25 मानचित्रों में भारत के इतिहास का सच, भाग …9

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कुषाण वंश

गुर्जर शासक कुषाणों को विदेशी कहकर हम भारतवासियों से दूर करने का प्रयास किया गया है। ऐसा लिखने वाले इतिहास लेखकों की दृष्टि में मुगल तो इसलिए भारतीय हो गए कि वे चाहे बेशक बाहरी थे पर यहां आकर उनकी पीढ़ियां हमारे साथ घुलमिल गईं, पर गुर्जर कुषाणों को मुगलों से भी पहले यहां बसे होने के उपरांत भी विदेशी बताए जाने का भ्रम फैलाया जाता है।
यह भ्रम केवल हिंदू समाज में एकता स्थापित न होने देने की दुर्भावना के वशीभूत होकर फैलाया जाता है। यही कारण है कि मुगलों के साम्राज्य से भी विस्तृत साम्राज्य कुषाण वंश के शासकों का होने के उपरांत भी उस पर हम भारतीयों का ध्यान नहीं जाता। जबकि कुषाण वंश के शासक आज के भारत के 20 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर और इससे बाहर इससे भी अधिक बड़े भूभाग पर शासन करते थे। यदि उनका भारत “हमारा भारत” हो जाए तो वह भारत आज के कई देशों के बड़े भूभाग को लेकर बनेगा।
कुषाण शासकों के संदर्भ में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि यह सभी लोग मूल रूप में भारतीय थे। राहुल सांकृत्यायन कहते हैं कि “ईसा पूर्व 7 वीं – 8वीं शताब्दी से हम देखते हैं कि सारे मध्य एशिया में हिंद यूरोपीय वंश की शक आर्य शाखा का ही प्राधान्य है। मध्य एशिया में उन्होंने मुंडा द्रविड़ के प्राधान्य को नष्ट किया और स्वयं उनका स्थान लेकर आगे उत्तरापथ और सिकियांग् में शक और दक्षिणापथ में आर्य के रूप में अपने को प्रकट किया।”
पंडित रघुनंदन शर्मा लिखते हैं कि “जहां से सारी मनुष्य जाति संसार में फैली है उस मूल स्थान का पता हिंदुओं, पारसियों, यहूदियों और ईसाइयों की धर्म पुस्तकों से इस प्रकार लगता है कि वह स्थान कहीं मध्य एशिया में था। इस प्रकार सच्चे आर्यों की प्रधान ईरानी शाखा ने हिमालय का इशारा किया है।”
जिन देशों का अस्तित्व अब से 500 या 1000 वर्ष या उससे अधिक वर्ष पूर्व नहीं था और उन पर कभी जंबूद्वीप का या हमारे चक्रवर्ती सम्राटों का शासन चलता था, उनका वह क्षेत्र उस काल में भारत का क्षेत्र था , हमें ऐसा मानना चाहिए। इसलिए वहां के लोगों को और वहां की इतिहास परंपरा को हमें अपने साथ जोड़कर देखना चाहिए। ऐसा करने से हमारे इतिहास का सच हमारे सामने आएगा और हमारी पीढ़ियां अपने अतीत पर गौरव कर सकेंगी।
कुषाण वंश के शासकों ने सन 25 से 200 ई0 से भी आगे तक शासन किया। सम्राट कनिष्क इस वंश का प्रतापी शासक था।

मेरी पुस्तक “25 मानचित्र में भारत के इतिहास का सच” से

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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