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इंटरनेट की क्षेत्र में भारत बनेगा नया खिलाड़ी

कमलेश पांडे

उल्लेखनीय है कि 85 करोड़ भारतीय इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जिनके 2025 तक 120 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में उनके निजता को खतरा पहुंचाने और सुरक्षा के डर को लेकर सरकार सतर्क है।

देश-दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते प्रयोग से उतपन्न होने वाली कतिपय व्यक्तिगत और सांस्थानिक चुनौतियों से जुझने के लिए केंद्र सरकार अब सतर्क हो चुकी है। वह इस बारे में शीघ्र ही समुचित नियामक बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि एआई से जुड़ी दो बड़ी चुनौतियों- निजता को खतरा और सुरक्षा के डर का कुशलता पूर्वक सामना किया जा सके।

केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित करने के लिए कुछ खास नियम कायदे बनाने की पहल की है। इस बारे में बताते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि सरकार जल्द ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के नियंत्रित इस्तेमाल को लेकर नए नियम लाएगी, जिससे सरकार एआई को रेगुलेट कर सकेगी।

उन्होंने कहा, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाएगी कि यह डिजिटल नागरिकों को नुकसान न पहुंचाए। इस हेतु डिजिटल इंडिया बिल पर हितधारकों के साथ विचार विमर्श इसी माह यानी जून 2023 में शुरू होगा। वहीं, नया पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल भी जल्द ही संसद में पेश होगा। यानी शीतकालीन सत्र में इसके पेश होने के आसार प्रबल हैं।

केंद्रीय राज्यमंत्री ने ठीक ही कहा है कि इंटरनेट पर विषाक्तता और अपराधों में काफी वृद्धि हुई है। लेकिन सरकार डिजिटल नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को सफल नहीं होने देगी। वहीं, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल एआई से नौकरियों पर कोई खतरा नहीं है। एआई कामकाज को बेहतर बनाने के लिए है, पर ऐसी स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं है जहां तर्क और बुद्धिमत्ता की आवश्यकता हो।

उल्लेखनीय है कि 85 करोड़ भारतीय इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जिनके 2025 तक 120 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में उनके निजता को खतरा पहुंचाने और सुरक्षा के डर को लेकर सरकार सतर्क है। इस बारे में वह अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के नियम-कानून पर भी गौर कर रही है, ताकि भारतीय नियम-कानूनों में कोई कमी नहीं रह जाए।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पूर्व बग के कारण चैटजीपीटी की सर्च हिस्ट्री लीक हुई थी, जिसे निजता को खतरा के रूप में लिया जा रहा है और समझा जाता है कि ऐसा खतरा आगे भी बना रहेगा। वहीं, एआई के जानकार बताते हैं कि अभी एआई को दी जाने वाली कमांड फिक्स हैं, लेकिन आगे मानव रहित एआई आधारित रक्षा उपकरणों में गड़बड़ी हुई तो यह नई चुनौती होगी, जिससे पार पाने में यदि थोड़ी सी भी मुश्किल आई तो सुरक्षा का डर बना रहेगा। यही वजह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर सरकार गम्भीर हो गई है।

वहीं, एआई के दृष्टिगत जहां अमेरिका में मौजूदा कानूनों का उपयोग किया जा रहा है तथा इसे और भी सख्त बनाने की योजना है। वहीं, चीन में एआई के बारे में मसौदा तैयार हो रहा है। उसने एआई मॉडल निर्माण में उद्यमों का समर्थन करने की बात कही है। इधर, ब्रिटेन में एआई प्राधिकरण नया दिशानिर्देश तैयार करेगा और उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों पर इसके प्रभाव की जल्द जांच करेगा। उधर, इजरायल ने एआई नीति पर मसौदा प्रकाशित किया और विभागों से जानकारी मांगी गई है। वहीं, इटली एआई प्लेटफॉर्म की समीक्षा करने और विशेषज्ञ नियुक्ति की योजना बनाई गई है।

एक अध्ययन से पता चला है कि एआई पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। जिसके चलते वर्ष 2022 की तुलना में साल 2023 में दुनियाभर में एआई क्षेत्र पर 26.9 फीसदी अधिक खर्च होगा। अनुमान है कि वर्ष 2023 तक एआई क्षेत्र में कुल निवेश होने वाली रकम 300 अरब डॉलर के पार हो जाएगी। क्योंकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए एआई को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। यही वजह है कि अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन और कनाडा के बाद भारत इस क्षेत्र में तेजी से तरक्की कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया में वह एक नया केंद्र बनने की राह पर अग्रसर है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाने में एआई की क्षमता वास्तव में विशाल है, वह भी खासकर युवाओं के बीच। इसलिए हम उन सभी सहयोग का स्वागत करते हैं, जो हमारे नागरिकों को सशक्त बनाने में डिजिटल बदलाव को गति दे सकते हैं। वहीं, नीति आयोग का भी मानना है कि एआई देश की अर्थव्यवस्था का नया पहिया बनेगा। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक एआई की मदद से हर साल अर्थव्यवस्था में 1.35 प्रतिशत की तेजी आएगी। जिसके दृष्टिगत चीन अपनी जीडीपी का 26 प्रतिशत तो ब्रिटेन 10 प्रतिशत एआई की मदद से जुटाएगा।

वहीं, अमेरिका के द ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के अनुसार, एआई के इस्तेमाल और शोध क्षेत्र में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है, जो इस क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाने को तैयार है। वह 2022 में इस क्षेत्र में निवेश के मामले में पांचवें नम्बर पर था। उसके मुताबिक, वर्ष 2022 में अमेरिका 47.36 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान पर था, जबकि चीन 13.41 बिलियन डॉलर का निवेश करके दूसरे स्थान पर काबिज हुआ। वहीं, ब्रिटेन 4.37 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ तीसरे स्थान पर, इजरायल 3.24 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ चौथे स्थान पर और भारत 3.24 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ पांचवें स्थान पर बना रहा।

वहीं, दुनियाभर में तकनीक पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था इंटरनेशनल डाटा कारपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में भारत में एआई सॉफ्टवेयर का बाजार 276.75 करोड़ डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर 635.88 करोड़ डॉलर हो जाएगा।

आईडीसी 2023 के आंकड़े बताते हैं कि उत्पादन में 7.1 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र में 9.5 प्रतिशत, पेशेवर सेवा में 10.4 प्रतिशत, रिटेल में 12.8 प्रतिशत और बैंकिंग में 13.4 प्रतिशत एवं अन्य क्षेत्रों में 46.1 प्रतिशत एआई का प्रयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बैंक से लेकर अन्य वित्तीय सेवा मुहैया कराने वाली कम्पनियों में इसका प्रयोग बढ़ा है। वहीं यात्रा सरल और सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन सेवाओं में भी इसका प्रयोग शुरू हुआ है। वहीं, अस्पतालों में डाटा मैनेजमेंट से लेकर ऑपरेशन थियेटर में यानी स्वास्थ्य सेवाओं में भी इसका कद बढ़ा है। वहीं, स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक और शोध केंद्रों जैसे शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। जिससे इसके बहुमुखी महत्व का पता चलता है।

बता दें कि चैटजीपीटी बनाने वाली कम्पनी ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन हैं, जो हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले हैं और इस क्षेत्र में भारत के सुनहरे भविष्य के सम्बन्ध में उन्हें आश्वस्त किया है।

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