभद्र क्षेत्र और इस मंदिर को वीरभद्र मंदिर के नाम से जाना जाता है।
परमार्थ निकेतन
यह मेन मार्केट रोड के पास, रामझूला स्वर्ग आश्रम ऋषिकेश में हिमालय की गोद में गंगा के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1942 में सन्त शुकदेवानन्द सरस्वती जी महाराज ने की थी। सन् 1986 स्वामी चिदानन्द सरस्वती इसके अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक मुखिया हैं । इसमें 1000 से भी अधिक कक्ष हैं। आश्रम में प्रतिदिन प्रभात की सामूहिक पूजा, योग एवं ध्यान, सत्संग, व्याख्यान, कीर्तन, सूर्यास्त के समय गंगा-आरती आदि होते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद चिकित्सा एवं आयुर्वेद प्रशिक्षण आदि भी दिए जाते हैं। आश्रम में भगवान शिव की 14 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित है। आश्रम के प्रांगण में ‘कल्पवृक्ष’ भी है जिसे ‘हिमालय वाहिनी’ के विजयपाल बघेल ने रोपा था।
स्वर्गाश्रम
“स्वर्गाश्रम” शब्द प्राथमिक शब्द “स्वर्ग” से बना है जिसका अर्थ “स्वर्ग” है। आश्रम का निर्माण स्वामी अविनाशानंद की याद में किया गया था, जो संत काली कमली वाले (काले कंबल वाले संत) के नाम से जाने गए थे। यह मुख्य रूप से जातीय स्पर्श के कारण विदेशी फिल्मों के बीच बहुत लोकप्रिय स्थान है। यह गंगापार, राम झूला पर स्थित है। स्वर्ग आश्रम के अंदर बहुत सारे आश्रम और मंदिर हैं। यह स्थान अपने जातीय संपर्क के कारण विदेशी दृश्य के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है। स्वर्ग आश्रम परिसर के भीतर जप, ध्यान, आरती जैसे कई धार्मिक धार्मिक स्थल हैं। इस क्षेत्र को “काली कमली वाला क्षेत्र” के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थान मानव मन और आत्मा के लिए स्वर्ग के अलावा और कोई नहीं है, शांति, समृद्धि और शांत वातावरण के साथ यह स्थान मानव मन और आत्मा को फिर से जीवंत कर देता है।
स्वर्गाश्रम माँ गंगा और शिवालिक शिखरों के बीच स्थित है, स्वर्गाश्रम तक पहुँचने का मुख्य मार्ग रामझूला या जानकी सेतु है। यह राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों से घिरा हुआ है और इसके चारों ओर मनमोहक हरियाली है। अद्भुत स्थान के अलावा स्वर्गाश्रम 100 (सौ) से अधिक साधुओं को कुटिया प्रदान करता है, जहां वे ध्यान करते हैं और अपना जीवन शैली बनाते हैं। पर्यटन मूल रूप से इस स्थान पर ‘योग पर्यटन’ और ‘आयुर्वेदिक औषधियों के अध्ययन’ के लिए आएं। यह उन सभी लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो प्रकृति के साथ बातचीत करना पसंद करते हैं और आध्यात्मिक रूप से चाहते हैं।
प्राचीन हनुमान मंदिर
ऋषिकेश के राम झूला पर स्थित यह प्राचीन हनुमान मंदिर
स्थित है।तीर्थ नगरी ऋषिकेश में पूजा पाठ की काफ़ी मान्यता है. यहां के घाट व मंदिर मुख्य आकर्षण का केंद्र है. देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए आते है, और साथ ही भगवान के दरबार में अपनी इच्छाओं की पूर्ती की कामना करते है. ऐसा ही एक मान्यता प्राप्त मंदिर है ऋषिकेश का श्री प्राचीन हनुमान मंदिर, इस मंदिर में सभी भक्तगण अपनी इच्छाएं लेकर भगवान के दरबार में आते हैं और इच्छा पूरी होने पर यहां नारियल या चुनरी श्रद्धा अनुसार चढ़ाते है. इस मंदिर की एक कथा काफी प्रचलित है, मान्यता है की भगवान हनुमान ने ऋषि मणि राम दास जी के तप से प्रसन्न होकर यहां उन्हें दर्शन दिए थे.
राम झूला पर स्थित यह प्राचीन हनुमान मंदिर काफी प्रसिद्ध मंदिर है. अयोध्या के महान संत ऋषि मणि राम दास जी ने इस मंदिर में घोर तप किया, उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान ने उन्हें यहां दर्शन दिए थे। महंथ नृत्य गोपाल दास इसके मुखिया हैं। वर्तमान में राम कुमार दास इस मंदिर की देखभाल करते हैं।
अलोहा ऑन द गंगा
ऋषिकेश में यह उत्कृष्ट रिसॉर्ट ‘अलोहा ऑन द गंगा’, लक्ष्मण झूला के करीब गंगा नदी के तट पर स्थित है। बहुत शांत और शांत वातावरण. जंगल की पहाड़ियों से घिरी तेज़ बहती गंगा पर रिज़ॉर्ट की स्थापना ध्यान और मन के विस्तार के लिए अनुकूल है। शाम के समय, घाटी में हवा चलती है, जिससे मंदिर की घंटियाँ बजने लगती हैं और साधु, तीर्थयात्री और पर्यटक रात्रिकालीन गंगा आरती की तैयारी करते हैं। अलोहा ऑन द गंगा, अपने परिवेश के आकर्षण से आपको बेदम कर देगा, बल्कि यह आपको शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के आराम का अनुभव करने और आपके रोजमर्रा के जीवन में शांति और व्यक्तिगत स्थान के एक पल के महत्व को महसूस करने में ज़िंदगी को सक्षम बनाता है।
तपोवन ऋषिकेश
तपोवन का अर्थ एक ऐसा जंगल है जहाँ आध्यात्मिक अभ्यास किया जाता है। इस स्थान का नाम तपोवन महाराज के नाम पर 19वीं शताब्दी में उनकी यात्रा के दौरान इस स्थान का उल्लेख किया गया था। यह उत्तराखंड में गंगा के प्राथमिक स्रोतों में से एक गंगोत्री ग्लेशियर के ऊपर का क्षेत्र है। शिवलिंग शिखर के तल पर, लगभग 4,463 मीटर (14640 फीट) की ऊंचाई पर एक बंजर क्षेत्र, गुफाओं, झोपड़ियों आदि में रहने वाले कई साधुओं का मौसमी घर है। यहां संपूर्ण शांति रहती है। सबके मध्य मैत्री का संबंध होता है। कहीं कोई वैर, शत्रुता अथवा नकारात्मक भाव दृष्टिगत नहीं होता। हर किसी के हृदय में कोमलता और प्रेम का संचार होता है। तपोवन क्षेत्र शिवलिंग शिखर, भागीरथी शिखर आदि सहित कई पर्वतारोहण अभियानों के लिए आधार शिविर है। तपोवन क्षेत्र घास के मैदानों, झरनों और फूलों वाले पौधों से भरा हुआ है और घास के मैदानों को भारत में सबसे अधिक ऊंचाई वाले घास के मैदानों में से एक माना जाता है।यह शांतिपूर्ण और खूबसूरत जगह। विशेष रूप से तपोवन क्षेत्र सुंदर और शांतिपूर्ण है, लक्ष्मण झूला और राम झूला दोनों ही शानदार हैं और शांति से बहती हुई सर्वशक्तिमान गंगा का एक शानदार दृश्य और अनुभव देते हैं।
बीटल्स आश्रम
यह स्वर्ग आश्रम ऋषिकेश चौरा कुटिया के नाम से भी जाना जाता है। यह हिमालय की तलहटी में, ऋषि के मुनि की रेती क्षेत्र के सामने, गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित है । 1960 और 1970 के दशक के दौरान, अंतर्राष्ट्रीय ध्यान अकादमी के रूप में, यह महर्षि महेश योगी के छात्रों के लिए प्रशिक्षण केंद्र था , जो कि ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन टेक्नोलॉजी की तैयारी की थी। आश्रम ने फरवरी अप्रैल और 1968 के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया जब अंग्रेजी रॉक बैंड बीटल्स ने डोनोवन , मिया फैरो और माइक लव जैसे प्रसिद्ध कलाकारों के साथ वहां ध्यान का अध्ययन किया । इस साइट को 1990 के दशक में छोड़ दिया गया था और 2003 में इसे स्थानीय वनिकी विभाग द्वारा वापस ले लिया गया था, जिसके बाद यह बीटल्स के प्रशंसक के रूप में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया। प्रकृति और जंगल ख़त्म हो गए, इस साइट को आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2015 में जनता के लिए खोल दिया गया था। अब इसे बीटल्स आश्रम के रूप में जाना जाता है ।
महर्षि महेश योगी आश्रम
प्रसिद्ध महर्षि महेश योगी ने भावातीत ध्यान आंदोलन शुरू किया था। इसे 1997 में छोड़ दिया गया था, लेकिन अब इसे वन विभाग के नियंत्रण में ले लिया गया है। 1968 में, जब प्रसिद्ध रॉक बैंड, ‘द बीटल्स’ यहां रुका, तो आश्रम प्रसिद्धि में बढ़ गया और उसने ऋषिकेश को वैश्विक मानचित्र पर ला दिया। अंततः यह जीर्ण-शीर्ण हो गया, लेकिन आज भी, काई और घास के नीचे, प्रभावशाली शैली की इमारतें, ध्यान झोपड़ियाँ और व्याख्यान कक्ष अभी भी देखे जा सकते हैं, जिनमें महर्षि का घर और वह स्थान भी शामिल है जहाँ बीटल्स रुके थे।
ऋषिकेश काफी समय लेकर आकर विविध आकर्षणों को आत्मसात कर बहुत कुछ आनंद और शांति का अनुभव प्राप्त किया जा सकता है ।

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