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नोएडा में वैदिक संस्कृति की रक्षार्थ संपन्न हुआ चतुर्वेद पारायण गायत्री महायज्ञ : स्वामी दयानंद ने दीदी स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा : डॉ राकेश कुमार आर्य

नोएडा। ( संवाददाता ) यहां स्थित भंगेल गांव में अनन्य ऋषि भक्त दैनिक अग्निहोत्री श्री राकेश शर्मा ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती स्वर्गीय पूनम देवी जी की पुण्य तिथि स्मृति में अपने आवास पर 20 मई से लेकर 19 जून 2023 तक चतुर्वेदीय महायज्ञ का आयोजन कराया । यज्ञ की पूर्णाहुति 19 जून को संपन्न हुई। इस अवसर पर वैदिक विद्वान सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ राकेश कुमार आर्य, आचार्य करण सिंह और देव मुनि जी आदि का अभिनंदन सत्कार भी किया गया।


इस अवसर पर डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद जी महाराज ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को विशेष और निर्णायक गति प्रदान की। उन्होंने यह महसूस किया था कि यज्ञ की संस्कृति तभी सुरक्षित रह सकती है जब देश स्वाधीन होगा। इसके लिए उन्होंने 1877 में आयोजित किए गए दिल्ली दरबार में राजाओं के समक्ष ओजस्वी भाषण दिया था। उससे पहले 1857 की क्रांति में भी वह सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे। डॉक्टर आर्य ने कहा कि 1877 के दिल्ली दरबार में ही कांग्रेस का बीजारोपण हो गया था।
आर्य जगत के सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य करण सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का आधार है। वैदिक संस्कृति इसीलिए मानवीय संस्कृति कहलाती है कि इसमें यज्ञ की पवित्र भावना के आधार पर संसार का संचालन करने की बात कही जाती है। जिसका अभिप्राय है कि हम कर्तव्य परायण बने और दूसरों को देने का अभ्यास बनाएं । जबकि पश्चिम की भोगवादी संस्कृति में दूसरों से अपने अधिकार मांगने की प्रवृत्ति पाई जाती है। इसी प्रकार वैदिक संस्कृति के प्रति पूर्णतया समर्पित देव मुनि जी महाराज ने पंच महायज्ञ की परंपरा पर विशेष प्रकाश डाला और लोगों से अपील की कि वे पंच महायज्ञ के साथ अपने आपको समन्वित करें। इन्हीं के पालन करने से संसार का कल्याण हो सकता है। इस अवसर पर गिरीश मुनि जी और वेदों के प्रति निष्ठावान तथा उनका गहन अध्ययन करने वाले आर्य सागर खारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
यह पूरा अनुष्ठान शर्मा परिवार के तप श्रद्धा से संपन्न हुआ । अनुष्ठान में सहभागी होने वाले अनेक अतिथियों को वैदिक यज्ञ संस्कृति प्रेमी सज्जनों को ऋषि का ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश, व्यवहार भानु सम्मान भेंट स्वरूप दिया गया। ज्ञात रहे कि महर्षि दयानंद ने भी संस्कार विधि के अंतिम प्रकरण में लिखा है कि हमें अपने जीते जी तथा मृत्यु के पश्चात अपने पूर्वजों की स्मृति में वेद विद्या का प्रचार वेदोंक्त कर्म करने चाहिए धार्मिक कार्यों के लिए तन मन धन से तत्पर रहना चाहिए। ऋषि की इस आज्ञा का भली-भांति पालन शर्मा परिवार अनेक वर्षों से कर रहा है। यह परिवार अभिनंदन का पात्र है। शर्मा जी के तीनों पुत्र सुशील शर्मा, गौरव शर्मा, वरुण कौशिक व उनकी पुत्रवधू श्रीमती मंजू शर्मा श्रीमती मीनू शर्मा श्रीमती श्वेता शर्मा दैनिक यज्ञ, अतिथि यज्ञ में पूरी तरह पारंगत है नोएडा के शहरी परिवेश में यह एक आदर्श वैदिक परिवार हमें प्रतीत होता है। इस अनुष्ठान में वानप्रस्थी गिरीश मुनि, ओम मुनि जी तिलपत की महती उलेखनीय तन मन धन से पूर्णरूपेण समर्पित भूमिका रही। शर्मा परिवार श्रद्धा से युक्त होकर विगत 35 वर्षों से नियमित किये जा रहे यज्ञ अनुष्ठान के कारण प्राचीन ऋषियों के आश्रम की भांति यज्ञ स्थल शोभयमान हो रहा था। बहुत सुंदर वैदिक संस्कृति को प्रदर्शित करती चित्र वीथिकाएँ लगाई गई हैं ।साज सज्जा उत्कृष्ट थी।

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