Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से भयानक राजनीतिक षडयंत्र भारतीय संस्कृति राजनीति

15 अगस्त सन 1947 और भारत का विभाजन, भाग-3

15 अगस्त सन 1947 और भारत का विभाजन, भाग-3अंग्रेज शासक राष्ट्र की एकता और अखण्डता को निमर्मता से रौंदता रहा और हम असहाय होकर उसे देखते रहे। इनसे दर्दनाक और मर्मांतक स्थिति और क्या हो सकती है? कांग्रेस इस सारे घटनाक्रम से आंखें मूंदे रही। उसकी उदासीनता सचमुच लज्जाजनक है। बर्मा, रंगून और माण्डले की जेलें हमारे देशभक्तों को सजा देने के काम आती रहीं। कोई वह विदेश की जेलें नहीं थी, अपितु वह अपने ही देश की जेलें थीं, जहां अंग्रेज हमारे देशभक्तों को ले जाया करते थे। उन पर कांग्रेसी तत्कालीन नेतृत्व ने जरा भी विचार नहीं किया।
ऐसा लगता है कि यथाशीघ्र सत्ता मिल जाना और इस देश पर शासन करना ही कांग्रेसी नेताओं की प्राथमिकता थी। इसलिए जब अंग्रेज यहां से गया तो उसने मालदीव को भी अलग देश का स्तर दे दिया और इस प्रकार अंग्रेज हमारे देश के तीन टुकड़े कर गया।
पिछली सदी की भयानक त्रासदी थी-भारत विभाजन, जिसमें लाखों लोग जनसंख्या की अदला-बदली में मारे गये थे। कांग्रेसी नेतृत्व ने उस ओर ध्यान नहीं दिया कि इस अचानक जनसांख्यिकीय परिवर्तन के क्या परिणाम होंगे? इसलिए उसने पूर्व के विभाजनों की भांति इस विभाजन को भी सहज रूप में मान लिया। एक षडय़ंत्र के अंतर्गत हम आज तक वही पढ़ते आ रहे हैं जो अंग्र्रेजों ने हमारे विषय में लिख दिया है।
यह केवल भारत ही है जहां अपने गौरवपूर्ण अतीत की बातें करना भी साम्प्रदायिकता माना जाता है। लगता है हमने अपने अतीत के कड़वे अनुभवों से कोई शिक्षा नहीं ली है। पाकिस्तान का अस्तित्व भारत का सातवां और बांग्लादेश आठवां टुकड़ा है। क्या अनुसंधानकर्ता इस ओर ध्यान देंगे?
यदि गंभीरता से आज का इतिहासकार इस ओर ध्यान दे और हमारी वर्तमान पीढ़ी को सच-सच बताये कि देश का विभाजन मजहब कराता है, तो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष भारतीय राजनीति से देश का मोह भंग होने में कुछ भी देर नहीं लगेगी। वास्तव में धर्मनिरपेक्ष भारतीय राजनीति इस देश के लिए एक अभिशाप है, और इस अभिशाप को हमने अपने लिए इसलिए अनिवार्य मान लिया है कि इसकी ओट में वोटों का धु्रवीकरण और लोगों का तुष्टिकरण करने में सहायता मिल जाती है। विदेशी शक्तियों ने भारत को जानबूझकर धर्मनिरपेक्ष राजनीति की भांग पिला रखी है, जिससे कि भारत को आत्मबोध, इतिहासबोध और राष्ट्रबोध न होने पाये। जिस दिन भारत को आत्मबोध, इतिहासबोध और राष्ट्रबोध हो जाएगा उस दिन भारत सचमुच अपनी दिव्य आभा और दीप्ति से भासित हो उठेगा, और वही स्थिति वास्तव में भारत के उत्थान की और भारत के विश्वगुरू बनने का सबसे पुख्ता प्रमाण होगा।
(लेखक की पुस्तक ‘वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?’ से)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
Hitbet giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş