Categories
Uncategorised

पाकिस्तान की ओर एक बार फिर झुकते अमेरिका के इरादे क्या है ?

पाकिस्तान पर फिर क्यों मेहरबान हुआ अमेरिका

रंजीत कुमार

ऐसे वक्त जब अमेरिका पाकिस्तान को फिर से गले लगा रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले शनिवार उसे दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हैरान कर दिया। पाकिस्तान ने 150 से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार जमा कर लिया है और इसका बटन किसके हाथ में है, इस पर अमेरिकी और यूरोपीय हलकों में अक्सर शंका जाहिर की जाती रही है।

गफलत कहां हुई
पाकिस्तान में आतंकवादी और जिहादी तत्वों का बोलबाला रहने की वजह से अमेरिका की उस पर गहरी नजर रहती है लेकिन उसने आधिकारिक तौर पर कभी यह नहीं कहा कि पाकिस्तान के परमाणु बमों का भंडार सुरक्षित हाथों में नहीं है।

फिर भी, सचाई कभी-कभी मुंह से निकल जाती है। ऐसे ही संभवत: गलती से, बाइडन के मुंह से निकल गई। यही वजह रही कि अमेरिकी प्रशासन ने फिर अपने ही राष्ट्रपति की बात को काटते हुए बयान जारी किया कि पाकिस्तान के परमाणु बमों पर सरकार का विश्वसनीय नियंत्रण है।
बाइडन ने यह बात किसी आधिकारिक मंच से नहीं बल्कि डेमोक्रेटिक पार्टी की एक सभा में कही थी। जाहिर है, यह अमेरिका की अधिकृत नीति में फिट नहीं बैठ रहा था।
इस बीच, पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के इस बयान पर घोर एतराज जाहिर किया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने अपने राष्ट्रपति के बयान से मुकरने में ही भलाई समझी।

तो क्या अमेरिकी प्रशासन सचाई जानते हुए उस पर पर्दा डालने का काम कर रहा है? असल में अमेरिका अस्सी के दशक से ही पाकिस्तान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर परदा डालने की कोशिश करता रहा है।

अस्सी के दशक में जब दुनिया भर में चर्चा होने लगी कि पाकिस्तान परमाणु बम बना रहा है तो अमेरिकी संसद में भी इस पर चिंता जाहिर की गई थी।
तब की रॉनल्ड रेगन सरकार ने पाकिस्तान को छूट देते हुए उसे सैनिक और आर्थिक मदद जारी रखने पर जोर दिया।
उस समय अफगानिस्तान में सोवियत संघ समर्थित सरकार थी, जिसके खिलाफ पाकिस्तान ‘अग्रिम मोर्चे का देश’ बना हुआ था। सोवियत साम्यवाद को अधिक खतरनाक मानते हुए तब अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से आंखें मूंदने का फैसला किया।
इससे चिंतित होकर सांसद लैरी प्रेसलर ने अमेरिकी सीनेट में अन्य सहयोगी सांसदों के समर्थन से 1961 के विदेशी सहायता कानून में एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। इसमें प्रावधान था कि पाकिस्तान को सैनिक और आर्थिक मदद तभी दी जा सकती है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति प्रमाणित करें कि पाकिस्तान के पास परमाणु बम नहीं है या वह परमाणु बम नहीं बनाने वाला।
तब रेगन सरकार का तर्क था कि पाकिस्तान को यदि अधिक सैनिक और वित्तीय मदद दी जाए तो वह परमाणु बम बनाने की जरूरत नहीं समझेगा। आखिरकार अमेरिकी संसद ने 1961 के विदेशी सहायता कानून में संशोधन को पारित कर दिया, जिसे प्रेसलर संशोधन के नाम से जाना गया। यह प्रस्ताव 8 अगस्त, 1985 से लागू हो गया।
यानी अब अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान को तब तक कोई सैनिक और वित्तीय मदद नहीं दे सकते थे, जब तक इस आशय का प्रमाणपत्र नहीं जारी करते कि उसके पास न तो परमाणु बम है और न ही वह इस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।
रेगन के बाद जॉर्ज बुश प्रशासन ने भी प्रेसलर कानून का आदर किया, लेकिन पेंटागन में एक ऐसी लॉबी थी जो पाकिस्तान को किसी भी हाल में सैनिक व आर्थिक मदद जारी रखने के लिए बुश प्रशासन पर दबाव डाल रही थी।
सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी रक्षा मुख्यालय में वैसी ही पाक समर्थक लॉबी आज फिर सक्रिय हो गई है। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले दो दशकों से पाकिस्तान के प्रति अमेरिका का रवैया बदला हुआ दिख रहा था।

अमेरिकी राष्ट्रपतियों- बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश (जूनियर), बराक ओबामा और डॉनल्ड ट्रंप ने माना कि अपने को परमाणु हथियारों से लैस घोषित कर चुके पाकिस्तान के समाज और प्रशासन पर आतंकवादी तत्व हावी होते जा रहे हैं जो क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।
डॉनल्ड ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया था कि पाकिस्तान ने पिछले दो दशकों के दौरान अमेरिका के साथ केवल छल किया है और आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर उससे तीस अरब डॉलर से अधिक का दोहन किया है।
पिछले दो वर्षों में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी पाकिस्तानी शासकों से दूरी बनाए रखी थी। अब अचानक अमेरिका ने जिस तरह से पाकिस्तान को गले लगाने का फैसला किया, यह सबको हैरान कर रहा है।
इमरान खान की सरकार गिरते ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अमेरिका के दौरे किए और पाकिस्तान के लिए ऐसी ट्रोफी हासिल कर ली, जो अब तक वहां का कोई भी शासक नहीं ले पाया था।

अमेरिका ने जहां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर तक बता डाला, वहीं उस इलाके पर पाकिस्तान की संप्रभुता बताने की भी कोशिश की।
इसके साथ पाकिस्तान को 45 करोड़ डॉलर के वित्तीय अनुदान और एफ-16 लडाकू विमानों को आधुनिक बनाने के सहायता कार्यक्रम का भी एलान कर दिया।
तर्क यह दिया कि एफ-16 विमानों को आधुनिक बनाने में यह मदद उसे आतंकवादी तत्वों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने के मकसद से दी जा रही है।

यह दलील कितनी बेतुकी है इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस पर अमेरिका में ही कहा कि ‘आखिर आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं।’ वास्तव में अमेरिका द्वारा फिर से पाकिस्तान को गले लगाना भारत के लिए विशेष चिंता का कारण है क्योंकि जब भी पाकिस्तान को अमेरिकी सैनिक सहायता मिली है, उसने उसका भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का भय पैदा हुआ है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
holiganbet giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel