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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से विशेष संपादकीय

‘पत्थरबाजो! भारत छोड़ो,’ भाग-3

(14) कांगड़ा-यहां पर पिछले 18000 वर्ष के इतिहास के कालखण्ड में 1620 से 1810 तक मुस्लिम शासन रहा अर्थात कुल 190 वर्ष तक यहां मुस्लिम शासन और 1856 ई. से 1947 तक कुल 90-91 वर्ष तक ब्रिटिश शासन रहा। शेष अवधि में अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता को बचाये रखने में यह क्षेत्र भी सफल रहा।
(15) कुमायंू-18000 वर्ष की कालावधि में यहां भी कभी मुस्लिम शासन स्थापित नहीं हो सका। 1816 से यहां 130 वर्ष के लिए ब्रिटिश शासन अवश्य स्थापित हुआ। कहने का अभिप्राय है कि कुमायूं 18000 वर्ष के ज्ञात इतिहास में मात्र 130 वर्ष के लिए ही प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से किसी विदेशी सत्ता का दास रहा है।
(16) कन्नौज-इस क्षेत्र में 1540 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन रहा अर्थात 316 वर्ष तक मुस्लिम शासन रहा। 1856 ई. की संधि से यहां भी ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। इस प्रकार लगभग 406 वर्ष तक यहां विदेशी सत्ता स्थापित रही।
(17) अवध-अवध भी वह दुर्भाग्य पूर्ण क्षेत्र है जहां 1192 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन तो 1856 ई. से ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। परंतु इसके उपरांत भी अवध में राष्ट्रीय आंदोलन सदा चलता रहा और देश की स्वतंत्रता प्राप्ति  तक निरंतर चलता रहा।
(18) इलाहाबाद : अपने 17600 वर्ष के पिछले इतिहास में 1583 ई. तक यहां निरंतर हिंदू शासन रहा। 1583 ई. से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन और तत्पश्चात 1857 से 1947 ई. तक यहां ब्रिटिश शासन रहा। इस प्रकार यह क्षेत्र 273 वर्षों तक मुसलमानों के और 90 वर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा। इसके सांस्कृतिक गौरव को मिटाने का हरसंभव प्रयास किया गया। परंतु हिंदू शक्ति की प्रचण्डता ने सिद्घ कर दिया कि इलाहाबाद में हमारे धर्म, संस्कृति और इतिहास की त्रिवेणी में स्नान करते ही हर भारतीय पवित्र हो जाता है। कुछ भी हो 273+90=316 वर्षों के इतिहास में इलाहाबाद ने चाहे गुलामी भोगी पर उस गुलामी की प्रतिच्छाया अपनी आत्मा पर नही पडऩे दी।
(19) जौनपुर-जौनपुर इलाहाबाद की भांति ही 1583 से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन में तथा 1856 ई. के पश्चात अंग्रेजों की अधीनता में रहा। इस प्रकार स्पष्ट है कि इलाहाबाद और जौनपुर अकबर के शासनकाल में मुस्लिमों के अधिकार में गये। जबकि सल्तनत काल में दोनों की स्वतंत्रता बनी रही।
(20) रोहिल खण्ड-यह एक ऐसा क्षेत्र रहा है जो सल्तनतकाल और मुगल काल दोनों में स्वतंत्र रहा। परंतु 1740 ई. से 1801 ई. तक यहां मुस्लिम शासन रहा। कहने का अभिप्राय है कि औरंगजेब के शासनकाल में भी यहां हिंदू स्वतंत्रता बनी रही। 1801 ई. से इस क्षेत्र को ब्रिटिश हुकूमत झेलनी पड़ी। इस प्रकार यह क्षेत्र 207 वर्ष विदेशी सत्ता से लड़ा। जिसे इसका गुलामी काल कहा जाता है।
(21) रामपुर : इस नगर ने अपनी हिंदू पहचान 1740 ई. में खोयी और यह मुस्लिम आधिपत्य में चला गया। 1947 ई. तक यह मुस्लिम रियासत रही, इसी काल में 1857 ई. की क्रांति के समय इस रियासत की अंग्रेजों से संधि हो गयी।
(22) काशी : काशी हिंदुओं की अत्यंत प्राचीन नगरी है। अत्यंत प्राचीन काल से यहां हिंदू शासन आर्य पद्घति के अनुसार चलता रहा। परंतु 1195 ई. से 1775 ई. तक यह मुस्लिम शासक के आधीन रहा। इसके पश्चात 1781 ई. में यह ब्रिटिश शासन के आधीन हो गया। इस प्रकार यह क्षेत्र लगभग 700 वर्ष विदेशी दासता में रहा और दासता से मुक्ति के लिए एक लंबा संघर्ष करता रहा।
(23) मीरजापुर : मीरजापुर अपने पिछले 18000 वर्ष के इतिहास में एक दिन भी मुस्लिम शासन के आधीन नहीं रहा। यहां हिंदू शक्ति का सूर्य चमकता रहा। 1812 ई. से यहां अंग्रेजों की सत्ता अवश्य स्थापित हो गयी थी।
(24) मथुरा : मथुरा का भी हिंदू समाज में और हिंदू इतिहास में विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। यहां मुस्लिम शासकों के द्वारा कई बार लूटमार एवं मारकाट की गयी, परंतु इसके उपरांत भी यहां मुस्लिम शासन स्थापित नहीं हो सका। 1857 ई. से यह क्षेत्र अगले 90 वर्ष के लिए ब्रिटिश शासन के अधीन अवश्य रहा। इस प्रकार मथुरा की भूमि को पराधीनता का दंश मात्र 90 वर्ष ही झेलना पड़ा था।
(25) हरिद्वार : मथुरा की भांति ही हरिद्वार का भी हिंदू इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इस पवित्र नगरी में भी कभी भी मुस्लिम शासन नहीं रहा। यहां भी 1857 ई. से ब्रिटिश शासन आरंभ हुआ। इस प्रकार मथुरा की भांति हरिद्वार भी केवल 90 वर्ष के लिए विदेशी शासन के आधीन रहा।
(26) मेरठ : मेरठ की पवित्र भूमि ने भी इतिहास के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मुस्लिम काल में यहां एक दिन के लिए भी मुस्लिम शसन नहीं रहा। यद्यपि कई बार यहां मुस्लिम आक्रांताओं ने मारकाट की। परंतु यह वीर भूमि अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में सफल रही। पराधीनता से मुक्त रहकर भी 1857 ई. की क्रांति का शुभारंभ यहीं से कोतवाल धनसिंह गुर्जर ने किया। तत्पश्चात क्रांति के विफल हो जाने पर यहां ब्रिटिश सत्ता स्थापित हो गयी। मात्र 90 वर्ष ही मेरठ को दुर्भाग्यपूर्ण पराधीनता का दंश झेलना पड़ा।
(27) मेव रियासत : मेव रियासत के 17250 वर्ष के ज्ञात इतिहास का तथ्य स्थापित करते हुए उक्त शोधपूर्ण ग्रंथ ( भारत हजारों वर्ष की पराधीनता एक औपनिवेशिक भ्रमजाल) में कहा गया है कि 1260 ई. से यह क्षेत्र मुस्लिम आधिपत्य में चला गया। जिससे निकलने के लिए इसने अनेकों प्रयास किये। पर 1857 ई. तक भी सफलता नहीं मिली। 1858 से एक संधि के अनुसार यह ब्रिटिश सत्ता के आधीन चला गया।
(28) आसाम : असम की पवित्र भूमि भी अपनी स्वाधीनता को मुस्लिम काल में अक्षुण्ण बनाये रखने में सफल रही थी। एक छोटे से क्षेत्र में मात्र 24 वर्ष मुस्लिम शासन रहा। जबकि 1858 से यह पवित्रभूमि अंग्रेजों  की एक संधि के अंतर्गत आ गयी। इसकी स्वाधीनता और सम्मान दोनों ही बचे रहे।
(29) कूच बिहार : यहां भी मुस्लिम शासन कभी नहीं रहा। 1858 ई. से यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन की एक संधि के आधीन आ गया।
(30) नागालैंड : नागालैंड की भूमि भी अपनी स्वतंत्रता को बचाये और बनाये रखने में सफल रही। यहां ब्रिटिश शासनकाल में धर्मांतरण हुआ। पर ब्रिटिश शासन किसी भी प्रकार से स्थापित नहीं हो पाया था।
(31) मेघालय मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम: इन क्षेत्रों में भी मुस्लिम शासन कभी स्थापित नहीं हो सका। 1092 से 1947 ई. तक मेघालय मणिपुर और त्रिपुरा ब्रिटिश सत्ता के आधीन मात्र 57 वर्ष रहे। जबकि सिक्किम को 1850 से 1947 तक लगभग एक शताब्दी तक अंग्रेजों के शासन के अधीन रहना पड़ा था।
(32) बंगाल-इस क्षेत्र के लिए हमें बताया गया कि यहां 1490 ई. से 1675 ई. तक मुस्लिम शासन रहा। 
जबकि कंपनी ने भी यहां 92 वर्ष शासन किया। 185 वर्ष के मुस्लिम शासन काल में धर्मांतरण भी हुआ और अत्याचार भी हुए। जिनसे मुक्ति के लिए यह क्षेत्र संघर्ष करने के लिए उठ खड़ा हुआ। इसकी संघर्षशील प्रवृत्ति से ही सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेकों देशभक्त इस भूमि ने राष्ट्र के लिए दिये।
(15) बिहार : बिहार के पिछले 17000 वर्ष के इतिहास में पराधीनता का काल केवल तीन सौ वर्ष के लिए आया, जब 1560 से 1856 ई. के मध्य इसे मुस्लिम शासन में रहना पड़ा।  इसके अतिरिक्त 1856 ईं. से इसे ब्रिटिश शासन के अधीन रहना पड़ा। इस प्रकार लगभग 385 वर्ष इस भूमि को विदेशी सत्ता के आधीन रहकर संगीनों से जूझना पड़ा।
(34) उड़ीसा- 17600 के अपने इतिहासकाल में इस क्षेत्र पर 1568 ई. से 1856 ई. तक मुस्लिम शासन और  1856 ई. से  1947 तक ब्रिटिश शासन स्थापित हो गया। यद्यपि यत्र तत्र लोग अपनी स्वाधीनता को प्राप्त करने में बीच में ही सफल होते रहे। यही स्थिति बिहार की थी जहां संपूर्ण बिहार के कई हिंदू शासक अपनी स्वतंत्रता मुस्लिम काल में भी बनाये रखने में सफल रहे थे।
(35) छत्तीसगढ़: यहां के 18000 वर्ष के इतिहास के विषय में बताया गया है कि यहां  पर मुस्लिम शासन कभी भी नहीं रहा। जबकि 1857 के पश्चात से यहां ब्रिटिश शासन अवश्य स्थापित हुआ। इस प्रकार छत्तीसगढ़ को भी मात्र 90 वर्ष के लिए ही विदेशी सत्ता के आधीन रहना  था।
(36) बस्तर : यहां पर भी मुस्लिम शासन कभी स्थापित नहीं हो सका। छत्तीसगढ़ की भांति इस क्षेत्र में भी 1857 से ब्रिटिश शासकों का पदार्पण हुआ और उनकी अधीनता में बस्तर को 90 वर्ष व्यतीत करने पड़े।
(37) भोजपाल होमगंगा-भोपाल का अपना एक और वैभवशाली इतिहास रहा है। 17300 वर्ष के हिंदू इतिहास में इस प्रदेश या क्षेत्र को 13वीं शताब्दी से 1856 ई. तक विदेशी मुस्लिम शासन के आधीन रहना पड़ा। जबकि 1857 से यहां ब्रिटिश शासन की स्थापना हो गयी। भोपाल क्षेत्र के विषय में बताकर गया है कि भोपाल  गांव में 240 वर्ष तक और भोपाल क्षेत्र में 128 वर्ष तक विदेशी मुस्लिम शासन रहा। 1817 ई. से यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के आधीन चला गया।

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