वैदिक सम्पत्ति: इतिहास, पशुहिंसा और अश्लीलता , गतांक से आगे…

20230319_122131

गतांक से आगे…

वेदों ने इस बीभत्स वर्णन के साथ – साथ संसार के एक बहुत बड़े पाप का खुलासा करते हुए उपदेश दिया है कि किसी मनुष्य को अपनी पुत्री के साथ इस प्रकार का घृणित व्यवहार कभी न करना चाहिए। अथर्ववेद में आज्ञा है कि-

यस्त्वा स्वप्ने निपद्यते भ्राता भूत्वा पितेव च ।
बजस्तान्त्सहतामितः क्लीवरूपांस्तिरोटिन: ॥ (अथर्व०8/6/7)

अर्थात् तुझ को यदि सोते समय भूलकर भी तेरा भाई अथवा तेरा पिता प्राप्त हो, तो वे दोनों गुप्तः पापी औषधिप्रयोग से नपुंसक करके मार डाले जाँय । कैसा कठोर दण्ड है ? जब स्वप्न में भी – धोखे में भी – इस प्रकार के कुत्सित विचार आने पर पिता को इतना बड़ा दण्ड देने का विधान है, सब उपर्युक्त अलंकार का यही अभिप्राय निष्पन्न होता है कि वेदों ने ऐसे अपवाद की बीभत्सता की पराकाष्ठा दिखलाने और उसकी निन्दा करने के लिए ही स्थान दिया है । वेदों में ही नहीं प्रत्युत वेद के पश्चात् के साहित्य में भी इस अलङ्कार के धोखे से बचने के लिए इसकी निन्दा कर दी गई है । यथा-

प्रजापतिः स्वां दुहितरमभिदध्यौ दिवं वोषसं वा मिथुन्नेयास्यामिति
बभूवत देवानामाग श्रासं य इत्थं स्वां दुहितरमस्माकं स्वसारं करोति ।

अर्थात् प्रजापति ने अपनी दुहिता द्यौ अथवा उषा का बुरी दृष्टि से चितवन किया और इसके साथ रहूंगा, इस प्रकार का विचार करके संग किया, पर देवों के मत से यह पाप हुआ। उन्होंने कहा कि जो इस प्रकार अपनी दुहिता अर्थात् हमारी बहन के साथ बर्ताव करता है; वह पाप करता है। इस प्रकार से यहाँ इस जड़ उषा के अलङ्कार से स्पष्ट कह दिया गया है कि यदि कोई ऐसा करेगा, तो वह पापी समझा जायगा । भागवत में भी कहा गया है कि-

नैत्पूर्वै: कृतं त्वद्य न करिष्यन्ति चापरे ।

यत्तव दुहितरं गच्छेरनिगृह्यांगजं प्रभुः । (श्रीमद्भागवत 3/12)

अर्थात् है प्रजापति ! तुमने अपनी कन्या को ग्रहण करके जैसा पाप किया है, वैसा न कभी किसी ने पूर्व में किया था और न कोई भविष्य में करेगा । इन प्रमाणों से सूचित होता है कि वेदों का यह अलङ्कार कृत्यों में ऐसे पाप दिखलाने के लिए प्राकृतिक जड़ उषा में प्रकट किया गया है और वेदों के अतिरिक्त अन्य साहित्य में भी जोर से कहा गया है कि इस प्रकार का सम्बन्ध पाप है, इसलिए मनुष्यों में जारी न हो।

इसके अतिरिक्त कुछ लोग कहते हैं कि वेदों में गुप्तेन्द्रियों का भी वर्णन है। अथर्ववेद में ‘बृहच्छेप’ का और ऋग्वेद में ‘सप्तबध्रि’ और ‘शिपिविष्ट’ का वर्णन है। किन्तु इन शब्दों में किसी मनुष्य की कामक्रीड़ा का वर्णन नहीं है। ये शब्द तो आकाशस्थ सातों किरणों के लिए आये हैं। सातों किरणें एक साथ स्तम्भरूप से जब पृथिवी को ओर आती हैं तो मानो एक दीर्घ शिश्र मैथुन करने के लिये बढ़ता है । पर वही जब बादलों में छिप जाती है तब मानो वह शेप बध्रि अर्थात् बधिया हो जाता है। लोकमान्य तिलक और अविनाशचन्द्र दास आदि विद्वानों ने इसे अलङ्कार हो बतलाया है। वास्तव में यह अलङ्कार ही है। पर शङ्का करनेवाले इसे भी अश्लील वर्णन बतलाते हैं। इसलिए यहाँ इसका भी समाधान किया जाता है ।

हम कई बार लिख चुके हैं कि वेदों के तीन संसार हैं। यह वर्णन आकाशीय संसार का ही है। आकाश में भी स्त्रीपुरुष हैं, उनके विवाह है, गर्भाधान है, रति है और वाजीकरण आदि भी हैं। यहाँ यह बृहच्छेप प्राकृतिक रति का ही वर्णन करता है । इससे गृहस्थधर्म की शिक्षा मिलती है। यह गृहस्थधर्म की शिक्षा इस पृथिवीस्थ संसार के विवाह- प्रकरण में दी गई है। पर इससे यह न समझना चाहिये कि वेदों ने गुप्ताङ्गों का ऐसा वर्णन करके अश्लीलता फैला दी है और वेद कालीन लोग नंगे फिरते थे। वेद भगवान ने जिस प्रकार हिसा संबंधी दूव्यर्थक शब्दों का स्वयं समाधान कर दिया है और पिता पुत्री तथा भाई-बहन के वैदिक अलंकारों का स्वयं स्पष्टीकरण कर दिया है ,उसी तरह इस गुप्तइंद्रियविषयक आकाशीय वर्णन से उत्पन्न हुई भ्रांति का भी निवारण कर दिया है।
क्रमशः

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betnano
betnano
betnano
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpas giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş